कुल्लू नफ़्सुल ज़ायकातुल मोत ,,मोत का मज़ा हक़ शख्स को चखना है ,,लेकिन कोई
हँसता खेलता ,,देश ,,देश के लोगो के लोकतंत्र के लिए ज़िम्मेदार ,,,एक
निगराकर ,,हमे यूँ ही अचानक रोता बिलखता छोड़ जाएगा ,,ख़्वाबों में भी गुमान
नहीं था ,,जी हाँ दोस्तों में बात कर रहा हूँ , सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ
वकील ,,हमारे साथी ,,बेबाक टिप्पणीकार ,,विश्लेषक ,,निष्पक्ष निर्भीक
पत्रकार भाई सालार एम खान ,,जो हमेशा देश और देशवासियों के लिए समर्पित
होकर ,पीड़ित उत्पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए तत्पर रहते थे ,,वोह थे
,,,जो लिखते थे वही साबित होता था ,,वोह मुद्दों को जानकर ,,सियासत की नब्ज़
पहचानते थे और पूर्वानुमान ,,पूर्व सर्वेक्षण के बाद उनकी जो सटीक टिप्पणी
हुआ करती थी ,,वोह चाहे हितबद्ध लोगो को बुरी लगती हो ,लेकिन बाद में
चुनाव परिणाम के बाद वही टिप्पणी सच साबित होती रही है ,,कोटा में हमारे
वकालत के दफ्तर आबिद अख्तर एसोसिएट लॉ फर्म के साथ भी उनका विश्वसनीय जुड़ाव
था ,,इसीलिए कोटा संभाग ,,की सभी राजनितिक रिपोर्टिंग उन्होंने हमारे
दफ्तर में ,हमारे कम्यूटर पर तैयार कर प्रकाशन के लिए भेजी ,जो दफ्तर उनके
बगैर अब सूना सूना सा लगने लगा है ,,राजस्थान के गौरव जयपुर में पले बढे
सालार एम खान ,ऍन सी सी के कमानडेंट केडेट भी थे ,वोह यारों के यार कहे
जाते थे ,,रुपया उनके लिए अहमियत नहीं था ,सिर्फ इंसाफ ,,इन्साफ के लिए जंग
,अल्फ़ाज़ों के साथ ईमानदारी ही उनका कर्तव्य था ,,मुझे उनके साथ कोटा के
सियासी विश्लेषण ,,अजमेर संभाग खासकर टोंक अज़हरुद्दीन की उम्मीदवारी के समय
सियासी विश्लेषण में रहने का अवसर मिला ,,मुझे पता है इन मौक़ों पर
,,राष्ट्रदूत में उनकी खबरों से कई लोग खफा थे ,कई लोग उन्हें ,हमे खरीदना
चाहते थे ,कई ऑफर आये ,लेकिन बंदे में दम था ,बिकने ,,दबाव में प्रभावित
होने की सिफ़्त तो दूर उन्होंने किसी की चाय भी नहीं पी ,,अपना खाना ,अपना
पहनना व्हीकल अपना ,,ठहरना अपना ,और रिपोर्टिंग बिंदास ,क़ानून की जानकारी
बिंदास ,,अदालतों में लॉ फर्म में साथियों के साथ क़ानून का सर्वोच्च ज्ञान
,,अदालतों में बहस के दौरान कामयाब दलीलें ,, मदद का स्वभाव यही उनकी खूबी
थी ,,नागपुर जाने के एक दिन पूर्व उन्होने वर्तमान चुनाव में सर्वेक्षण के
लिए मुझ से चर्चा की थी ,,में वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी में होने
की वजह से ,मेने उनसे माफ़ी चाहते हुए कहा था ,,में अब प्रदेश कांग्रेस
कमेटी का सदस्य हूँ ,इसलिए मेरी सोच कांग्रेस से प्रभावित होना स्वाभाविक
ही इस विश्लेषण में में निष्पक्ष होकर आपका सहयोग नहीं कर सकूंगा
,,उन्होंने सहज कहा ,,नहीं फिर भी हम बहुत कुछ आप से निकाल लेंगे
,,उन्होंने चेक अनादरण मामले में भीलवाड़ा के एक मुक़दमे के बारे में बात की
,फिर वोह नागपुर के लिए रवाना हो गए ,,उनकी 6 अप्रेल की फेसबुक पोस्ट जिसमे
उन्होंने खुदा से माफ़ी मांगी ,खुदा का कई बार ज़िक्र किया ,,हमने पढ़ी
,,लेकिन हमे तो ख्वाबों में भी पता नहीं था ,के एक शख्स जो यूँ मुस्कुराता
है ,,एक शख्स जो यूँ मुस्कुराकर बेबस ,,,लाचार लोगो को इंसाफ दिलाता है
,,एक शख्स जो देश के ज़िम्मेदार नागरिक के कर्तव्य बेबाकी निष्पक्षता से
निभाता है ,एक शख्स जो लिखता है ,सच लिखता है ,,,वोह न प्रभावित होता है
,,न पक्षपात करता है ,,जो लिखता है वोह सही और सच साबित होता है ,जो लिखा
है उसका सही और सच होना उनकी क़लम से निकलना ही सच साबित करता है ,,वोह शख्स
हमे यूँ ही अचानक रोता बिलखता छोड़ जाएगा ,,मुझे यह कहने में कोई गुरेज़
नहीं के ,सालार एम खान के वकील होने के नाते वकालत के क्षेत्र में तो
अपूरणीय क्षति हुई है ,लेकिन राष्ट्रदूत अख़बार ,,जिनके लिए वोह बेबाक
,,निष्पक्ष ,राजनितिक विश्लेषक रिपोर्टिंग करते थे ,वोह अख़बार भी उनके निधन
से स्तब्ध है ,,उसे भी भी अपूरणीय क्षति हुई है ,निधन के एक दिन पहले
,,उन्होंने राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार प्रोफ़ेसर नारायण बारेठ के एक पोस्ट
जिसमे उन्होंने सलमान खान की सज़ा के बाद विश्नोई आंदोलन पर टिप्पणी की थी
उसे शेयर किया था ,,अचानक उनके दिल में दर्द होना ,अस्पताल में ब्लॉकेज
रिपोर्ट के बाद ,,स्टेण्ड डालते वक़्त ,उनकी तबियत और बिगड़ जाना ,फिर उनका
हमे यूँ हमेशा के लिए छोड़ जाना ,,हमारे लिए अपूरणीय क्षति है ,खुदा उन्हें
जन्नत में आला मुक़ाम अता फरमाए ,,उनके बच्चो ,पत्नी परिजनों को सब्र ऐ जमील
अता फरमाए ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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