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13 अगस्त 2016

स्वामीनारायण संप्रदाय को दुनिया में पहचान दिलाने वाले स्वामी महाराज का 95 की उम्र में निधन, दुनियाभर में बनवाए थे 900 से ज्यादा मंदिर



नरेंद्र मोदी ने फोटो ट्वीट कर दुख जताया।
अहमदाबाद.बोचासणवासी अक्षरपुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्थान (बीएपीएस) के प्रमुख स्वामी महाराज शांतिलाल पटेल जी का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने शनिवार शाम करीब 6 बजे अंतिम सांस ली। काफी दिनों से वे बीमार चल रहे थे। उनके निधन से स्वामीनारायण संप्रदाय में शोक है। नरेंद्र मोदी ने उनके साथ की एक फोटो ट्वीट कर दुख व्यक्त किया। मोदी ने कहा, ‘मैं कभी भूल नहीं सकूंगा, प्रमुख स्वामी महाराज हमेशा मार्गदर्शक रहे हैं। उनकी कमी खलेगी।" कौन संभालेगा स्वामीनारायण सम्प्रदाय की कमान...
- महंतस्वामी साधु केशवजीवनदासजी बीएपीएस के छठवें मुखिया होंगे।
- बीएपीएस की परंपरा के अनुसार प्रमुख स्वामी महाराज के ‘अक्षरनिवास’ होने के कुछ ही पलों बाद उत्तराधिकारी की घोषणा कर दी गई।
वड़ोदरा के एक गांव में हुआ था शांतिलाल का जन्म
- स्वामी जी महाराज का जन्म 7 दिसंबर 1921 को वड़ोदरा जिले में पादरा तहसील के चाणसद गांव में हुआ था। स्वामी महाराज ने युवावस्था में ही आध्यात्म का मार्ग अंगीकार कर लिया था।
- वे शास्त्री महाराज के शिष्य बने और 10 जनवरी 1940 को नारायणस्वरूपदासजी के रूप में उन्होंने अपना आध्यात्मिक सफर शुरू किया।
- साल 1950 में मात्र 28 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने बीएपीएस के प्रमुख का पद संभाल लिया था।
- इस समय बीएपीएस में उनकी उम्र की तुलना में अनेकों बड़े संत थे, लेकिन प्रमुख स्वामी की साधुता, नम्रता, करुणा और सेवाभाव के चलते ही उन्हें यह पद दिया गया था।
न्यूजर्सी में उन्हीं की देखरेख में बन रहा था सबसे बड़ा मंदिर
- 900 से ज्यादा हिंदू मंदिर बनाने का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड स्वामी महाराज के नाम दर्ज है। उन्होंने 9090 संस्कार केन्द्र शुरू किए और 55000 हजार स्वंयसेवक तैयार किए।
- अमेरिका के न्यूजर्सी में बन रहा एक मंदिर तो दुनिया में हिंदुओं के सबसे बड़े मंदिर के रूप में आकार ले रहा है। यह मंदिर 162 एकड़ में बनाया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य 2017 तक पूरा होगा।
शिक्षापत्री ही संपत्ति
गांधीधाम-दिल्ली के भव्य अक्षरधाम के प्रेरक प्रमुख स्वामी महाराज के पास अपना कुछ नहीं था। संपत्ति के नाम कहा जाए तो सिर्फ हरिनाम की माला, चार वस्त्र, ठाकुरजी तथा उनकी पूजा-भोजनप्रसाद का काष्टपात्र।

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