हमें चाहने वाले मित्र

14 मई 2017

झकझोर डाला

झकझोर डाला
एक बच्चे ने कब्रिस्तान जा कर अपना बस्ता
''माँ'' कि कब्र पर फेंका ,
और भरे हुए गले, आँखों में आंसू और शिकायती सुर में कहा :
" तेरी नींद पूरी हो गयी हो तो उठ और चल मेरे साथ ,
और चलकर जवाब दे मेरी teacher को ?
रोजाना वो मुझसे कहती है ,
कि तेरी ''माँ'' बहुत लापरवाह है !
जो न तुझे अच्छी तरह तैयार करके भेजती है ,
और न अच्छी तरह पूरा homework कराके ??
------------------------------------------------------------------जिंदगी मे माँ का न होना उसी तरह है,
जिस तरह कड़कती धुप में पेड़ का न होना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...