हमें चाहने वाले मित्र

17 अगस्त 2016

संदूकों में_

❛ कुरान सिमटी पड़ी है_
_संदूकों में_
_कुछ ज़ाहील ज़न्नत ढूंढ़ते है_
_बन्दूको में ❜_

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...