गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज़ ,,,विभिन बीमारियाँ से पीड़ित लोट ,,और
अस्पताल के जो डीन बने ,वोह झाड़ फूंक ,,बातों से मर्ज़ के इलाज में लगे है
,,जबकि ,विशेषज्ञों के नाम पर कुछ तो कम्पाउंडर ,,लेब टेक्नीशियन की
योग्यता भी जिनकी नहीं है ,,उन्हें सर्जन ,,विशेषज्ञ बना दिया है ,जबकि आँख
का इलाज दांतों के डॉक्टर से ,,हड्डी का इलाज त्वचा के डॉक्टर से ,,,इलाज
करा रहे है ,,जबकि फिल्म मुन्ना भाई एम बी बी एस फिल्म की तरह ,,मरीज़ों
से फॉर्म भरवाने ,,काउंटर पर रूपये जमा करवाने ,,डीन की तरह मनमानी
करने जैसा माहौल है ,,अब देखिये ऐसे मरीज़ों का इलाज कैसे होगा ,,ऐसे
अस्पताल को सुधारने डीन सर को सद्बुद्धि देने की ही दुआ कर सकते है ,,के
उन्हें सद्बुद्धि मिले के इलाज ,,इलाज के तरीके से होता है ,जुबांन से
बोलने से ,वायदों से ,इलाज नहीं होता ,,,उन्हें यह सद्बुद्धि मिले के
कम्पाउंडर ,,लेबटेकिनिशयन से उनका ही काम लिया जाए ,,उन्हें विशेषज्ञ की
ज़िम्मेदारी देकर ,,नीम हकीम खतरा ऐ जान ,,, की कहावत चरितार्थ न करे
,,उन्हें यह भी सद्बुद्धि मिले ,के आंख का इलाज दांत के डॉक्टर से नहीं
आंख के डॉक्टर से ,ही करवाए ,,,,,,सभी विशेषज्ञों से उनकी विशेषग्यता के
हिसाब से काम ले ,वरना सब उलजुलूल हो रहा है ,,अस्पताल तो अस्पताल ही सही
,लेकिन मरीज़ों के हालात बहुत खराब चल रहे ,,है ,,बस अस्पताल का पेड़ स्टाफ
,,अस्पताल का मीडिया स्टाफ ,,,खुद ही अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनकर ,,आल इस
वेळ ,,कह रहे ,है ,काश सच में ,,सभी मरीज़ों का बेहतर इलाज हो और ,,सच में
आल इस वेळ हो जाए ,,काश ऐसा हो जाए ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान गंभीर
बीमारी से ग्रसित मरीज़ ,,,विभिन बीमारियाँ से पीड़ित लोट ,,और अस्पताल के जो
डीन बने ,वोह झाड़ फूंक ,,बातों से मर्ज़ के इलाज में लगे है ,,जबकि
,विशेषज्ञों के नाम पर कुछ तो कम्पाउंडर ,,लेब टेक्नीशियन की योग्यता भी
जिनकी नहीं है ,,उन्हें सर्जन ,,विशेषज्ञ बना दिया है ,जबकि आँख का इलाज
दांतों के डॉक्टर से ,,हड्डी का इलाज त्वचा के डॉक्टर से ,,,इलाज करा रहे
है ,,जबकि फिल्म मुन्ना भाई एम बी बी एस फिल्म की तरह ,,मरीज़ों से फॉर्म
भरवाने ,,काउंटर पर रूपये जमा करवाने ,,डीन की तरह मनमानी करने जैसा माहौल
है ,,अब देखिये ऐसे मरीज़ों का इलाज कैसे होगा ,,ऐसे अस्पताल को सुधारने डीन
सर को सद्बुद्धि देने की ही दुआ कर सकते है ,,के उन्हें सद्बुद्धि मिले के
इलाज ,,इलाज के तरीके से होता है ,जुबांन से बोलने से ,वायदों से ,इलाज
नहीं होता ,,,उन्हें यह सद्बुद्धि मिले के कम्पाउंडर ,,लेबटेकिनिशयन से
उनका ही काम लिया जाए ,,उन्हें विशेषज्ञ की ज़िम्मेदारी देकर ,,नीम हकीम
खतरा ऐ जान ,,, की कहावत चरितार्थ न करे ,,उन्हें यह भी सद्बुद्धि मिले ,के
आंख का इलाज दांत के डॉक्टर से नहीं आंख के डॉक्टर से ,ही करवाए
,,,,,,सभी विशेषज्ञों से उनकी विशेषग्यता के हिसाब से काम ले ,वरना सब
उलजुलूल हो रहा है ,,अस्पताल तो अस्पताल ही सही ,लेकिन मरीज़ों के हालात
बहुत खराब चल रहे ,,है ,,बस अस्पताल का पेड़ स्टाफ ,,अस्पताल का मीडिया
स्टाफ ,,,खुद ही अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनकर ,,आल इस वेळ ,,कह रहे ,है
,काश सच में ,,सभी मरीज़ों का बेहतर इलाज हो और ,,सच में आल इस वेळ हो जाए
,,काश ऐसा हो जाए ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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