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10 मार्च 2017

पुलिस निरीक्षक और अनुसन्धानकर्ता सूरजपाल सिंह उपनिरीक्षक के खिलाफ गम्भीर टिपण्णी

कोटा ,,न्यायालय ऐ सी जे एम क्रम पांच कोटा के न्यायधीश सन्तोष कुमार ने , 15 अक्टूबर 2012 के एक आपराधिक मामले में ,दोषपूर्ण मनमाने अनुसन्धान के लिए गुमानपुरा थानाक्षेत्र के तात्कालिक पुलिस निरीक्षक और अनुसन्धानकर्ता सूरजपाल सिंह उपनिरीक्षक के खिलाफ गम्भीर टिपण्णी करते हुए ,,पत्रावली को दुबारा अनुसन्धान के लिए थाने भेजा है ,,जबकि ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने और भविष्य में ऐसे दोषपूर्ण अनुसन्धान न हो इसे सुनिश्चित करने के लिए ,,पुलिस महानिदेशक सहित सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियो को कढ़ा पत्र भी लिखा है ,,,गुमानपुरा निवासी नरेन्द्र कुमार भाटिया ने अपने वकील अख्तर खान अकेला के ज़रिये अभिषेक कुमार के खिलाफ एक परिवाद पेश कर आरोप लगाया था के परिवादी शर्मा आशीष एंड एसोसिएट के ज़रिये टेक्स रिटर्न भरवाने के लिए अभिषेक ने कहा ,,,इनकम टेक्स रिटर्न के लिए 1685 रूपये का एक चेक देने के लिए भी अभिषेक ने कहा ,,नरेन्द्र भाटिया ने परिवाद में बताया के ,अभिषेक ने चेक क्रमांक 129778 वापस कर दिया और दूसरा चेक 129779 अपने पास रखकर 1685 अंक लिखे चेक को ,,कूटरचित कर 404685 राशि बनाकर अभिषेक ने राशि प्राप्त करने का प्रयास किया और बाद में चेक अनादरण का एक मामला दर्ज करा दिया ,,नरेंद्र ने परिवाद में आरोप लगाया के मामले में माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर ,चेक की इबारत ,,अंको की कूटरचना को लेकर एफ एस एल जाँच कराने के आदेश हुए ,,जो न्यायालय के निर्देशानुसार गुमानपुरा थाना अधिकारी ने एफ एस एल जांच करवाकर रिपोर्ट पेश की ,रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से राशि 1685 को कूटरचित कर ,,404685 रूपये करना मानते हुए रिपोर्ट दे दी ,,इस एफ एस एल रिपोर्ट के आधार पर ,,नरेन्द्र ने अभिषेक के खिलाफ पेश परिवाद में उसे गिरफ्तार कर दण्डित करने की मांग की ,,,न्यायलय ने इस गम्भीरता को देखते हुए प्रकरण दर्ज कर अनुसन्धान के निर्देश दिए ,,पहले तो पुलिस ने अनुसन्धान के दौरान पुलिस अधीक्षक के समक्ष ,अभिषेक को अपराधी मानते हुए उसे गिरफ्तार करने की मोहलत चाही ,इस रिपोर्ट को न्यायलय में भी पेश की गयी ,,लेकिन गुमानपुरा पुलिस ने अचानक जांच की दिशा बदल दी और अभिषेक के खिलाफ मामला सिविल नेचर का बताकर एफ आर पेश कर दी गयी ,,नरेन्द्र ने अपने वकील अख्तर खान अकेला के ज़रिये प्रोटेस्ट पिटीशन लगाई और न्यायालय के समक्ष ,,,सम्पूर्ण तथ्य रखे ,,न्यायालय ने 11 फरवरी 2014 को प्रस्तुत एफ आर दुबारा जांच के लिए 24 मार्च 2014 को भिजवाने के आदेश दिए ,,फिर 17 फरवरी 2015 ,,28 फरवरी 2015 ,, 17 अक्टूबर 2015 ,,को सिविल नेचर की बहानेबाज़ी कर पत्रावली न्यायलय के निर्देशो की पालना किये बगेर मनमानी करते हुए वापस पत्रावली न्यायलय में क्लोज़र रिपोर्ट के साथ पेश कर दी ,,नरेन्द्र के वकील अख्तर खान अकेला और पत्रावली में तथ्यों के अवलोकन के बाद ,,न्यायधीश संतोष कुमार ने इसे गम्भीरता से लिए और इस मामले में पुलिस अनुसन्धान को गम्भीर दोषपूर्ण मनमाना मानते हुए ,,सम्बन्धित चेक न्यायलय की पत्रावली से प्राप्त कर ,,फिर से निष्पक्ष अनुसन्धान करते हुए दोषियों ,,के खिलाफ जांच कार्यवाही कर दो माह में अपनी रिपोर्ट देने के निर्देशो के साथ पत्रावली वास्ते रिपोर्ट कार्यवाही अवलोकन 6 जून 2017 नियत की है ,,दोषपूर्ण अनुसन्धान मामले को गम्भीरता से लेते हुए नरेन्द्र के वकील अख्तर खान अकेला ने पुलिस अधिकारियो के खिलाफ दोषपूर्ण अनुसन्धानऔर विधि की अवज्ञा के लिए एक प्रार्थना पत्र पेश कर ,166 ऐ आई पी सी में प्रसंज्ञान लेकर दोषी पुलिस कर्मियों को दण्डित करने कीभी मांग की ,,न्यायालय ने इस प्रार्थना पत्र को पेंडिंग रखते हुए वर्तमान परिस्थितियों में ,,दोषी अनुसन्धान अधिकारी ,,तात्कालिक थानाधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने और भविष्य में अनुसन्धान मामलों में मनमानी नहीं हो इसे सुनिश्चित करने के लिए ,, पुलिस अधिकारियो को आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए पुलिस महानिदेशक ,,,पुलिस महानिरीक्षक कोटा रेंज को कडा पत्र भी लिखा है ,,,,,,न्यायालय ने पुलिस अधिकारियो को इस मामले में पत्रावली का सूक्ष्म अवलोकन कर दोषपूर्ण अनुसन्धान के लिए गम्भीर कार्यवाही की टिपण्णी भी की ,है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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