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04 फ़रवरी 2016

कोटा नगरनिगम में भ्रष्टाचार ,,अत्याचार ,,अनाचार के खिलाफ निर्भीक होकर आवाज़ उठाने वाला एक मात्र पार्षद मोहम्मद हुसेन

कोटा नगरनिगम में भ्रष्टाचार ,,अत्याचार ,,अनाचार के खिलाफ निर्भीक होकर आवाज़ उठाने वाला एक मात्र पार्षद मोहम्मद हुसेन पुलिस द्वारा दर्ज के मुक़दमे में पुलिस पर कथित हमले के मामले में गिरफ्तार थे ,,जेल में थे ,,एक तुच्छ स्तर के मामले में ,,,बदले हुए हालत में उनकी ढाई माह में आज राजस्थान उच्च न्यायालय से ज़मानत स्वीकार की गई है ,,मामला प्रथम वर्गीय मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है ,,जिन धाराओ में मामला है ,,यह सभी धाराए पहले ज़मानतीय धाराए थी ,,,खेर खुदा का शुक्र है ,,उनकी बस्ती से जुड़े लोगों ,,उनके दोस्तों की दुआएं काम आई और आज अल्लाह के हुक्म से उनकी ज़मानत हो गयी ,,,,मोहम्मद हुसेन के खिलाफ दर्ज मामले ,,उनकी ज़मानत याचिका को लेकर जो भी सफर तय हुआ है ,,सही मायनो में इसकी समीक्षा की भी ज़रूरत है ,,,, मोहम्मद हुसेन एक जलती हुई मराठा बस्ती को बचाते हुए ,,राहत कार्य करते हुए ,,पुलिस के गुस्से का शिकार हुए थे ,,इसके बाद मेले दशहरे में एक शख्स की मदद के दौरान पुलिस की झड़प के बाद उनके खिलाफ मुक़दमा दर्ज हुआ ,,मुक़दमा झूंठा था या सच इसका फैसला अदालत करेगी ,,लेकिन जिस तरह से एक छोटे से मुक़दमे में उन्हें लम्बी जेल यात्रा काटना पढ़ी वोह शायद ऐतिहासिक ही कहा जाएगा ,,,अब मोहम्मद हुसेन शुक्रवार को जेल से छूटेंगे ,,अपने लोगों के साथ ,,अपनों के बीच में होंगे ,,,,लोग खुशिया मना रहे है ,,,लेकिन मोहम्मद हुसेन उनके पीछे उनकी बस्ती में ,,उनके वार्ड में जो कुछ भी ज़ुल्म ज़्यादतियाँ हुई है ,,उन्हें देखकर वोह रो उठेंगे ,,अगर मोहम्मद हुसेन जेल में नहीं होते तो शायद इस तबाही को वोह रोक पाते ,,शायद वोह ऐसा सोचेंगे ,,,,जी हाँ दोस्तों ,,एक बस्ती मराठा बस्ती उनके सामने स्वाहा हुई ,,उस बस्ती में उन्होंने मदद की ,,,खुशिया लौटी ,,फिर उन्हें जेल जाना पढ़ा ,,बस बस्ती में नगर निगम की तोड़फोड़ शुरू हुई ,,लोगों को उजाड़ा जाने लगा ,,,,लोग मोहम्मद हुसेन के जांबाज़ जज़्बे के इन्तिज़ार में रहे ,,,,,अब मोहम्मद हुसेन ढाई माह की क़ैद से जब मुक्त होंगे और उनके पीछे से उनके वार्ड के गरीब लोगों के उजड़े हुए ,,टूटे हुए घर देखेंगे ,,उन्हें घर से बेघर रोते ,,बिलखते देखेंगे ,,तो वोह भी रो पढ़ेंगे ,,एक तरफ उनकी रिहाई की ख़ुशी होगी तो दूसरी तरफ उनके अपने वार्ड के निवासियों की उजड़ी हुई कहानी का उन्हें गम होगा ,,उनकी आँख में दुःख के आंसू होंगे ,,उनके छूटने की ख़ुशी नहीं ,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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