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20 जुलाई 2017

सभी निर्देश कोटा सहित राजस्थान के न्यायलयों में धरे रह गए

राजस्थान के किसी भी न्यायालय में ,गवाह किसी भी सूरत में वापस नहीं लौटेंगे ,,न्यायालय का काम कुछ भी हो जाये हर हाल में चलेगा ,,जो बाधा बनेगा उसके खिलाफ न्यायालय की अवमानना कार्यवाही की भी तलवार है ,,लेकिन आज यह सभी निर्देश कोटा सहित राजस्थान के न्यायलयों में धरे रह गए ,,राजस्थान के सभी न्यायिक कर्मी सेठी आयोग की रिपोर्ट के तहत उनका वेतनमान देने की मांग पर सामूहिक अवकाश पर है ,,इधर हड़ताल से सभी काम काज ठप्प है उधर ,,न्यायालयों के रिक्त पदों की भर्ती परीक्षा 23 जुलाई को सभी ज़िलों में होना तय है ,,इसकी तैयारियां भी इसे प्रभावित है ,,न्यायिक कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियो के वेतनमान करने के लिए सेठी कमीशन ने महत्वपूर्ण सिफारिशें की थी ,,जिसे केंद्र सरकार को त्वरित लागू करना थी ,,न्यायिक अधिकारियो को लगभग सिफारिशों के तहत सभी सुविधाएं ,,वेतनमान दिए जा चुके है ,,लेकिन पंद्रह साल गुज़रने के बाद भी न्यायिक कर्मचारियों की स्थिति जस की तस है ,,कर्मचारी कई बार बढ़ी हड़तालें कर ,,न्यायिक कामकाज ठप्प कर चुके है ,,कई बार समझौते ,वायदे हुए है ,लेकिन कर्मचारी खुद को ठगा महसूस कर रहा है ,,राजस्थान के सभी कर्मचारी आज सामूहिक अवकाश पर होने से ,अदालतों में पत्रावलियां नहीं निकली ,,कई अदालतों के ताले ही नहीं खुले ,,न्यायिक अधिकारी कुछ काम नहीं कर ,,सके ,,सेकड़ो सरकारी ,,गैरसरकारी गवाह वापस गए ,,जमानतें नहीं हो सकीं ,,ज़ब्त शुदा वाहन नहीं छूट सके ,,,नोटिस बोर्ड पर जनरल तारीख लगाई गयी ,,,कल क्या होगा पता नहीं लेकिन आज नज़ारा दूसरा था ,,वकील काम करना चाहता था ,लेकिन अदालतों में ताले लगे ,थे ,कोटा के वकीलों में थोड़ा रोष इसलिए था के यहां वरिष्ठ वकीलों के आकस्मिक निधन के बाद ,शवयात्रा की तैयारी के वक़्त भी अदालतों ने आवाज़ लगवाकर ,,गवाह करवाने और दूसरे काम करने पर मजबूर किया है ,,,अदालतों का ताला नहीं खुलना ,,कामकाज प्रभावित करना ,,अब न्यायिक अवमानना की कार्यवाही नहीं मानी जायेगी ,,गवाह वापसी पर ,,कार्यप्रभावित पर ,,किसी भी हाल में कार्य स्थगन नहीं हो जैसे परिपत्र आज न्यायिक अधिकारी जिला जज खुद प्रभावित नहीं कर सके ,,कोई कामकाज नहीं हुआ ,,न्यायिक कर्मचारियों को उनका हक़ मिलना चाहिए ,,नए कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए व्यवस्थाएं प्रभावित न हो इसके लिए कोई वैकल्पिक रास्ता निकालना होगा ,,आज वार्ता अगर होती है तो हाईकोर्ट को सख्ती दिखाते हुए केंद्र सरकार से उनका हक़ उन्हें दिलवाना चाहिए ,पहले भी हाईकोर्ट की मध्यस्तता और वायदे के बाद कर्मचारियों ने तीन दिन बाद अपनी हड़ताल खत्म की थी ,,इस बार भी शायद सिर्फ आश्वासन के साथ ही हड़ताल खत्म होगी ,लेकिन कर्मचारी अपना संदेश ,,उन्हें इंसाफ चाहिए ,,उनकी लड़ाई 2003 से चल रही है ,,लेकिन उन्हें आज तक इंसाफ नहीं मिला ,,आम जनता ,,वकीलों और ज़िम्मेदार लोगो तक पहुंचाने में कामयाब हो गए है ,,,कल क्या होता है पता नहीं लेकिन जो भी होगा कर्मचारियों की मांगे भी पूरी हो और अदालतों का काम सुचारु हो ,,कुछ ऐसा ही होना चाहिए ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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