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13 अक्तूबर 2016

36 मिसाइलों को एक साथ गिरा सकेगी हमारी आर्मी, रूस से 33000 Cr में S-400 डिफेंस सिस्टम खरीदेगा भारत


 36 मिसाइलों को एक साथ गिरा सकेगी हमारी आर्मी, रूस से 33000 Cr में S-400 डिफेंस सिस्टम खरीदेगा भारत
  • प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन गोवा में ब्रिक्स समिट से इतर शनिवार को नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। उसी दिन यह डील साइन की जा सकती है। - फाइल
मॉस्को. भारत के साथ रूस जल्द ही S-400 एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को लेकर डील फाइनल करेगा। प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन गोवा में ब्रिक्स समिट से इतर शनिवार को नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। उसी दिन 5 अरब डॉलर (33000 करोड़ रुपए) वाली इस डील पर साइन किए जा सकते हैं। यह एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम 400 किमी की दूरी से आ रहे 300 टारगेट को एक साथ ट्रैक कर सकेगा। यही नहीं, एक ही वक्त में 36 मिसाइलों को टारगेट भी कर सकेगा। इससे 3 तरह की मिसाइलों को दागा जा सकता है...

- रूस की न्यूज एजेंसी TASS ने पुतिन के करीबी यूरि उशाकोव के हवाले से यह खबर दी है।
- S-400 एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम मास्को का सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम है।
- भारत ने 5 सिस्टम खरीदने में इंटरेस्ट दिखाया है। इस सिस्टम से 3 तरह की मिसाइलों को दागा जा सकता है।
- इंडियन डिफेंस मिनिस्ट्री ने पिछले साल दिसंबर में इस सिस्टम को खरीदने की हरी झंडी दी थी।
- यूरि उशाकोव के मुताबिक, बातचीत के नतीजों के आधार पर दोनों देशों के बीच कई अन्य डील भी साइन की जाएंगी।
- हालांकि यूरि ने बाकी डील्स के लिए कोई टाइम पीरियड बताने से इनकार किया है।
विमानों और ड्रोन को भी निशाना बना सकेगा
- S-400 एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम से विमानों, मिसाइल्स और यहां तक कि ड्रोन्स भी निशाना बनाया जा सकेगा।
- रूस ने इस सिस्टम को सीरिया में तैनात कर रखा है।
- अगर भारत यह डील साइन करता है तो वह चीन के बाद ऐसा सिस्टम खरीदने वाला दूसरा देश होगा।
- S-400 का अपग्रेडेड वर्जन S-300 है जिसे रूस अपनी डिफेंस फोर्सेज में शामिल कर चुका है।
- रूसी कंपनी Almaz-Antey ने इस सिस्टम को बनाया है।
और क्या है प्लानिंग?
- यूरि उशाकोव ने बताया कि इंडियन नेवी के लिए 11356 युद्ध पोत के निर्माण पर भी एक समझौता करने की योजना है।
- इसके अलावा कामोव Ka-226T हेलिकॉप्टर्स बनाने के लिए भारत के साथ एक ज्वाइंट वेंचर बनाने की भी प्लानिंग है।
- पुतिन और मोदी बातचीत के नतीजों को देखते हुए बाद में एक ज्वाइंट स्टेटमेंट भी जारी कर सकते हैं।
- जिससे कई ग्लोबल और रीजनल इश्यूज को सॉल्व करने पर साझा सहमति पर मुहर लगेगी।

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