हमें चाहने वाले मित्र

20 जुलाई 2016

उठाओ खंजर

लो उठाओ खंजर
मेरे सीने में घोंप दो ,,
बस यह दिल है
इसे बचा लेना ,,
इसमें मेरी जान है ,,
जो धड़कनो के साथ
सावन का झूला ,,
झूल रही है ,,अख्तर

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...