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03 जून 2016

आंदोलन के नाम पर आए, बाग पर कब्जा किया, फिर बरसाई गोलियां-ग्रेनेड



Q&A: आंदोलन के नाम पर आए, बाग पर कब्जा किया, फिर बरसाई गोलियां-ग्रेनेड
लखनऊ। मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा के बाद कई ऐसे सवाल उठ रहे हैं जिनके जवाब लोग जानना चाहते हैं। हिंसा हुई कैसे, इसके पीछे कौन हैं। इतने लोग आए कहां से। दो साल से पुलिस क्या कर रही।....

1# मथुरा में हुआ क्या?
- हाईकोर्ट ने मथुरा प्रशासन को जवाहर बाग पर हुआ अवैध कब्जा हटाने का आदेश दिया था।
- इसके बाद पुलिस ने कब्जा करने वालों को नोटिस भेजा लेकिन ये लोग वहां से नहीं हटे।
- सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने से पहले रेकी करने गई पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला किया।
- उपद्रवियों ने फायरिंग के साथ आगजनी भी की। जवाब में पुलिस ने उपद्रवियों पर गोली चलाई। इस फायरिंग और आगजनी में 24 लोगों की जान चली गई।
2# क्यों गई 24 लोगों की जान?
- पुलिस को इस तरह के हमले की उम्मीद नहीं थी। डीएम और एसएसपी के बीच कम्युनिशन की कमी की भी बात सामने आ रही है।
- आमतौर पर जब प्रशासन अपने साथ पुलिसबल लेकर कब्जा हटाने जाता है। मथुरा में पुलिस की टीम के साथ डीएम या प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी नहीं था।
3# कैसे भड़की हिंसा
- जब पुलिस बाग में पहुंची तो पहले से ही पेड़ों पर चढ़े लोगों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी गोलियां बरसाईं।

4# कहां से आए इतने उपद्रवी?
- 2 साल पहले ये लोग सागर से दिल्‍ली जाकर धरना देने वाले थे। इसका नाम इन लोगों ने 'सत्‍याग्रह' रखा था।
- दिल्‍ली में जगह नहीं मिलने की वजह से इन्‍होंने मथुरा के जवाहर बाग में ही अपना डेरा जमा लिया।
- यहां प्रशासन से एक दिन धरने की इजाजत ली थी। ये एक दिन का धरना कब्जे में तब्दील हो गया।
5# इनका नेता कौन है?
- साठ साल का रामवृक्ष यादव। कभी मिट्टी के घर में रहता था। जय गुरुदेव के संपर्क में आया और धीरे-धीरे करीब 5 हजार लोगों का नेता बन बैठा।
- रामवृक्ष यादव 40 साल पहले जय गुरुदेव का चेला बन गया था। रामवृक्ष जय गुरुदेव की दूरदर्शी पार्टी से लोकसभा और विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है।
6# कब से कब्जा कर रखा था?
- 18 अप्रैल 2014 को एक दिन प्रदर्शन की अनुमति लेकर जवाहर बाग पर कब्जा कर लिया। तब से यहीं रह रहे थे।
- शुरुआत में करीब 3-4 सौ लोग यहां आए थे। धीरे-धीरे इनकी संख्या हजारों में पहुंच गई।
7# क्या ये लोकल इंटेलिजेंस फेल्योर है?
-पुलिस को पता ही नहीं था कि बाग के अंदर इतने ज्यादा लोग हैं।
- लोकल इंटेलिजेंस ये पता लगाने में भी असफल रहा कि इन लोगों ने इतनी बड़ी मात्रा में हथियार इकट्ठा कर लिया है।
8# क्या उपद्रवियों को पॉलिटिकल सपोर्ट था?
-सीएम अखिलेश यादव के चाचा और उनकी कैबिनेट में मंत्री शिवपाल यादव जय गुरुदेव के करीबी रहे हैं। रामवृक्ष यादव उन्हीं जय गुरुदेव का चेला था।
- ऐसी भी खबर है कि रामवृक्ष और उसके समर्थकों का वोटर आईडी भी बना हुआ था। इन लोगों को कब्जे वाली जगह से नहीं हटाने का प्रशासन पर पॉलिटिकल प्रेशर भी था।

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