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20 जून 2018

हमने किसी तरह उन पर ज़ल्म नहीं किया

और हमने किसी तरह उन पर ज़ल्म नहीं किया बल्कि उन लोगों ने आप अपने ऊपर (नाफरमानी करके) ज़ुल्म किया फिर जब तुम्हारे परवरदिगार का (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो न उसके वह माबूद ही काम आए जिन्हें ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थें और न उन माबूदों ने हलाक करने के सिवा कुछ फायदा ही पहुँचाया बल्कि उन्हीं की परसतिश की बदौलत अज़ाब आया (101)
और (ऐ रसूल) बस्तियों के लोगों की सरकशी से जब तुम्हारा परवरदिगार अज़ाब में पकड़ता है तो उसकी पकड़ ऐसी ही होती है बेशक पकड़ तो दर्दनाक (और सख़्त) होती है (102)
इसमें तो शक नहीं कि उस शख़्स के वास्ते जो अज़ाब आखि़रत से डरता है (हमारी कुदरत की) एक निशानी है ये वह रोज़ होगा कि सारे (जहाँन) के लोग जमा किए जायंगे और यही वह दिन होगा कि (हमारी बारगाह में) सब हाजि़र किए जायंगे (103)
और हम बस एक मुअय्युन मुद्दत तक इसमें देर कर रहे है (104)
जिस दिन वह आ पहुँचेगा तो बग़ैर हुक्मे ख़़ुदा कोई शख़्स बात भी तो नहीं कर सकेगा फिर कुछ लोग उनमे से बदबख़्त होगें और कुछ लोग नेक बख़्त (105)
तो जो लोग बदबख़्त है वह दोज़ख़ में होगें और उसी में उनकी हाए वाए और चीख़ पुकार होगी (106)
वह लोग जब तक आसमान और ज़मीन में है हमेशा उसी मे रहेगें मगर जब तुम्हारा परवरदिगार (नजात देना) चाहे बेशक तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है कर ही डालता है (107)
और जो लोग नेक बख़्त हैं वह तो बेहेशत में होगें (और) जब तक आसमान व ज़मीन (बाक़ी) है वह हमेशा उसी में रहेगें मगर जब तेरा परवरदिगार चाहे (सज़ा देकर आखि़र में जन्नत में ले जाए (108)
ये वह बख़्शिश है जो कभी मनक़तआ (खत्म) न होगी तो ये लोग (ख़ुदा के अलावा) जिसकी परसतिश करते हैं तुम उससे शक में न पड़ना ये लोग तो बस वैसी इबादत करते हैं जैसी उनसे पहले उनके बाप दादा करते थे और हम ज़रुर (क़यामत के दिन) उनको (अज़ाब का) पूरा पूरा हिस्सा बग़ैर कम किए देगें (109)
और हमने मूसा को किताब तौरैत अता की तो उसमें (भी) झगड़े डाले गए और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हुक्म कोइ पहले ही न हो चुका होता तो उनके दरमियान (कब का) फैसला यक़ीनन हो गया होता और ये लोग (कुफ़्फ़ारे मक्का) भी इस (क़ुरान) की तरफ से बहुत गहरे शक में पड़े हैं (110)

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