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01 सितंबर 2016

जयपुर ऍन एस यू आई और मुख्य कोंग्रेसियो द्वारा अल्पसंख्यक छात्रों की उपेक्षा ने ,,,,कोंग्रेस हितेषी अल्पसंख्यक छात्रों को बगावत करने पर मजबूर किया

जयपुर ऍन एस यू आई और मुख्य कोंग्रेसियो द्वारा अल्पसंख्यक छात्रों की उपेक्षा ने ,,,,कोंग्रेस हितेषी अल्पसंख्यक छात्रों को बगावत करने पर मजबूर किया और इसका खिमियाज़ा जयपुर यूनिवर्सिटी चुनाव में अल्पसंख्यक छात्रों द्वारा निर्दलीय प्रत्याक्षी अंकित धायल  को मिल जाने से ऍन एस यू आई को इन चुनाव में मुंह की खाना पढ़ी और तीसरे नम्बर पर रहकर औंधे मुंह गिर पढ़ी ,,,,जयपुर यूनिवर्सिटी चुनाव में ऐ बी वी पी के खिलाफ ,,छात्र कोंग्रेस का पडला भारी था ,,क्योंकि वहां अल्पसंख्यक छात्र ऍन एस यू आई के साथ थे  ,, चुनावी मुहायदे के साथ कार्यकारिणी के कुछ महत्वपूर्ण पदों पर ,,अल्पसंख्यक छात्रों को प्रतिनिधित्व देने का छात्र कोंग्रेस द्वारा वायदा  किया गया था ,,,लेकिन कुछ बाहरी हार्डलाइनर कोंग्रेसियो के दखल के बाद छात्र कोंग्रेस में अल्पसंख्यक छात्र छात्राओ को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया ,,,उलटे जयपुर में सभी बाहरी कोंग्रेसी  हार्डलाइनरो ने कई दिग्गजो को एकत्रित कर इस यूनिवर्सिटी चुनाव की कमान अपने हाथो में ली और दावा किया के हम सब एक साथ हो गए है इसलिए अब छात्र कोंग्रेस की जीत पक्की है ,, अफ़सोस इस बात का है के हार्डलाइनर कोंग्रेसियो ने इनकी रणनीति में जयपुर के दिग्गज कोंग्रेसी अल्पसंख्यको तक को शामिल नहीं किया ना ही उनकी  मदद मांगी ,,कोंग्रेस की यह हार्ड लाइनर रणनीति छात्र कोंग्रेस के लिए घातक साबित हुई और अल्पसंख्यक छात्र जो कोंग्रेस समर्थित ऍन एस यू आई के हमेशा साथ रहे उनमे उपेक्षा को लेकर बगावत के तेवर दिखे ,,,,खुद अंकित धयल  ने कोंग्रेस की इस हार्डलाइनर अल्पसंख्यको की उपेक्षा को चुनाव की रणनीति का हिस्सा बनाया ,,अंकित धायल ने विनम्र स्वभाव के तहत अल्पसंख्यको की उपेक्षा के ज़ख्मो पर मरहम लगाया ,,उन्हें प्रतीनिधित्व दिया और जयपुर के दिग्गज अल्पसंख्यक नेतृत्व के घरो पर डोर टू डोर जाकर समर्थन माँगा ,,इसके नतीजे अंकित धायल के पक्ष में आये ,,एक तरफ जयपुर छात्र कोंग्रेस और जयपुर के दिग्गज कोंग्रेसियो की हार्डलाइनर ताक़त थी ,,उनका अल्पसंख्यक विरोधी अहंकार था ,,दूसरी तरफ अंकित धायल का अल्पसंख्यक प्रेम ,,,धर्मनिरपेक्षता ,,,विनम्रता और बाहरी अल्पसंख्यक वरिष्ठ दिग्गजो के प्रति उनका सम्मान था ,,बस बाज़ी पलट गयी ,, ऍन एस यू आई की जहां अल्सपंख्यक छात्रों के समर्थन से एक तरफा जीत थी ,,,वहां अल्पसंख्यको का समर्थन ऍन एस यू आई से हठ कर अंकित धायल के पक्ष में जाने से अंकित धायल  तीसरे नम्बर से पहले नम्बर पर आ गये और ऐ बी वी पी को तो उन्होंने पटखनी दी ही सही लेकिन छात्र कोंग्रेस के हार्डलाइनर समर्थित उम्मदीवार को अल्पसंख्यको की उपेक्षा की सज़ा तीसरे नम्बर पर आकर भुगतना पढ़ी ,,,,,,,,राजस्थान में जयपुर यूनिवर्सिटी में अल्पसंख्यक छात्र कोंग्रेस की उपेक्षा को लेकर आये इन नतीजो के बाद ,,,कोंग्रेस को इसे एक सबक़ के रूप में लेना चाहिए ,,,उसे इस कड़वे सच को मान लेना चाहिए के कोंग्रेस और उसके समर्थित संगठनों की रीढ़ की हड्डी अल्पसंख्यक और दलित है उन्हें और उनके प्रतिनिधित्व ,उनके वरिष्ठ नेताओ को साइड लाइन करके कोंग्रेस का बैढा पर मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है ,,इसलिए अब इस छात्र कोंग्रेस के चुनाव मे हार्डलाइनर रणनीति ,,अल्सपंख्यकों की उपेक्षा ,,अल्सपंख्यक दिग्गजो को साइड लाइन कर बनाई गयी रणनीति के बाद ,,जीती हुई बाज़ी हार में बदलने से ,,हमे सबक़ लेना चाहिए और हमे हमारी पुरानी गलतियों को भुलाकर ,,अल्पसंख्यक ,,,दलितों की उपेक्षात्मक रुख में फिर से सुधार कर ,,इन समाजो के प्रतिनिधियों को सम्मान देकर फिर से कोंग्रेस को ज़िंदाबाद करने की नयी रणनीति बनाना चाहिए ,,अभी भी कुछ नहीं बदला है ,,बिखरा हुआ ,,टूटा हुआ दलित ,,अल्सपंख्यक समाज अभी भी कोंग्रेस के प्यार और सम्मान का भूखा हो और कोंग्रेस को सम्मान और प्रतिनिधित्व की शर्तो के साथ 95   फीसदी समर्थन देने को तैयार बैठा है ,,,बस ज़रूरत है कोंग्रेस  की हार्डलाइनर रणनीति को बदलकर फिर से कोंग्रेस के संवैधानिक सोच में शामिल होकर पुरानी कोंग्रेस  बनकर इनके समर्थन लेने की ,,फिर कोंग्रेस ज़िंदाबाद थी ,,ज़िंदाबाद है और ज़िंदाबाद रहेगी ,,,,जयपुर के छात्र संगठन के चुनाव ,,एक शुरुआत है ,,इससे हमे सबक़ लेकर ,,कोंग्रेस के हक़ में एक जुट होकर नई सॉफ्ट ,,सभी का साथ कोंग्रेस के साथ ,,वाली रणनीति बनाकर आगे बढ़ना होगा ,,,नहीं तो फिर हमे हमारी छात्र कोंग्रेस की करारी हार के बाद जो जीता वोह सिकन्दर ,,की कहावत चरितार्थ करने के लिए निर्दलीय प्रत्याक्षियों के कन्धे पर हाथ रखकर उन्हें अपना बताकर गले लगाने पर मजबूर होना पढ़ेगा ,,लेकिन यह पब्लिक है सब जानती है ,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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