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09 जनवरी 2018

क्या बताऊँ

क्या बताऊँ ज़ख्म मेरे
हर तरफ से लहूलूहान हूँ में
शायद दलित हूँ ,,
शायद ओरिजनल उदारवादी हिन्दू ,
शायद मुसलमान हूँ में ,,,
यह कहने ,,यह सोचने की जगह ,,क्या हमे ज़ख्म देने वालों को पुचकार कर समझाने ,,नहीं समझने पर एक जुट होकर ,,,ऐसे ज़ख्म देने वालों के खिलाफ राष्ट्रहित में संयुक्त माहौल नहीं बनाना चाहिए ,,अख्तर

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