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21 दिसंबर 2015

रेपिस्ट की रिहाई के खिलाफ अर्जी खारिज: निर्भया के माता-पिता पहुंचे इंडिया गेट



 

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप केस के दोषी नाबालिग की रिहाई के खिलाफ पिटीशन खारिज कर दी है। पिटीशन दिल्ली वुमन कमीशन ने दायर की थी। निर्भया की मां ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि अब हमें इंसाफ कहां से मिलेगा? सोमवार शाम को वे अपने पति के साथ इंसाफ की मांग को लेकर इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रही हैं।
निर्भया के माता-पिता ने क्या कहा?
-इंडिया गेट पहुंचीं निर्भया की मां ने कहा है कि जुवेनाइल जस्टिस बिल को पास किया जाना चाहिए।
-निर्भया के पिता ने कहा कि इस मुद्दे पर केजरीवाल सिर्फ राजनीति कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों हुई सुनवाई?
- दरअसल, गैंगरेप के वक्त यह दोषी नाबालिग था। इसलिए तीन साल तक उसे जुवेनाइल करेक्शन होम में रखने की सजा सुनाई गई थी। यह सजा 20 दिसंबर को पूरी हो गई।
- आईबी की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि यह दोषी ‘रैडिकलाइज’ यानी कट्टर हो चुका है। इसलिए उसे रिहा नहीं किया जाना चाहिए।
- उसकी रिहाई के खिलाफ दिल्ली वुमन कमीशन ने शनिवार-रविवार की रात सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दायर की थी।
- इस पिटीशन में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी नाबालिग दोषी की रिहाई पर अंतरिम रोक लगाई जाए।
- इससे पहले, रेपिस्ट की रिहाई के खिलाफ बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की अर्जी हाईकोर्ट भी खारिज कर चुका था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कानून नहीं है, इसलिए हम किसी शख्स के जीने के हक को नहीं छीन सकते। उसे रोकने के लिए कानून के तहत प्रॉविजन होना चाहिए।
- अगर (दोषी का) रिफॉर्मेशन प्रोग्राम 7 से 10 साल तक चलता है, तो क्या हम उसे हिरासत में रख सकते हैं? ऐसा करने के लिए कानूनी प्रॉविजन कहां हैं?
- हम आपकी फिक्र से वाकिफ हैं। लेकिन हमारे हाथ मौजूदा कानून से बंधे हुए हैं। नाबालिग की हिरासत को तीन साल से ज्यादा करने के लिए साफ तौर पर कानूनी प्रावधान चाहिए। मौजूदा कानून के तहत हम उसे तीन साल से ज्यादा नहीं रोक सकते।
दिल्ली वुमन कमीशन की चीफ ने क्या कहा?
डीसीडब्लू की चेयरपर्सन स्वाति मालीवाल के मुताबिक, “आधे घंटे चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आपकी सारी चिंताएं समझते हैं, लेकिन कानून इतना कमजोर है कि हम चाहते हुए भी आपकी मदद नहीं कर सकते।”
फैसले पर क्या कहा निर्भया की मां ने?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिटीशन खारिज किए जाने के बाद निर्भया की मां ने मीडिया से कहा, "हमें कहां मिलेगा न्याय? अब हम बिल पास कराने के लिए संसद की ओर देख रहे हैं। जिन आरोपियों को इस मामले में फांसी मिली है, उन्हें जल्द फंदे पर लटकाया जाना चाहिए। अगर इस केस से देश ने सबक नहीं सीखा तो आगे भी कुछ नहीं हो सकेगा।"
बाहर निकलने से डर रहा था निर्भया का गुनहगार
- निर्भया का नाबालिग रेपिस्ट करेक्शन होम (सुधार गृह) से निकलने में डर रहा था। उसको लगता था कि बाहर निकलने पर लोग उसे मार डालेंगे। एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया।
- बता दें कि साल 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप केस में कुल छह लोग दोषी पाए गए थे। इनमें से एक ने तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी। बाकी दोषी जेल में हैं। आरोपियों में से एक घटना के वक्त नाबालिग था। उसे तीन साल करेक्शन होम में रखने के बाद रविवार रात रिहा कर दिया गया। उसकी रिहाई रोकने की अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी।
तीन साल बाद बाहरी दुनिया से डर
कुछ ही दिनों बाद यह रेपिस्ट 21 साल का होने जा रहा है। घटना के वक्त वह नाबालिग था। तीन साल उसने करेक्शन होम में बिताए हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोषी को डर है कि अगर वह करेक्शन होम से बाहर जाएगा तो नाराज लोग उसे मार डालेंगे। इसी डर की वजह से वह करेक्शन होम के बाहर नहीं जाना चाहता।
टीवी पर देखा देश का गुस्सा
सूत्रों के मुताबिक, नाबालिग दोषी इस केस से जुड़ी चीजों को टीवी पर देखता रहा है। जब उसे यह पता लगा कि उसकी रिहाई को लेकर लोगों में बहुत गुस्सा है तो वह बुरी तरह डर गया। उसे लगता है कि बाहर निकलने पर लोग उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।
पेन्टिंग और टेलरिंग में दिलचस्पी
- सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में वह पेन्टिंग और कपड़ों की सिलाई के काम में इंटरेस्ट दिखाता था। उसने करेक्शन होम में कुछ दोस्त भी बना लिए थे।
- जब रिहाई की बात सामने आई तो उसे लगा कि बाहर निकलकर एक नॉर्मल लाइफ गुजारेगा। लेकिन पिछले कुछ दिनों में उसकी लोकेशन कई बार बदली गई। इसके बाद उसका हौसला टूट गया है।
- रिफॉर्म होम के सूत्रों के मुताबिक, बीते तीन सालों में नाबालिग दोषी ने यहां के किसी कानून को नहीं तोड़ा।
आगे क्या होगा?
- रिहाई के बाद इस नाबालिग दोषी को दिल्ली के ही एक एनजीओ में रखा गया है।
- उसकी रिहाई पर रोक लगाने की पिटीशन दिल्ली हाईकोर्ट में खारिज किए जाने के बाद यह तय हो गया था कि उसे करेक्शन होम से रिहा किया जाएगा।
- पुलिस के मुताबिक, उसे एनजीओ में रखा जाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि बाहर निकलने पर उसकी जान को खतरा हो सकता है।
- हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को ऑर्डर दिए हैं कि वह दोषी की रिहैबिलटेशन के लिए एक प्लान तैयार करे।
- जब तक सरकार यह प्लान कोर्ट को नहीं सौंपती, तब तक दोषी एनजीओ के पास रहेगा।
- एनजीओ में रहने के दौरान उसे वोकेशनल ट्रेनिंग के साथ ही मेंटल हेल्थ इम्प्रूवमेंट से जुड़ी क्लासेस अटेंड करनी होंगी।
- एनजीओ के सूत्रों के मुताबिक, यहां उसे इस हिसाब से तैयार किया जाएगा कि वह बाहर निकलकर एक आम आदमी की तरह और अपने पैरों पर खड़ा होकर जिंदगी गुजार सके।
- एनजीओ में उस पर पूरे वक्त नजर रखी जाएगी।

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