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26 सितंबर 2018

,बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान में पूरे चार साल बाद ,,निर्वाचित प्रतिनिधियों की सरकार के साथ ही लोकतंत्र लोट आया है

कहने को तो ,,राजस्थान के वकीलों को संरक्षण देने वाली ,,उनके कल्याणकारी योजनाओ को क्रियान्वित करने वाली संरक्षक संस्था ,,बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान में पूरे चार साल बाद ,,निर्वाचित प्रतिनिधियों की सरकार के साथ ही लोकतंत्र लोट आया है ,लकिन इस निर्वाचन के बाद बढे बढे वायदे करके आये प्रत्याक्षियों में से किसी भी प्रत्याक्षी ने अभी तक वकीलों के हक़ संघर्ष और कल्याण के लिए कोई खास क़दम नहीं उठाया है ,,जो लोग पहले निर्वाचित होकर आते रहे है ,,रिनिवल सहित पुरानी सभी व्यस्थाएं उनकी सहमति से थीं ,लेकिन जो लोग नए निर्वाचित होकर गए है ,उन्होंने बढे बढे वायदे किये ,,रिनिवल खत्म करवाने ,तत्काल कल्याणकारी व्यवस्थाएं लागु करने ,चिकित्सा क्षतिपूर्ति राशि ,,मृतक आश्रितों के परिजनों को क्षतिपूर्ति तत्काल दिलवाने ,उनकी राशि बढ़ाने सहित सभी बढे वायदे किये ,लेकिन कार्यभार ग्रहण करने के बाद ऐसे निर्वाचित हमदर्द साथियों की भी चिड़ी चुप है ,,इधर नियमित प्रेक्टिशनर वकीलों के सामने वही रिनिवल का फंडा जस का तस बना है ,बार कौंसिल ने रिनिवल की लिस्ट डालते हुए अंतिम रिनिवल तिथि देश के महानतम वकील जिनका लोगो बार कौंसिल ऑफ़ इण्डिया की वेबसाइट पर है ,उन महात्मा गाँधी की जन्मतिथि जो एक हफ्ते बाद 2 अक्टूबर को आ रही है वोह तारीख अंतिम निर्धारित की है ,अफ़सोस तो होता है ,खेर कुछ तो मजबूरियां रही होंगी कोई यूँ ही बेवफा नहीं होता ,इसी तर्ज़ को मान लेते है ,लेकिन जिन सेकड़ो वकील साथियों के चिकित्सा खर्च के क्षतिपूर्त बिल स्वीकृत होकर चेक देने के लिए पढ़े है ,जिन वकीलों की मृत्यु होने के बाद उनके परिजनों की सांत्वना क्षतिपूर्ति राशि दिया जाना है ,उन पेंडिग दरख्वास्तों का निस्तारण तो एक हफ्ते के भीतर बढे हुए दिल के साथ हो ही जाना चाहिए था जो ,अभी तक नहीं हुआ ,,बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान ने वकीलों के कल्याण के लिए एक जम्बोजेट समिति सभी सदस्यों को मिलाकर बनाई है इनमे वकील साथियों की उम्मीदें शामिल है ,इस समिति को वकीलों के कल्याण ,उनकी क्षतिपूर्ति ,सहायता राशि ,मृतक आश्रित सहायता राशि ,चिकित्सा सहायता राशि ,,सहित सभी कल्याणकारी कार्यक्रमों पर बैठक में चर्चा कर एक बैठक एक हफ्ते में बुलाकर ,ऐतिहासिक कर्तव्य निर्वहन ,का उदाहरण पेश करना चाहिए था ,लेकिन वही बात ,,बहुत शोर सुनते थे सींने में दिल का ,,जो चीरा तो क़तरा ऐ खू न निकला ,,फ़िलहाल तो वही कहावत है ,,यूँ तो बाते और भी है ,,वायदे बहुत कुछ हुए थे ,,लोकतंत्र के बाद कुछ नए चेहरे जिन वायदों के साथ आये थे उन्हें गुटबाज़ी में गुम हो जाने की जगह किये गए वायदों पर क़ायम रहते हुए ,पहली बैठक में उन वायदों को पूरा करने की प्रक्रिया क्रियान्वित करने की ज़िद करना चाहिए थी ,अब तक बहुत कुछ करके दिखा देना चाहिए था ,लेकिन रिनिवल एक अनावश्यक बोझ यथावत के सिवा अभी तक कुछ नया ,कुछ ख़ास शुरू नहीं हो सका है ,,मेरे इन अल्फ़ाज़ों का प्लीज़ बुरा न ,माने ,,बुरा लगे तो प्रतिकार ,करे ,लेकिन आप हमारी ,हमारे वकील सदस्य साथियों की उम्मीदें हो ,हमारा गुरुर हो ,हमारे निर्वाचित प्रतिनिधि हो ,हम आप को कुछ करने ,,वायदे पुरे करने की याद न दिलाये तो क्या करे , हो सकता है हमारी उम्मीदों से कहीं बढ़कर आपकी कार्ययोजनाएं हो ,लेकिन रिनिवल खत्म ,,तत्काल चिकित्सा क्षतिपूर्ति कल्याण बिलों ,,मृतक आश्रितों के दावों का भुगतान तो होना ही चाहिए ,,कल्याणकारी योजनाओं ,,वकीलों के हित संरक्षण ,कल्याण विचार पर अगर समिति बनी ,है तो एक हफ्ता गुज़र गया तो क्या हुआ ,इसी हफ्ते एक नया संशोधित प्रारूप जो वकीलों की उम्मीदों की कसौटी पर बेहतर से बेहतर हो ,होना तो चाहिए ही सही,, नहीं तो जैसा आप चाहें कीजिये ,,,हम तो सदस्य है ,,आप निर्वाचित है ,,जो चल रहा है वोह भी चलेगा तो वकील कोई क्रांति तो करने वाले नहीं ,अनुशासित है ,,अनुकरण करेंगे ,धन्यवाद आदरणीय सभी बंधुओ को एक बार फिर बधाई ,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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