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07 अगस्त 2018

अपने घर के लोगों को नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ताकीद किया करते थे

और (ऐ रसूल) कु़रान में (कुछ) मूसा का (भी) तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह (मेरा) बन्दा और साहिबे किताब व शरीयत नबी था (51)
और हमने उनको (कोहे तूर) की दाहिनी तरफ़ से आवाज़ दी और हमने उन्हें राज़ व नियाज़ की बातें करने के लिए अपने क़रीब बुलाया (52)
और हमने उन्हें अपनी ख़ास मेहरबानी से उनके भाई हारून को (उनका वज़ीर बनाकर) इनायत फ़रमाया (53)
(ऐ रसूल) कु़रान में इसमाईल का (भी) तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह वायदे के सच्चे थे और भेजे हुए पैग़म्बर थे (54)
और अपने घर के लोगों को नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ताकीद किया करते थे और अपने परवरदिगार की बारगाह में पसन्दीदा थे (55)
और (ऐ रसूल) कु़रान में इदरीस का भी तज़किरा करो इसमेंशक नहीं कि वह बड़े सच्चे (बन्दे और) नबी थे (56)
और हमने उनको बहुत ऊँची जगह (बेहिश्त में) बुलन्द कर (के पहुँचा) दिया (57)
ये अम्बिया लोग जिन्हें खु़दा ने अपनी नेअमत दी आदमी की औलाद से हैं और उनकी नस्ल से जिन्हें हमने (तूफ़ान के वक़्त) नूह के साथ (कश्ती पर) सवारकर लिया था और इबराहीम व याकू़ब की औलाद से हैं और उन लोगों में से हैं जिनकी हमने हिदायत की और मुन्तिख़ब किया जब उनके सामने खु़दा की (नाजि़ल की हुई) आयतें पढ़ी जाती थीं तो सजदे में ज़ारोक़तार रोते हुए गिर पड़ते थे (58) सजदा
फिर उनके बाद कुछ नाख़लफ (उनके) जानशीन हुए जिन्होंने नमाज़ें खोयी और नफ़सानी ख़्वाहिशों के चेले बन बैठे अनक़रीब ही ये लोग (अपनी) गुमराही (के ख़ामयाजे़) से जा मिलेंगे (59)
मगर (हाँ) जिसने तौबा कर लिया और अच्छे-अच्छे काम किए तो ऐसे लोग बेहिश्त में दाखि़ल होंगे और उन पर कुछ भी जु़ल्म नहीं किया जाएगा वह सदाबहार बाग़ात में रहेंगे (60)

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