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26 अक्तूबर 2016

यह सबक़ सीखा रहे है बूंदी ज़िले के इंदरगढ़ निवासी मुश्ताक़

ज़िन्दगी जीने का जज़्बा हो ,,,दिल में होसलो की उड़ान हो ,,अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान हो तो कोई भी शख्स किसी भी परेशानी में टूटता नहीं है ,,उसको अल्लाह गेब से हिम्मत देता है ,,ताक़त देता है ,,और उसकी हर कमी ,,उसके होसलो से पूरी कर उसे जीने की एक राह सिखा देता है ,,ऐसी ज़िन्दगी आम लोगो के लिए एक सबक़ बनती है ,,और यह सबक़ सीखा रहे है बूंदी ज़िले के इंदरगढ़ निवासी मुश्ताक़ जो इन दिनों कोटा कनसुआ प्रेमनगर क्षेत्र में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे है ,,जी हाँ दोस्तों ,,कलेक्ट्रेट के दरवाज़े पर एक शख्स जिसके दोनों पैर लचर पोलियो ग्रस्त थे ,,जिसके दोनों हाथ पोंचो से ऊपर कटजाने से पंजा विहीन थे ,,वोह शख्स मोबाईल पर बढे कॉन्फीडेन्स से किसी अधिकारी से ,,उसके किसी मिलने वाले शख्स का काम करने की आजिज़ी कर रहा था ,,वोह सही काम अब तक क्यों नहीं हुआ अधीनस्थों से इसका जवाब तलब करने की भी वाजिब मांग कर रहा था ,,पैरो में पोलियो ,खड़े होकर लहराते हुए ,,,पंजे विहीन हाथो से मोबाइल पर बाते करते देख मेरी नज़र एका एक इस शख्स पर टिक गयी ,,में इस शख्स को देखता रहा ,,,निहारता रहा ,,इस शख्स के इस अंदाज़ को सराहता रहा ,,मेने इस अंदाज़ को मेरे बढे भाई सुल्तानपुर के पूर्व प्रधान रईस खान ,,देहात कोंग्रेस के सचिव और अल्पसंख्यक विभाग कॉग्रेस के कोटा सम्भाग के प्रवक्ता मुख्यमहासचिव तबरेज़ पठान को भी बताया ,,,उसके इस अंदाज़ को देखकर इन लोगो ने भी दांतो तले ऊँगली दबा ली ,,,ज़ाहिर है ऐसे शख्स से मिलने ,,बात करने की उत्त्सुकता मेरी बढ़ी ,,,,मेने इनकी बात खत्म होने पर इनका पीछा किया ,,यक़ीन मानिये लहराते हुए चलने वाले इस शख्स के पीछे में दौड़ा ,, तब जाकर में इस शख्स की बराबरी कर सका ,,मेने आगे आकर इस शख्स को रोक लिया ,, मुस्कुराते हुए इस शख्स ने मुझ से सवाल किया ,,क्या हुआ वकील साहब ,,मेने कन्धे पर हाथ रखकर पूंछा ,,आप का नाम ,,जवाब मिला मुझे मुश्ताक़ अली कहते है ,,मेरा दूसरा सवाल ,,आप कहाँ से ,,जवाब मिला में ग्राम अभयपुरा ,,तहसील इंदरगढ़ ज़िला बूंदी से हूँ ,,लेकिन पिछले कई सालो से ,,कोटा कंसुआ स्थित प्रेमनगर में रहकर लोगो में प्रेम बाँट रहा हूँ ,,मेने कहा मतलब ,,वोह शख्स फिर मसुकुराया ,,में समाजसेवक हूँ सभी के काम करता हूँ ,,अस्पताल सम्बन्धित ,,पेंशन ,वगेरा सम्बन्धित कोई भी काम हो लोगो करता हूँ ,,आपका भी कोई काम हो तो बताना ,,मेने इस शख्स के कन्धे पर हाथ रखा ,,अदालत में मेरे कार्यालय पर ले गया ,,साथी आबिद अब्बासी ऐडवोकेट ,,,राजा महोबिया और पहले से बैठे मेरे छोटे भाई अल्पसंख्यक विभाग कोटा शहर के अध्यक्ष अब्दुल करीम खान से मिलवाया ,,मुस्ताक अली के साथ एक सेल्फी ली ,,उनकी दिनचर्या के बारे में जाना ,,उनका यह हाल कैसे हुआ इस बारे में जाना ,,मुस्ताक अली ने मुस्कुराते हुए के हुए कहा ,,भाईसाहब यह एक हादसा था ,,अल्लाह को मंज़ूर था ,,में लाइट का काम करता था ,,इंदरगढ़ में लाइट का काम कर रहा था ,,करंट से मेरे दोनों हाथ खत्म हो गए ,,पंजे के आगे कोहनियो के नीचे तक खत्म हो गए ,,पैर में पहले थोड़ा पोलियो था ,,लेकिन अब दोनों पैर कमज़ोर हो गए टेड़े मेढे हो गए ,,मुस्ताक ने कहा में हिम्मत नहीं हारा ,,में आठवी पास था ,,मेने इन हाथो से लिखना सीखा ,,पढा और मेरे सारे दिन चर्या के काम में खुद करने लगा ,,,मुश्ताक़ का कहना है वोह पांचो वक़्त की नमाज़ पढ़ते है ,,,सुबह फजर में नहाते है ,,चाय बनाते है ,,खुद के कपड़े धोते है ,,कंगा वगेरा करते है ,,हमने उनसे कंगा करवाकर भी देखा ,,उन्होंने बताया खाना वोह होटल का खाते है ,,मुश्ताक़ अली ने खुद सरकार से विकलांग प्रमाणपत्र बनवाकर ,,पांच सो रूपये प्रतिमाह की पेंशन हासिल की ,,बस फिर वोह लोगो का दुःख दर्द बांटने के लिए रोज़ अस्पताल आते है ,,परेशान लोगो का काम करवाते है ,,पेंशन व् अन्य मामलों में भटकते लोगो को सही राह दिखाकर उनके काम करवाते है ,,मुश्ताक़ अली से मोबाइल मेंटेन करने ,,मोबाइल पर नम्बर फीड करने ,,बात करने के बारे में पूंछा तो उन्होंने मुस्कुरा कर जवाब दिया ,,,अख्तर साहब ,,मोबाइल मिलाना ,,बात करना तो मामूली बात है में सोशल मिडिया से भी जुड़ा हूँ ,,मेरी मुश्ताक़ अली के नाम से फेसबुक है ,,वाट्सअप है ,,में चोंका मेने फेसबुक पर तलाश किया ,,मुश्ताक़ अली फेसबुक पर नहीं मिले ,,तो उन्होंने कहा अजी वकील साहब फेसबुक पर ऐसे नहीं तलाशते ,,आप मेरा मोबाइल नम्बर 7023750597 डालो तब में आ जाऊंगा ,,मेने नम्बर फेसबुक पर डाला और मुश्ताक़ अली का हंसता मुस्कुराता चेहरा ,,फेसबुक पर झाँकने लगा ,,सच क्या ज़िंदादिली ,,परेशानियों पर होसलो की क्या जीत है ,,ज़िन्दगी जीने का क्या सलीक़ा है ,,चेहरे पर मुस्कुराहट ,,हर काम एक आदमी की तरह से कर गुज़रने का जज़्बा ,,कामयाब कोशिश ,,पांचो वक़्त की नमाज़ ,,आत्मनिर्भरता ,,अल्लाह पर भरोसा इस शख्स ने मुझे भी ज़िदंगी का एक नया सबक़ सीखा दिया ,,मेने इस शख्स को सलाम किया इनके कुछ फोटो लिए और सोचा आप सभी साथियो से इस हौसले से भरी कामयाब खुशनुमा ज़िन्दगी को शेयर करूँ ,,सोचा कोटा शहर के कोचिंग हब में ,,एक मामूली सी तात्कालिक काल्पनिक झूंठी निराशा से बच्चे हताश होकर ,,आत्महत्या कर रहे है ,,अगर ज़िला प्रशासन कोचिंग हब में ,,ओरियन्टेड कार्यक्रम करवाकर कोचिग बच्चो को इस शख्स की ज़िन्दगी बताये ,,इस शख्स को ,,इस शख्स के हौसले को बच्चो के सामने पेश करे ,,तो सच बच्चो को एक नया हौसला ,,,एक नयी ताक़त मिलेगी और यह बच्चे ज़िन्दगी के इस खुशनुमा सफर में एक नए हौसले की उडान के साथ अपना कामयाब मुस्तक़बिल बनाने का सबक़ सीख सकेंगे ,,लेकिन क्या प्रशासन ऐसा कर पायेगा ,,क्या कोचिंग गुरु इस शख्स के हौसले को इन हारे हुए निराशावाद के दौर से गुज़र रहे छात्र छात्राओ को एक मिसाल एक सबक़ के तोर पर पेश कर पाएंगे ,,क्या कोटा के बुद्धिजीवी ,,कोटा में मनोचिकित्सक ,,कोटा के प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक मिडिया वाले कोचिंग हब और प्रशासन पर निराशावाद के दंश के शिकार बच्चो को अवसाद से बाहर निकालने के लिए इस शख्स का वाजिब ,,होसलो की उड़ान ,,का सबक़ सिखाने के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे ,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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