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24 जून 2017

दोस्तों में बात कर रहा हूँ ,,कोटा में फर्नीचर व्यवसायी ,,अल्हाज इलियास अंसारी की

कहावत है ,,खुदा जब हुस्न देता है ,,तो नज़ाकत ,,आ ही जाती है ,,लेकिन जो खुदा की राह में समर्पित होते है ,,उन्हें खुदा नज़ाकत भी देता है ,,नफ़ासत भी देता है और उनकी नवाज़िश भी करता है ,खुदा उन्हें सदाक़त भी देता है ,,ऐसे में यह कहावत सक़ी यानी दानदाता , के आगे ,,झूंठी साबित हो जाती है ,,,जी हाँ दोस्तों में बात कर रहा हूँ ,,कोटा में फर्नीचर व्यवसायी ,,अल्हाज इलियास अंसारी की जिन्होंने अपनी महनत और ईमानदारी से फर्नीचर का व्यवसाय खड़ा किया ,,और आज जब खुदा ने उन्हें नवाज़ा है ,,तो छोटी सी रक़म को बढे प्रबंधन के साथ ,,क़रीब डेढ़ सो बेवाओं ज़रूरतमंदो को मदद कर उन्हें फायदा पहुंचा रहे है ,,इलियास अंसारी हर साल जब ज़कात निकालने के लिए कोई ज़रिया तलाशते तो कहीं न कहीं जब उन्हें खयानत नज़र आयी ,,तो उन्होंने खुद ,,इसका वितरण प्रबंधन अपने परिवार के ज़रिये एक प्रबंधन बनाकर करना शुरू किया ,,इलियास अंसारी ने क़रीब छह साल पहले से तैयार किए इस निज़ाम में पहले अपने पुराने मकान के आसपास की ज़रुरत मंद महिलाओं को तलाशा ,,उन्हें सूचीबद्ध किया ,,फिर पुराने कोटा की और ज़रूरतमंदो की सूचि तैयार की ,,उनकी तहक़ीक़ात की ,,ऐसी महिलाओं के आधार कार्ड ,वोटर आई डी प्राप्त आवश्यकता पढ़ने पर खुद ने ऐसी महिलाओं के दस्तावेज तैयार करने में मदद की ,,इलियास अंसारी ने उनकी पत्नी और बच्चो को निर्देशित किया के वोह रजिटर में एन्ट्री के अनुसार ,,हर माह के पहले रविवार को सभी सूचीबद्ध महिलाओं को ,,किशोरपुरा साजिदेहड़ा स्थित उनके शो रूम कार्यालय पर बुलाकर ,,,रिकॉर्ड के अनुसार आवश्यकतानुसार मदद अदा करे ,,,और उनके अल्पाहार वगेरा का भी पूरा ध्यान रखे ,,हर साल क़रीब पांच लाख रूपये की आर्थिक मदद ,,इलियास अंसारी खुद के पास से ,,प्रतिमाह क़रीब डेढ़ सो से भी अधिक महिलाओं को अदा करते है ,,इनके शो रूम कारखाने पर हर माह के पहले रविवार को ऐसी ज़रुरत मंद महिलाओं की क़तारें लगी होती है ,,उनकी सेवा सुश्रुषा इनकी पत्नी ,,बच्चे करते नज़र आते है ,,यह महिलाये इलियास अंसारी इनके परिजनों को खुशहाली ,,लम्बी उम्रदराज़ी ,,सह्तयाबी ,,व्यापार में तरक़्क़ी की दुआएं देती नज़र आती है ,,इलियास अंसारी उक्त मदद वितरण में मौजूद नहीं रहते है ,लेकिन उनकी पत्नी और बच्चो को हिदायत है के ,,आगंतुक महिलाओं को मदद तो समय पर मिल ही जाए ,,लेकिन उनकी महमाननवाज़िश में भी कोई कसर नहीं रहना चाहिये ,,कोटा में प्राइवेट व्यक्ति द्वारा ,,मदद दिए जाने का यह पहला प्रबंधन है ,,जो क़रीब पांच वर्षो से भी ज़्यादा समय से बदस्तूर जारी है ,,इस नायाब सेवाभावी अनुशासित प्रबंधन के बारे में सुनकर ,,इस व्यवस्था के अध्ययन के लिए समाजसेविका ,,सोशल मीडिया एक्टिविस्ट भी ,,मौके पर पहुंची और उन्होंने हर व्यवस्था को सराहा भी ,,,,खुदा ऐसे सकी दातार ,,ऐसे मददगार प्रबंधक किए दुआएं क़ुबूल करे ,,उन्हें दिन दूनी रात चौगुनी तरक़्क़ी ,दे ,ताकि वोह और ज़रुरत मंदो की मंद दिल खोलकर कर सके ,,आमीन सुम्मा आमीन ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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