हमें चाहने वाले मित्र

01 जुलाई 2017

चलो शायरी करो

वोह कहते है
चलो शायरी करो
मेरे लिए
अभी इसी वक़्त
मुझे देखना है
तुम्हे मुझ से
कितना प्यार है ,,
में क्या लिखूं
क्या कहूं
कभी आसमान के
तारे गिने गए है ,,
कभी समुन्द्र की
गहराई नापी गयी है ,,
कभी आसमान की
ऊंचाई नापी गयी है
क्या कहूं में तुम्हे
अनगिनत
असंख्य ,,अकूत
बेपनाह ,,तुमसे
हाँ तुमसे
प्यार है ,,प्यार है ,,अख्तर

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...