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10 अगस्त 2017

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अन्सारी ने ,,,आखरी वक़्त में क्या खाक मुसलमान होंगे ,,वाली कहावत चरितार्थ कर दी है

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अन्सारी ने ,,,आखरी वक़्त में क्या खाक मुसलमान होंगे ,,वाली कहावत चरितार्थ कर दी है ,,पुरे दस साल राजपाठ किया ,,सभी घटनाक्रमों पर नज़र होने ,,जानकारी होने पर भी गांधारी बनकर चुप्पी साधे रहे ,,सरकारी खर्च पर मज़े किये ,,कभी भी किसी भी ,गंभीर हालात में भारत का ,नागरिक ,,संविधान के उप निगराकर ,,होने के बाद भी कोई टिपण्णी नहीं की ,इनकी क़लम रुक गयी ,,ज़ुबान हलक़ में अटकी रही ,,लेकिन जब इन्हे राष्ट्रपति के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया ,,तब अपने विदाई समारोह में इन्हे जो देश के छोटे राजा थे ,,उन्हें देश के मुसलमानो की सुरक्षा का अचानक ख्याल आ गया ,,हामिद साहिब ,,,काश बढ़ी घटनाओं के वक़्त आपने जुबां खोली होती ,,पत्र लिखे होते ,,विरोध दर्ज कराया होता ,,अपने अधिकारों का उपयोग किया होता ,,सरकार द्वारा नहीं मानने पर इस्तीफा दे दिया होता ,,तो निश्चित तोर पर देश ,और देश के लोग आपका सम्मान करते ,,लेकिन कुर्सी से चिपके रहकर ,,सब कुछ ,,गांधारी बनकर ,,देखा ,,और आज जब ,पद की गर्माहट खत्म हो ,गयी तब अचानक ,,मुसलमानो के ज़ुल्म ज़्यादती , असुरक्षा याद आ गयी ,,जनाब हामिद अंसारी साहिब मेने आपको मुस्लिम प्रोटेक्शन एक्ट का प्रारूप बनाकर भेजा था ,,आपने कोई पहल नहीं की ,,,ऐसे में आपको कुर्सी पर से उतरने के बाद ,,मुसलमानो की सुरक्षा के मामले में बोलने का कोई हक़ नहीं है ,और जनाब मुसलमान इतना कमज़ोर नहीं ,,वोह अल्लाह की हिफाज़त में है ,,मुसलमान को आपकी हमदर्दी की ज़रूरत भी नहीं ,,इसीलिए कहते है ,आखरी वक़्त में क्या ख़ाक मुसलमान होंगे अत्याचार दलितों पर भी हुए है ,,कई जगह पर हिन्दू भाइयो पर भी अत्याचार हुए है ,,मुसलमानो के अत्याचार देखकर आप कुर्सी पर चिपके रहे ,,कुछ नहीं बोले ,अपना भारतीय होने का अपना मुखिया होने का धर्म आपने नहीं निभाया ऐसे में कोई भी मुसलमान आपकी हमदर्दी का मोहताज नहीं है जनाब ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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