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05 नवंबर 2016

एक राजा की कहानी

एक राजा की कहानी तो सभी को पता है ,,उसके दरबारी ,,,ईश्वर के नहीं राजा के भक्त थे ,,उन भक्तजनो ने ईश्वरीय आदेशो की मान मर्यादा छोड़कर राजा को भगवान मानकर उसकी पूजा शुरू कर दी थी ,,भक्तजनो की भक्ति से राजा खुश भी थे ,,अभिभूत भी थे ,,लेकिन उन्होंने राजधर्म को निभाने की बात क्या कर दी ,,राजा के भक्तजनो को बर्दाश्त न हो सकी ,,भक्तजन जैसा चाहे ,,राजा वैसी ही इच्छा पूरी करे ,,बस ऐसा नहीं हुआ तो सो कोल्ड भक्तजन और ओरिजनल भक्तजनो में टकराव हो गया ,,ओरिजनल भक्तजन ,,जो राजा और राजा के राजधर्म के सही हिमायती थे ,,वोह सभी राजकार्य से बाहर गए ,,,बस सो कोल्ड भक्तजनो को मौक़ा मिल गया ,,वोह राजा की राजागीरी का मज़ाक़ उड़वाना चाहते थे ,,बस फिर किया था ,,राजा को नए कपड़े पहनाने की बात हुई ,,,नए नए कपड़े पहनना राजा का शोक था ,,बस इसी का फायदा भक्तजनो ने राजा को अपमानित करने के लिए उठाया ,,,एक ड्रेस डिज़ाइनर भक्तजन ने ,,राजा के कपड़े उतारे ,,उसे कपड़े पहनाने का अभिनय क्या ,,सभी भक्तजनो ने राजा की तरफ इशारा कर ,,बधाई दी मुबारकबाद दी ,,राजा के कपड़ो की तारीफ़ की ,राजा ओरिजनल वस्त्र विहीन थे ,,लेकिन सभी भक्तजन राजा के ड्रेस कोड की तारीफ़ करते हुए ,,उनके स्मार्ट दिखने की बात कहकर ,,उन्हें महल से बाहर ले आये ,,सड़को पर घुमाया ,,एक दो लोगो ने कहा भी के यह वस्त्रवीहीन राजा को ,,सड़को पर ऐसे कैसे घुमाते हो ,,उन्हें भक्तजनो ने गद्दार क़रार दिया ,,राष्ट्रविरोधी क़रार दिया ,,एक दो ,,अख़बार थे जिन्होंने भी आपत्ति की ,,भक्तजनो ने उन्हें गद्दारो से मिलकर अखबारबाजी करने वाला राष्ट्रद्रोह घोषित किया ,,कुच्छ ,,साहित्यकार ,,नाटककार थे उनका लिखना और बोलना तो गज़ब ही हो गया ,,उन्हें तो देश निकाले तक की सजा देने की घोषणा भक्तजनो द्वारा कर दी गई ,,अचानक ओरिजनल भक्तजन और राजा और राजधर्म के असली शुभचिंतक थे वोह आये ,, उन्होंने राजा की वस्त्रविहीन विहीन व्यवस्था को देखा ,,उनके नग्न शरीर पर कपड़े डाले ,,लेकिन एक राजा जो योद्धा था ,,एक राजा जो ओरिजनल राजधर्म का पालक था ,,एक राजा जो राष्ट्र को सुरक्षित ,,विकसित ,,खुशहाली के सपने की कोशिशो में जुटकर काम कर रहा था ,,एक राजा जो सो फ़ीसदी ईमानदार ,,मेहनती था ,,वोह राजा इन नक़ली भक्तजनो की बदले की भावना से आहत था लेकिन राजा की वोह साख जो भक्तजनो ने झूँठ बोलकर ,,,उन्हें गलत तस्वीर दिखाकर गिरा दी थी ,,उस साख की भरपाई ओरिजनल राष्ट्रभक्त भक्तजन पूरी कोशिशो के बाद भी भरपाई नहीं कर पा रहे थे ,,इधर नक़ली भक्तजन ,,उनके तिरस्कार का बदला लेकर ,,दुश्मनो के साथ खड़े होकर मुस्कुरा रहे थे ,,,,एक लघु कथा काल्पनिक है इसका किसी चरित्र ,,किसी पात्र से कोई मेल जॉल नहीं है ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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