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24 मार्च 2016

17 सितम्बर 1860 को लाला जयदयाल और मेहराब खान को कोटा एजेंसी के बग़लें के पास उसी स्थान पर फाँसी दी गई जहाँ उन्होंने मेजर बर्टन का वध किया था

17 सितम्बर 1860 को लाला जयदयाल और मेहराब खान को कोटा एजेंसी के बग़लें के पास उसी स्थान पर फाँसी दी गई जहाँ उन्होंने मेजर बर्टन का वध किया था। इस तरह दो उत्कट देशभक्त स्वतंत्रता के युद्ध में अपनी आहुति दे अमर हो गए। उनका यह बलिदान स्थान आज भी कोटा में मौजूद है पर अभी तक उपेक्षित पड़ा हुआ है,,इसके पहले ,,लाला जयदयाल के भाई हरदयाल आज़ादी की इस लड़ाई में मारे गए तथा मेहराब खान के भाई करीम खाँ को पकड़कर ब्रितानियों ने सरे आम फाँसी पर लटका दिया,,मेरे प्यारे कोटा के निवासियों ,,कोटा के राष्ट्रेभक्तो ,,,कोटा के नीली नेकर से सफेद पेंट और खाकी नेकर से खाकी पेंट में आने वाले राष्ट्रभक्तो ,,क्या आपको आज़ादी के इन शहीद बहादुर दीवानों का शहीद स्मारक पता है ,,क्या इन्हे फांसी जहाँ दी गया थी वह स्थान पता है ,,क्या शहीद स्मारक का स्थल बदल कर ,,स्टेडियम के पास क्यों बना दिया गया है ,,क्या इस साज़िश का पता है ,,क्या कभी इन आज़ादी के दीवानों को इनके शहीद दिवस 17 सितम्बर को इनकी क़ब्र और समाधि स्थल पर नयापुरा अस्पताल के सामने किसी राष्ट्रभक्त ने इनकी शहादत को याद कर पुष्पांजलि अर्पित की है ,,अगर कोटा के इन आज़ादी के शहीद दीवानों को जिन्होंने बहादुरी से लड़कर अंग्रेज़ों के दांत खट्टे किए ,,हमारी जनता पर ज़ुल्म करने वाले ,, अंग्रेज़ों के ज़ालिम एजेंट मेजर बर्टन और उसके दो पुत्र जो आज़ादी के सिपाहियों पर कहर बरपा रहे थे ,,उनके चमचे राजाओं को इन्होने गिरफ्तार किया ,,क्या ऐसे शहीदों को हमने आज तक कभी भी किसी भी क्षण याद किया ,,क्या इनका इतिहास हमने लिखा ,,क्या 17 सितम्बर की इस शहादत को हम ,, शहीदों को यादकर उन्हें श्रद्धांजलि देने का वृहद कार्यक्रम रख सकेंगे ,,नीली नेकर से सफ़ेद पेंट और खाकी नेकर से खाकी पेंट में आये ,,शहीदों के भक्तो ,,राष्ट्रभक्तो क्या हम कोटा के इन आज़ादी के शहीद दीवानों को इनका मान सम्मान वापस शहीदी कार्यक्रम कर ,,इनके फांसी स्थल को ऐतिहासिक स्मारक बनवाकर ,,इनके मज़ार और समाधि स्थल को ऐतिहासिक स्मारक के रूप में बनवाकर पर्यटन से जोड़ने और इतिहास से जोड़ने की कार्यवाही कर सकेंगे ,,या सिर्फ दिखावा ,,दिखावा ,,झूंठ और फरेब के सहारे हम खुद को सो कोल्ड राष्ट्रभक्ति ,, शहीदों को याद करने वाले कहने वाले फरेबी साबित करते रहेंगे ,, उठो गुलामी से बाहर निकलो ,,ज़मीरों को जगाओ ,,ज़िम्मेदार बनो ,,देश के लिए मर मिटने वाले इन दीवानों की शहादत के साथ तो इन्साफ करो यारो ,,उठो ,,,उठो ,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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