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18 नवंबर 2017

क़ुरान का सन्देश

और उसमें भी शक नहीं कि तुम्हारे वास्ते चैपायों में भी इबरत की जगह है और (ख़ाक बला) जो कुछ उनके पेट में है उससे हम तुमको दूध पिलाते हैं और जानवरों में तो तुम्हारे और भी बहुत से फायदे हैं और उन्हीं में से बाज़ तुम खाते हो (21) और उन्हें जानवरों और कश्तियों पर चढे़ चढ़े फिरते भी हो (22)
और हमने नूह को उनकी क़ौम के पास पैग़म्बर बनाकर भेजा तो नूह ने (उनसे) कहा ऐ मेरी क़ौम खु़दा ही की इबादत करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तो क्या तुम (उससे) डरते नहीं हो (23)
तो उनकी क़ौम के सरदारों ने जो काफ़िर थे कहा कि ये भी तो बस (आखि़र) तुम्हारे ही सा आदमी है (मगर) इसकी तमन्ना ये है कि तुम पर बुज़ुर्गी हासिल करे और अगर खु़दा (पैग़म्बर ही न भेजना) चाहता तो फरिश्तों को नाजि़ल करता हम ने तो (भाई) ऐसी बात अपने अगले बाप दादाओं में (भी होती) नहीं सुनी (24)
हो न हों बस ये एक आदमी है जिसे जुनून हो गया है ग़रज़ तुम लोग एक (ख़ास) वक़्त तक (इसके अन्जाम का) इन्तेज़ार देखो (25)
नूह ने (ये बातें सुनकर) दुआ की ऐ मेरे पलने वाले मेरी मदद कर (26)
इस वजह से कि उन लोगों ने मुझे झुठला दिया तो हमने नूह के पास ‘वही’ भेजी कि तुम हमारे सामने हमारे हुक्म के मुताबिक़ कश्ती बनाना शुरु करो फिर जब कल हमारा अज़ाब आ जाए और तनूर (से पानी) उबलने लगे तो तुम उसमें हर किस्म (के जानवरों में) से (नर व मादा) दो दो का जोड़ा और अपने लड़के बालों को बिठा लो मगर उन में से जिसकी निस्बत (ग़रक़ होने का) पहले से हमारा हुक्म हो चुका है (उन्हें छोड़ दो) और जिन लोगों ने (हमारे हुकम से) सरकशी की है उनके बारे में मुझसे कुछ कहना (सुनना) नहीं क्योंकि ये लोग यक़ीनन डूबने वाले है (27)
ग़रज़ जब तुम अपने हमराहियों के साथ कश्ती पर दुरुस्त बैठो तो कहो तमाम हम्द व सना का सज़ावार खुदा ही है जिसने हमको ज़ालिम लोगों से नजात दी (28)
और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (दरख़्त के पानी की) बा बरकत जगह में उतारना और तू तो सब उतारने वालो से बेहतर है (29)
इसमें शक नहीं कि उसमे (हमारी क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं और हमको तो बस उनका इम्तिहान लेना मंज़ूर था (30)

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