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12 दिसंबर 2017

देश को आज़ाद कराने वाला वकील तबक़ा ,,रीढ़ विहीन हॉकर सभी के समक्ष शरणम गच्छामि है

शाबाश राजीव धवन ,,शाबाश ,,इस दोर में जब ,,देश को आज़ाद कराने वाला वकील तबक़ा ,,रीढ़ विहीन हॉकर सभी के समक्ष शरणम गच्छामि है ,,वकील की पहली सीढ़ी चढ़कर ,न्यायिक अधिकारी ,,जज बनने वाले लोगो के समक्ष उनके साथ हो ,तब एक तल्ख टिपण्णी के बाद ,आहत होकर ,,देश के वरिष्ठ वकील राजीव धवन द्वारा ,,सुप्रीम कोर्ट की टिपण्णी के बाद वकालत से सन्यास लेने की घोषणा ,,गाउन जमा कराने की पेशकश ,,सुप्रीमकोर्ट से लाइब्रेरी हटाने ,,घर बेचकर कही और चला जाने की घोषणा ,,निश्चित तोर पर साहसिक क़दम और देश के वकीलों के आत्मस्वाभिमान को जगाने ,,बार और बेंच के संबंधो को लेकर एक नए युग ,नई बहस की शुरुआत है ,,निश्चित तोर पर कोर्ट रूम में ,,वकील कोर्ट ऑफिसर होते है ,जज कोर्ट ऑफिसर होते है सभी को अदालत का डेकोरम बनाकर रखना ही होगा ,,लेकिन कोन ,,सही कोन गलत इस बात को लेकर कई बार विवादित बहस छिड़ जाती है ,,कोई शख्स भगवान से बढ़कर भगवान नहीं है ,उससे समझने ,,देखने ,,अंदाज़ा लगाने में चूक हो सकती है ,ऐसे में तृतीय पक्षकार ,,तीसरी आँख से इसका निर्धारण हो सकता है कोन सही है कौन गलत ,,,किसने मर्यादाये लांघी है ,किसने लक्ष्मण रेखा पार की है ,,,इसका फैसला अगर सभी कोर्ट रूम में सी सी टी वी केमेरे लगाए जाए तभी सम्भव हो सकेगा ,,गलती किसकी ,थी ,टिपण्णी में किस किस का नाम शामिल हुआ ,,यह अलग बात है ,,लेकिन सच क्या है , वरिष्ठ वकील राजीव धवन इस हद तक आहत क्यों हुए ,,,,आखिर अपना सर्वस्व त्यागने की घोषणा कोई यूँ ही नहीं करता ,है देश के वकीलों ,,राज्य की बार कॉंसिलो ,,देश की बारकोंसिल ऑफ़ इन्डिया ,,देश के सर्वोच्च न्यायलय की बार एसोसिएशन सहित ,,पूर्व जजों को इस मामले में गंभीरता से सोचना होगा ,,मर्यादाये होना चाहिए ,,लेकिन सच क्या है ,,इसकी जांच के लिए देश की हर छोटी बढ़ी अदालत में कोर्ट रूम में कैमरा ट्रायल के अलावा सुनवाई के दौरान ,,अदालत समय की शुरुआत से ,अदालत समय के खत्म होने तक ,,सी सी टी वी कैमरे की निगरानी होना चाहिए ,,,जिसकी रिकॉर्डिंग हर वकील ,उपस्थित पक्षकार ,,,कोर्ट बाबू ,,सहित संबंधित लोगो को लेने का अधिकार होना चाहिए ,,इन निगरानी केमरो का नरीक्षण जिला जज ,हाईकोर्ट ,,सुप्रीमकोर्ट में होना चाहिए ,,देश की सुप्रीम कोर्ट हो ,हाईकोर्ट हो निचली अदालते हो अगर इन कोर्टरुमों में ऐसा निगरानी कार्यक्रम हो जाए ,,सी सी टी वी कैमरे लग जाए तो कोन वकील ,कोन पक्षकार ,,कोन गवाह ,कोन अधिकारी न्यायिक मर्यादाओं की लक्ष्मण रखा उंघाल रहा है ,वोह कैमरे में क़ैद होगा ,,और फिर किसी वरिष्ठ वकील को ऐसे आहत होकर ,,बेबस लाचार होकर ,, इस्तीफा देकर ,वकालत से सन्यास लेकर ,अपना सब कुछ बेचकर जाने का दिल दुखाने वाला फैसला नहीं लेना पढ़ेगा ,,लेकिन इसके लिए वकील को वकील बनकर ,,देश को वकीलों की मजबूरियां समझकर चिंतन मंथन करना होगा ,,,वकीलों को सियासी पार्टी के प्रकोष्ठ विचारधारा ,,रिश्ते ,,,नातों ,,लोभ ,लालच ,,डर खौफ बुलाकर ,,एडवोकेट एक्ट की मर्यादाओ ,देश के संविधान में वकीलों को दिए गए सम्मानित अधिकार ,,कर्तव्यों के समन्वय में सोचना होगा ,,सोचना होगा ,क्या आप सोचेंगे ,, शायद हाँ शायद ना ,,देखते है कितने वकीलों ,,कितने सम्मानित भाइयो का ज़मीर जागता है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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