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26 फ़रवरी 2018

आगामी 28 मार्च को बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के पुरे नो साल बाद चुनाव होंगे

दोस्तों ,वकील साथियों ,,आगामी 28 मार्च को बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के पुरे नो साल बाद चुनाव होंगे ,,प्रशासक हटाकर ,लोकतांत्रिक ढांचे के रूप में नए पच्चीस सदस्य निर्वाचित होकर फिर से बार कौंसिल को ज़िंदाबाद करने की कोशिश करेंगे ,लेकिन कैसे ,दोस्तों ,यह आपकी ज़िम्मेदारी है ,,इस बार एक सुद्र्ड ,निष्पक्षः ,,मज़बूत ,बार कौंसिल निर्वाचित करे ,बार कौंसिल के हर निर्वाचन ,हर व्यवस्था के लिए एक वोटर होने के नाते हम सभी ज़िम्मेदार है ,हम ,लिहाज़ ,मुरव्वत ,,लापरवाही में ,बार कौंसिल में सदस्य के रूप में उपयुक्त उम्मीदवार को धता बताते है ,पार्टियों ,,महंगी गाड़ियों में प्रचार करने आने जाने वालो के सब्ज़बाग में आते है ,अनुपयुक्त को वोट देकर उपयुक्त को हराते है ,,नतीजा देख लीजिये ,,हर शख्स जो बार कौंसिल में रह चुका है ,एक बार ,दो बार ,बार बार चुनाव लड़कर इस मज़े को लेना चाहता है ,लेकिन उपलब्धी ,वकीलों के हक़ संघर्ष के लिए एक सवाल भी अगर उनसे पूंछो तो वोह अगल बगल झांकते है ,,में डबल ऐ जी ,,में वरिष्ठ वकील ,में पूर्व अध्यक्ष बार कौंसिल ,,में सुपुत्र पूर्व बार कौंसिलर ,में सुपुत्र हायकोर्ट जज ,,के नाम से वोट मांगने में आपत्ति नहीं ,लेकिन एक इतिहास ,एक जुस्तजू ,वकील साथियों के हक़ में अगर आपने की हो तो ज़रा बताइये तो सही ,,क्या हमे फिर ऐसी बार कौंसिल चाहिए ,,जो वक़्त पर चुनाव न करा सके ,,ऐसी बार कौंसिल जो वकीलों की मार्कशीट ,दस्तावेज चेक करे ,,ऐसी बार कौंसिल जो वकीलों के कल्याण के लिए हरगिज़ हरगिज़ नहीं सोचे ,,वकीलों के हक़ संघर्ष में उनका मददगार न हो ,वकीलों के स्वाभिमान के संघर्ष में भितरघाती होकर उनके आंदोलन को मटियामेट करे ,,क्या हमे वकीलों के कल्याण के लिए आर्थिक मदद योजनाओ की ज़रूरत नहीं है ,क्या हमे वकील की मृत्यु पर उसके परिजनों को वाजिब राशि दस लाख रूपये नहीं देना चाहिए ,,क्या हमे गंभीर बीमार को इलाज के लिए पांच लाख अधिकतम नहीं देना चाहिए ,,क्या इलाज के लिए अस्पतालों का जिलेवार पेनल बनाकर ,बार कौंसिल की तरफ से वार्षिक मेडिक्लेम पॉलिसी नहीं होना चाहिए ,,क्या क्षेत्रीय अभिभाषक परिषदों को मज़बूत बनाकर क्षेत्रीय स्तर पर बार कौंसिल की वार्षिक बैठके नहीं होना चाहिए ,,क्षेत्रीय बार एसोसिएशन पर तो बार बार चुनाव लड़ने पर पाबंदी और बार कौंसिल में बार बार चुनाव लड़ने पर कोई रोक नहीं ,,बहुत मुद्दे है ,बहुत गंभीर मुद्दे है ,,आप सभी जानते है ,,दोस्तों अगर बार कौंसिलर में से हायकोर्ट जज बनने ,,सरकारी महाधिवक्ता वगेरा बनने की परम्परा जारी रखी गयी तो ,फिर सभी अपनी जुगत में लगेंगे ,वकीलों के मुद्दों को ,,जिनसे उन्हें वकीलों के लिए आँख में आँख डालकर लड़ना चाहिए ,,कोन लड़ेगा ,आप जाओगे तो बस यही जवाब मिलेगा ,,हम कॉन्स्टिट्युशनल संस्था है ,हड़ताल नहीं कर सकते ,,हम वकीलों को अनुशासित करने आये है इसलिए ही तो उनके खिलाफ शिकायत पर बिना जांचे परखे ,,बिना पूर्व प्राथमिक जांच के ,प्रसंज्ञान लेकर ,उसे मुल्ज़िम बना देते ,है ,,वकील साथी की डिग्रियों की जांच ,,मार्कशीटों की जांच ,रिनिवल के नाम पर वकील को सनद होने के बाद भी ,,समयावधि वाला लाइसेंसी बना दिया जाता है ,आज हज़ारो वकील साथी ऐसे है जो निजी तोर पर नोटिस नहीं मिलने पर अपनी सनद का नवीनीकरण लाइसेंस के काले नियम की तरह से नहीं करा सके है ,उन पर वकील नहीं होने की तलवार लटकी है ,,कल हम चूक गए तो वकील नहीं रहेंगे ,, क्या इसलिए ऐसे लोगो को हम चुनकर भेजते है ,क्या पांच साल में बार कौंसिल ,,या बार कौंसिलर को एक पर्याप्त आँकड़ा देकर साधारण सभा बुलाने ,,अविश्वास प्रस्ताव लेकर रिकॉल करने का हक़ नहीं मिलना चाहिए ,,क्या प्रतिवर्ष बार कौंसिल की साधारण सभा ,राजस्थान के सभी वकीलों को बुलाकर नहीं होना चाहिए ,बहुत कुछ मुद्दे है मेरे भाइयो ,,मुझ से बेहतर आप जानते है ,,मुझ से ज़्यादा बुद्धिमान आप है ,,,में आपको हुनमान जी की तरह आपके वोट की ताक़त याद दिलाना चाहता हूँ ,आपका एक वोट ,प्रथम वरीयता का वोट ,बार कौंसिल को ऐसे शिकंजों से आज़ाद कराकर ,,,एक मज़बूत ,उत्साहित ,,ईमानदार ,,छोटे से लेकर कथित बढे वकीलों के हक़ के लिए संघर्ष करने वाली ,उन्हें इंसाफ दिलाने वाले बार कौंसिल का गठन कर सकता है ,,तो आइये मेरे साथ ,,आज़माइये मुझे सभी को आज़मा लिया बार बार ,अब आज़माइये मुझे पहली बार ,,,अख्तर अली खान ,,मत पत्र क्रमांक ,,54 ,,,पर प्रथम वरीयता का वोट ,,अंग्रेजी वर्णमाला का एक अंक ,,"1" इस तरह से लिखकर मतदान करे ,,अख्तर अली खान अकेला ,,एडवोकेट न्यायालय परिसर कोटा राजस्थान

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