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10 जनवरी 2018

बूंदी की मज़हबी साज़िशें नाकामयाब होने के बाद ,,कुछ ज़हरीली शाखों ने ,,इस ज़हर को कोटा में भी फैलाने की साज़िशे रची

बूंदी की मज़हबी साज़िशें नाकामयाब होने के बाद ,,कुछ ज़हरीली शाखों ने ,,इस ज़हर को कोटा में भी फैलाने की साज़िशे रची है ,,,विज्ञाननगर सहित कोटा के कई क्षेत्रो में यह साज़िशे चुनाव के पूर्व परवान चढाने की कार्ययोजना है ,,आखिर मुट्ठीभर साज़िशकर्ता ,,,लाखो अमन पसंद लोगो पर कैसे हावी हो सकते है ,,,आखिर बीट प्रणाली ,,इंटरनेट केयरटेकर ,,सी आई डी ,आई बी सहित सभी एजेंसियां होने के बाद भी ऐसे लोगो की पूर्व साज़िशे सामने आने के बावजूद भी इनके खिलाफ कठोर क़ानूनी कार्यवाही क्यों नहीं हो पाती ,सोचने की बात है ,अफ़सोस और शर्म की बात है ,अधिकारी सोचता है ,मेरी नौकरी ,,मेरा वक़्त ठीक ,,निर्विवाद निकल जाए ,,लेकिन हमे ,आपको ,,सभी को यहां इसी शहर में रहना है ,,आमना के निकाह में जाना है ,,तो सुनीता से राखी बंधवाना है ,,पड़ोस के बेटी के बिस्मिल्ला कार्यक्रम में जाना है ,तो पड़ोस के नवजात बेटे के नामकरण संस्कार कार्यक्रम में जाना है ,,,,,राधेश्याम जी अस्पताल में भर्ती हो तो उनकी तीमारदारी करना है ,,कल्लू खान की जान बचाने के लिए खून की ज़रूरत हो तो धीरज भाई को अपना खून देकर उनकी जान बचाना ,,,है ,,यह भाईसाहब ,,यह कट्टर पंथी चन्दाखोर लोग ,,हमे ,,आपको उकसा कर ,,लढा कर ,,अपना राजनीतिक उल्लू सीधा कर सकते ,,है ,लेकिन ज़रा सोचो ,सदियों से एक दूसरे के साथ रहकर ,,एक दूसरे के दुखदर्द मे हम साथ रहने वाले ,,इन लोगो के उकसावे में आकर ,,आपस में झगड़ कर क्या हांसिल कर लेंगे ,,हमारी पीडियां जो मोहब्बत चाहती ,,,है ,,एक दूसरे का साथ चाहती हैं ,,उन्हें नफरत का माहौल देकर क्या हम उनके साथ विश्वासघात नहीं कर रहे ,,हम आत्मचिंतन करे ,,,गर्व से कहो हिन्दू ,,गर्व से कहो मुसलमान ,,किसे ऐतराज़ है ,,लेकिन हालात बिगाढने के लिए साज़िशे मत रचो यार ,,,कोटा विज्ञाननगर क्षेत्र में मंगलवार ,,हमारे क्षेत्र के लोगो ने जो धैर्य ,,संयम बरता ,,जो समझदारी दिखाई ,,उसके लिए दोनों पक्ष मुबारकबाद के हक़दार है ,,आओ मिलकर नारा दे ,,,,यह सियासी लोगो का उकसावा ,,यह मज़हबी नफ़रतें छोड़े ,,,,बस पुकारें दिल से ,,सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा ,,,,,,सारे,सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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