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09 जुलाई 2016

मैंने एक मुश्त जी ली जिंदगी

तुम उँगलियों में दिन गिनते रहे ,
मैंने एक मुश्त जी ली जिंदगी ,,,,,,,,,जी हाँ दोस्तों मेरे वालिद हाजी इंजीनियर असगर अली जिनकी वफ़ात हाल ही में पांच जुलाई को अचानक हुई है ,, उनके कमोबेश कुछ इसी तरह के ख्यालात थे ,,दुनिया की भागम भाग से अलग थलग ,,अपने सूफियाना अंदाज़ में सिर्फ ,,हज ,,उमरा ,,नमाज़ ,,,ज़कात तक ही उन्होंने खुद को महदूद कर लिया था ,,,झालावाड़ में प्रारम्भिक शिक्षा के बाद एन सी सी के अंडर ऑफीसर रहे ,,मेरे वालिद बेहतरीन निशानेबाज़ होने की वजह से एशियाड 82 में विजेता रहे ,,फिर मास्को ओलम्पिक में भागीदार बने ,,रायफल क्लब एसोसियेशन के सक्रिय सदस्य रहने के बाद ,,निशानेबाज़ी उनका शोक था ,,कोटा डी सी एम के बाद नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन की सरकारी कपड़े की एडवर्ड मील ब्यावर में वह मेनेजर इंजीनियरिंग रहे फिर ,,दिल्ली से सेवानिवृत्ति के बाद ,,वह दुनियादारी से विमुख हो गये ,,बस एक साल हज ,,एक साल उमराह करना उनका जुनून बन गया ,,,अल्लाह का शुक्र है ,,खुद की कमाई से उन्होंने तीन हज और सात उमराह किए ,,,सिर्फ खुदा का ज़िक्र ,,ही उनका शोक बन गया ,,लेकिन दोस्तों ,,खुदा को कुछ और ही मंज़ूर था ,,पिछले दिनों पेट की आंत अचानक खराब होने की वजह से जब वालिद साहब को सुधा अस्प्ताल में भर्ती कराया तो ,लम्बे ऑपरेशन के बाद ,,डॉक्टर्स ने कहा था ,,हमने अपना काम किया है ,,,लेकिन ज़िंदगी खतरे में है ,,हम कुछ नहीं कर सकते ,,हमने और आपने सभी ने मेरे वालिद के लिए बेशुमार दुआएं की ,,नतीजा डॉकटरो की पेंशन के खिलाफ हुआ ,, अल्लाह ने हमारी दुआएं क़ुबूल की और अनहोनी को होनी कर मेरे वालिद को तंदरुस्ती के साथ खतरे से बाहर कर फिर से घर भेज दिया ,,लेकिन अलग की गई आंत को फिर से री जॉइंट करने के लिए हाल ही में दस दिन पहले उन्हें अस्प्ताल में भर्ती कराया गया ,,आंत का री जॉइंट ऑपरेशन सफल रहा ,,डॉकटर ने बढ़े फख्र से मुस्कुरा कर कहा ,,ऑपरेशन सक्सेस ,,,,आल इज़ वेल ,,जल्द ही छुट्टी लेकर घर चले जाइए ,,लेकिन खुदा को कुछ और मंज़ूर था ,,रमज़ान के दिन ,,इबादत के पवित्र महीना ,अचानक वालिद की ईको जांच के बाद पता चला के उन्हें साइलेंट हार्ट अटेक आने से उनके हार्ट की पावर पच्चीस परसेन्ट रह गयी है ,,,तुरंत आई सी यू में शिफ्ट किया गया ,,मेरे भाई परवेज़ और डॉक्टर्स जो कुछ भी कर सकते थे वह क्या ,,सेकड़ो जांचे ,,सेकड़ो दवाएं ,,इंजक्शन सब ही तो दिए गए ,,हर बार वालिद से पूंछने पर बस एक ही जुमला वह मुस्कुरा कर कहते थे ,,ठीक हूं सब ठीक होगा ,,घर कब चलेंगे ,,लेकिन में और मेरा भाई सब लाचार बेबस ,,उनकी लगातार स्थिति कमज़ोर होते देख रहे थे ,,कोई दवा ,,कोई दुआ काम नहीं कर रही थी ,,सभी विशेषज्ञ चिकित्सक ,,अपनी कोशिशों में जुटे थे ,,,लेकिन हालात और बिगड़ते गए ,,तब वेंटिलेटर पर रखना पढ़ा ,,,,लेकिन खुदा से कोन लड़ सकता है ,,खुदा को उनकी नेकियों का सिला देना था ,,उनको उनकी इबादत का इनाम देना ,, बस रमज़ान के महीने में आखरी दिनों में ,,,मेरे वालिद का हाथ मेरे हाथ में था ,,मेरी आंखों में आंसू ,,हलक़ में हिचकियाँ और ज़ुबान पर अल्लाह से उनकी लम्बी उम्र सेहतयाबी की दुआ थी ,,,लेकिन मेरे वालिद ने मेरी तरफ देखा ,,खुदा हाफ़िज़ कहा और बस आंखे बंद कर ली ,,डॉकटरो ने फिर भी कोशिश की ,,लेकिन सब बेकार ,,ऐसा लगा ,,हम कैसे बेबस ,,कैसे लाचार है ,,बेकार है यह सब डॉकटर ,,यह अस्प्ताल ,,,यह दवाइयां ,,यह अस्प्ताल ,,,यह मशीने जब तक अल्लाह की मर्ज़ी न हो ,,कोई कुछ नहीं कर सकता ,,,दोस्तो मेरे लिए सदमे और अफसोस का बेहद खतरनाक दौर चल रहा है ,,पल पल वालिद की याद सता रही है ,,,,बेटा कहां गए थे ,,खाना खा लिया ,,,देर से क्यूँ आए ,,यह सवालात बंद हो चुके थे ,,हिदायतों का सिलसिला थम सा गया है ,,,बेटा सुनने के लिए कान तरस रहे है ,, उनका साया तो यादें बनकर हमारे साथ है ,,लेकिन यह यादें बहुत दर्द दे रही है ,,बहुत तड़पा रही है ,,,रमज़ान के दिनों में उनका विसाल ,,अरफ़े के दिन उनकी सोयम की फातिहा ,,तीसरे दीं ईदुलफितर की नमाज़ में दुआ ऐ मगफिरत ,,उसी दिन जुमेरात ,,पहली जुमेरात ,,सब कुछ चट पट मिन्टो में , ईद थी लेकिन वालिद नहीं थे ,,सिर्फ आंखों में आंसू ,,दिलों में उनकी याद थी ,,ईद पर सुबह उठकर दूध मंगा कर हक़ से सिवयये बनवाने वाला ,,फितरा देने वाला ,,नहीं था ,,नमाज़ के बाद गले मिलकर लम्बी उम्र ,,कामयाबी सेहतयाबी की दुआए देने वाला नहीं था ,,घर में आते ही हमे और बच्चों को बुलाकर ईदी देने वाला नहीं था ,,,,,,,,,,सोचता हूं ,,अल्लाह ऐसा साया जो सुकून देता है वह क्यूँ छीन लेता है ,,, क्यूँ छीन लेता है ,,में खुद को टूटा हुआ ,,अकेला अकेला सा महसूस करने लगा हूं ,,घर में बढ़ा हूं ,,मुझपर ज़िम्मेदारियाँ तो डाल गए है ,,लेकिन वह साया बनकर ,,मेरे मार्गदर्शक बनकर हमेशा मेरे साथ ,,मेरे पास रहेंगे ,,सिर्फ आंसुओं और दर्द भरे अल्फाजो के सिवा अभी मेरे पास और कुछ शेष नहीं है ,,मेरे वालिद की मगफिरत की दुआ कीजिए ,,अल्लाह मेरी अम्मी को सब्र दे ,,सेहतयाबी दे ,,लम्बी उम्र दे ,,क़ूवत दे ,,उनके हक़ में भी प्लीज़ दुआ कीजिए , ,,में आपकी दुआओ का मोहताज हूं ,,में पिछले दिनों आपकी दुआओ से जो मेरे वालिद को अल्लाह ने ज़िंदगी बख्शी थी उसका शुक्रगुज़ार हूं ,,प्लीज़ दुआ कीजिए ,,आपकी दुआ मेरी हिम्मत ,,मेरी ताक़त ,,मेरा संबल है ,,,में आपका शुक्रगुज़ार हूं जो आपने मुझे हर पल सम्भाला है ,,,लड़खड़ाते हुए क़दमों को रोककर मुझे हिम्मत दी है ,,खुदा से मेरे और मेरे परिवार के सदस्यों के सब्र और फलाह बहबूदगी के लिए दुआ की है ,,मुझे फख्र है के में इस हिन्दुस्तान में जन्मा ,,मेरे वालिद विदेशो में कई जगह होकर आने के बाद भी ,,इसी मुल्क की मिट्टी में सुपुर्द ए खाक किए गये ,,इसी मिट्टी पर उनकी मगफिरत के सजदे है ,,मुझे फख्र है मेरे सभी दूसरे समाजो से,,सभी सियासी पार्टियों से ,, सभी धर्मो से जुड़े दोस्तों ,,साथियो ,,बुजुर्गो भाइयो पर जिन्होेंने ,,,धर्म ,,मज़हब ,,दलगत सियासी राजनीति से लग हठकर ,,मेरे इस दुख की घड़ी में मुझे हिम्मत और ढांढस बंधाया ,,,,,,,,,,,,,,,,,दुआ कीजिए ,,दुआ कीजिए ,,प्लीज़ दुआ कीजिए ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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