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24 जुलाई 2017

झालावाड़ का झूंठा प्रशासन ,,झूंठे मध्यस्थ मंत्री ,,यहां के उदार ,,विशाल ह्रदय मुस्लिम समाज को ठगने से बाज़ नहीं आये

झालावाड़ का झूंठा प्रशासन ,,झूंठे मध्यस्थ मंत्री ,,यहां के उदार ,,विशाल ह्रदय मुस्लिम समाज को ठगने से बाज़ नहीं आये ,,झालावाड़ के विकास के लिए ,,,झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के लिए वर्ष 2007 में ,,मुस्लिम समाज ने विशाल ह्रदय रखा ,,और खुदा की राह में समर्पित 19 बीघा से भी ज़्यादा अपने पुरखो की विरासत शहर ऐ खमूशा क़ब्रिस्तान की ,,झालावाड़ के विकास पर क़ुर्बान करते हुए ,,झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के लिए दे दी ,,झूंठी सरकार ,,झूंठा जिला प्रशासन ,,झूंठे मध्यस्थ मंत्री की बेहूदगी ,,बेवफाई देखिये ,,क़ब्रिस्तान की ज़मीन वक़्फ़ के नियमो के खिलाफ ,,,मेडिकल कॉलेज को देते वक़्त सरकार ने लिखित वायदा किया था के मेडिकल कॉलेज का नाम मुस्लिम महापुरुष के नाम रखा जाएगा ,,लेकिन झालावाड़ में यह सरकार आयी गयी ,,सरकार को तीन साल हो गए ,लेकिन यह सरकार ,,यह मुस्लिम समाज के मध्यस्थ मंत्री झालावाड़ के मुसलमानो को ठगते रहे ,उनसे ज़मीने लेते रहे ,,लेकिन समझौते के तहत झालावाड़ मेडिकल कॉलेज का नाम ,,मुस्लिम महापुरुष के नाम नहीं रखा गया ,,आप देखिये 2007 की क़ुर्बानियों का सिला तो मुस्लिम समाज को मिला ही नहीं ,ऊपर से फिर उन्हें बहका फुसला कर ,,बिना राजस्थान वक़्फ़ बोर्ड ,,झालावाड़ जिला वक़्क़ कमेटी ,केंद्रीय वक़्फ़ क़ानून के विधि नियमो के विपरीत एक समझौता 9 जून 2016 को झालावाड़ जिला प्रशासन की तरफ से उपखण्ड अधिकारी झालावाड़ ,,रामचरण शर्मा ,,पुलिस उप अधीक्षक झालावाड़ खुशाल सिंह ,,अधिशासी अभियंता राष्ट्रिय राज मार्ग गिरीश जैन सहित छत्तीस मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षरित समझौते में विशेष नॉट में साफ अंकित है ,,अगर जिला प्रशासन शर्तो की पालना नहीं करता है ,,तो मुस्लिम समाज क़ानूनी कार्यवाही अपने स्तर पर कर सकता है ,,,वर्तमान में इस समझौते के तहत मेडिकल कॉलेज का नाम अब तक मुस्लिम समाज के महापुरुष के नाम नहीं रखा गया ,,समझौता किसी भी तोर पर लागू नहीं हो सकता ,,झालावाड़ के असद अनवर ने इस मामले में साफ तोर पर वक़्फ़ सम्पत्ति के मज़ारात को सुरक्षित रखने के लिए एक सर्वे करवा कर थ्री जी नक़्शा तैयार करवाते हुए ,,मुहायदे के पहले तीन मज़ारात जो खसरा नंबर 2018 ,,2130 पर निर्मित है उन्हें सुरक्षित रखते हुए कैसे सड़क निकाल जनहित पूरा करते हुए मज़ारात का अस्तित्व बरक़रार रखा जा सकता है का सुझाव देते हुए असद अनवर ने पेशकश की थी इस निर्माण व्यवस्था में सरकार के बजट का जो अतिरिक्त खर्च होगा वोह खर्च असद अनवर निजी तोर पर जमा करा देंगे ,, ,,लेकिन मज़ार विरोधी कुछ लोग जो सरकार में बैठे है उन्हें यह सुझाव पसंद नहीं आया और इस फैसले के पूर्व ही असद अनवर को दरकिनार कर दिया गया ,,समझौते में साफ लिखा है उक्त दोनों खसरे में तीन मज़ारात बने है ,,इन्हे रोड के लेवल ,,ज़मीन सतह ,,निचा किया जाएगा और इनकी चढ़ाई दो मीटर से कम रखेंगे ,,जो समाज अपने खर्च से कराएगा ,,,इसके बाद प्रशासन की ज़िम्मेदारी थी ,,के संबंधित निर्माण एजेंसी नरीमन के समयः क़ब्र की पट्टी जो सतह से ऊपर न हो से कम से फुट का गेप रखकर ,स्लेब डालकर निर्माण कार्य चलाती ,,मुस्लिम समाज को तकनीकी निर्माण हेतु आवश्यक प्लीर क़ब्र के दोनों तरफ तैयार करने पर ऐतराज़ नहीं होने की शर्त भी थी ,,लेकिन अफ़सोस यह सब मुसलमान भाइयो ने मुस्लिम मंत्री की देखरेख में किया और बिना कोई शर्त पूरी किये कर डाला गया ,,झालावाड़ मेडिकल कलेज का नाम मुस्लिम महापुरुष के नाम अभी तक क्यों नहीं रखा ,,मुस्लिम समाज के नाम पर वहां विश्वासपात्र सरकारी कर्मचारी क्या कर रहे थे ,,बुलडोज़र वगेरा क्यों क़ब्रो पर चलाये गए ,,क्यों दूसरे फेज़ में शर्त के खिलाफ तीनों मज़ारो का अस्तित्व नेस्तनाबूत किया गया ,,इस मामले में क़ब्रों की बेहुरमती करने ,,वक़्फ़ सम्पत्ति पर अवैध क़ब्ज़ा करने ,,धार्मिक भावनाओ को भड़काने सहित कई तरह के फौजदारी ,,केंद्रीय वक़्फ़ क़ानून के प्रावधान के तहत मुकदमात शामिल मध्यस्थ मंत्री ,,अधिकारियो के खिलाफ भी बनते है ,,कॉम को कॉम के खिलाफ उकसाकर फसाद कराने के मामले भी बनते है ,,लेकिन अभी भी वक़्त है ,जो हो गया सो हो गया ,,9 जून 2016 में लिखित समझौते को अगर सही मान भी ले तो फिर सरकार ,,मुसलमानो को धोखा देकर ठगने वाले सरकारी मंत्री ,अधिकारी ,,इस समझौते को ही शत प्रतिशत लागु कर दे ,,मेडिकल कॉलेज झालावाड़ का नाम ,,मुस्लिम समाज के महापुरुष पर करवा दे ,तीन मज़ारात जिन्हे हर हाल में सुरक्षित रखने ,,दो मीटर से कम ,,अस्तित्व रखने का लिखित मुहायदा है ,,उसे तो लागु करना ही चाहिए ,,लेकिन यह सब सरकार नहीं करेगी ,मंत्री जी गायब है ,,लोग फोन कर रहे है ,,उनके पास कॉम के लिए वक़्त नहीं है ,,ऐसे में आपस में लड़ने ,,एक दूसरे पर इलज़ाम लगाने से काम नहीं चलेगा ,,एक जुट होना होगा ,,साथ मिल बैठना होगा ,,धोखेबाज़ों का बहिष्कार कर ,,सीधे मुख्यमंत्री वसुंधरा सिंधिया से रूबरू होकर ,उनकी उपस्थिति में लिखित रूप से स्थाई समाधान ,,तीनो मज़ारो का लिखित समझौते के अनुसार अस्तित्व बरक़रार रखना होगा ,,,मेडिकल कॉलेज झालावाड़ का नाम ,,मुस्लिम महापुरुष के नाम तुरतं रख कर सार्वजनिक घोषणा करना होगी ,,अगर लिखित समझौते को क्रियान्वित करने में कोई भी ना नुकुर करता है तो फिर ऐसे लोगो को एक जुट होकर ,,अपना शक्ति प्रदर्शन कर ,,एकता ,अटूटता ,,शांति प्रियता ,,गाँधीवादी संघर्ष का सुबूत देना होगा ,,जो लोग सभी गलतियों के बाद भी इस लिखित समझौते को लागु करवाने में साथ नहीं आते है ऐसे लोगो का हमारे समाज को उन्हें समझाइश करें ,,नहीं मानने पर ,,सरकार में बैठे अधिकारियो ,मंत्री साहिब ,,मुख्यमंत्री ,,अधिकारीयों का गाँधीवादी तरीके से घेराव करना होगा ,,उनके खिलाफ ,,वायदा खिलाफी के खिलाफ ,,जनमत संग्रह भी करना होगा ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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