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07 अगस्त 2016

ईरान ने न्यूक्लियर साइंटिस्ट को दी फांसी, अमेरिका को दे रहा था देश के टॉप सीक्रेट



ईरान ने जासूसी के आरोप में अपने एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट को फांसी पर लटका दिया।, international news in hindi, world hindi news
ईरान ने जासूसी के आरोप में अपने एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट को फांसी पर लटका दिया।
तेहरान. ईरान ने जासूसी के आरोप में अपने एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट को फांसी पर लटका दिया। स्टेट मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साइंटिस्ट शहराम अमीरी देश के न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़े टॉप सीक्रेट्स अमेरिका को भेजता था। ईरान ने रविवार को इसके मौत की खबर भी कन्फर्म की। अमीरी ईरान की डिफेंस मिनिस्ट्री से एफिलिएटेड यूनिवर्सिटी के लिए काम करता था। अमीरी को लगातार मॉनीटर कर रहा था ईरान...
- ईरान की न्यूज एजेंसी IRNA ने ज्यूडिशियल स्पोक्सपर्सन घोलमहोसेन मोहसिन इजेही के हवाले से मौत की पुष्टि की।
- इजेही ने स्टेट मीडिया से कहा कि ईरानी न्यूक्लियर साइंटिस्ट अमीरी को अमेरिका की जासूसी के मामले फांसी दे दी गई। सजा कब और कहां दी गई, उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया।
- इजेही ने कहा कि अमेरिका, ईरान की इंटेलिजेंस सर्विस को चालाकी से बेवकूफ बनाने की कोशिश में था।
- उन्होंने स्टेट टेलीविजन पर कहा कि अमेरिकी इंटेलिजेंस सर्विस को लगा था कि ईरान की अमीरी पर नजर नहीं है, लेकिन हम उसे लगातार मॉनीटर कर रहे थे।
- अमीरी के पास देश से जुड़ी कॉन्फिडेंशियल इन्फॉर्मेशन हासिल करने के राइट्स थे और उसने हमारे दुश्मन अमेरिका से कनेक्शन बनाकर ये सारी जानकारी उसे दे दी।
- इजेही ने बताया कि साइंटिस्ट ने ज्यूडिशियल प्रॉसेस से तहत सुप्रीम कोर्ट में मौत की सजा के खिलाफ अपील की थी।
- हालांकि, कोर्ट ने मामले की गंभीरता से समीक्षा करने के बाद सजा बरकरार रखी।
- स्पोक्सपर्सन ने अमीरी की फैमिली की ओर से फैलाई जा रही अफवाहों का खंडन किया, जिसमें उसे 10 साल की जेल होने की बात कही जा रही है।
सऊदी जाने से बाद कई साल गायब रहा
- अमीरी ईरान की डिफेंस मिनिस्ट्री से एफिलिएटेड यूनिवर्सिटी के लिए काम करता था, जो 2009 में बंद हो गई थी।
- अमीरी जून 2009 में सऊदी अरब जाने के बाद से गायब था और इसी साल अमेरिका में नजर आए था।
- वो जब 2010 में ईरान लौटा तो यहां अफसरों ने उसका वेलकम किया, लेकिन जासूसी से जुड़ी कोई बात सामने नहीं आई।
- अमीरी ने लौटने के बाद कहा था कि सऊदी के मदीना शहर में फारसी बोलने वाले दो सीआईए एजेंट्स ने गनप्वाइंट पर उसे किडनैप किया।
- इसके बाद अमेरिका में उसे एक साल से ज्यादा वक्त तक रखा गया था।
- अमीरी ने ये भी कहा थी कि वो किसी कॉन्फिडेंशियल जॉब से जुड़ा नहीं था और न ही उसके पास ऐसी कोई जानकारी थी।
मोटी रकम के बदले दी जानकारी
- अमेरिकी अफसरों का कहना है कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को समझने में मदद करने के लिए अमीरी को लाखों डॉलर की मदद की गई थी।
- यूएस अफसरों ने 2010 में मीडिया को बताया था कि अमीरी को ये जानकारी देने के लिए 5 मिलियन डॉलर दिए गए थे।
- अफसरों के मुताबिक, अमीरी ईरान के रेडिएशन डिटेक्शन प्रोग्राम के लिए काम कर रहा था। वो अमेरिका में कई महीनों तक अपनी मर्जी से रुका था।
- एनालिस्ट्स का कहना है कि ईरान अथॉरिटी के फैमिली पर पड़ रहे दबाव में वो ईरान लौटा था।

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