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05 नवंबर 2015

यूथ पर फोकस? स्वयंसेवकों के लिए ड्रेस बदलने की तैयारी में है आरएसएस

यूथ पर फोकस? स्वयंसेवकों के लिए ड्रेस बदलने की तैयारी में है आरएसएस
नई दिल्‍ली. आरएसएस के स्वयंसेवक जल्द ही नई ड्रेस में नजर आ सकते हैं। संघ अपनी शाखाओं में पहने जाने वाली ट्रेडिशनल ड्रेस यानी हाफ खाकी निकर और व्हाइट स्लीव्स शर्ट में बदलाव करने जा रहा है। बताया जा रहा है कि संघ देश के युवाओं से खुद को जोड़ना चाहता है। इसी मकसद से वह ड्रेस में तब्दीली करना चाहता है। सूत्रों का कहना है कि नए ड्रेस कोड में ब्लैक ट्राउजर और व्हाइट टी-शर्ट शामिल किया जा सकता है। ड्रेस कोड पर पिछले हफ्ते रांची में हुई संघ की मीटिंग में चर्चा की गई थी। संघ प्रमुख मोहन भागवत और सह सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ड्रेस कोड में बदलाव के पक्ष में हैं।
इन दो ड्रेस कोड पर हो रहा है विचार
1. व्हाइट टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर। दोनों में से किसी भी एक कलर की कैप। व्हाइट कैनवास शूज और खाकी सॉक्स।
2. फुल स्लीव्स व्हाइट शर्ट। खाकी, नेवी ब्लू या ग्रे कलर की फुल पैंट। ब्लैक लेदर या रेक्सीन शूज। खाकी सॉक्स। कैनवास बेल्ट और ब्लैक कैप।
ड्रेस कोड में बदलाव पर क्या कहना है संघ नेताओं का?
अब तो बच्चे भी निकर नहीं पहनते-राम माधव
RSS के वरिष्ठ प्रचारक और अब बीजेपी महासचिव राममाधव ने कहा- संघ के ड्रेसकोड में बदलाव वक्त की मांग है। पहले संघ का असर महाराष्ट्र में ज्यादा था अब नॉर्थ इंडिया में हो गया है। वहां सर्दी ज्यादा पड़ती है। संघ की शाखाएं सुबह-सुबह लगती हैं। ऐसे में तीन महीने तक तो कोई भी निकर पहनकर नहीं आता। इसलिए निकर की जगह ट्राउजर करने का विचार है। राम माधव का कहना है कि अब तो बच्चे भी निकर पहनकर स्कूल नहीं जाते इसलिए संघ को ड्रेसकोड बदलना चाहिए। संघ के ड्रेसकोड में बदलाव के बारे में संघ प्रचारक राकेश सिन्हा ने कहा है कि 2010 में लेदर बेल्ट को बदला गया था। बदलाव वक्त-वक्त पर होते रहे हैं। रएसएस से जुड़ रहे हैं।
अगले साल मार्च में होगा बदलाव - मनमोहन वैद्य

आरएसएस के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य का कहना है कि ड्रेस कोड में बदलाव पांच साल पहले ही होना था। लेकिन आम सहमति नहीं बन पाने के चलते इसे टाल दिया गया था। वैद्य का कहना है कि मार्च 2016 में होने वाली संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस बारे में फैसला लिया जाएगा। वैद्य ने बताया कि हर तीन साल में यह बैठक नागपुर मुख्यालय में होती है। जबकि बाकी के दो साल नॉर्थ इंडिया और साउथ इंडिया में होती है। इस बार यह बैठक राजस्थान के नागौर जिले में होगी।
कितनी ड्रेस की होगी जरूरत?
> संघ की देशभर में 50,000 शाखाएं हैं और हर शाखा में 10 स्वयंसेवक हैं। ऐसे में 5 लाख नई ड्रेस की जरूरत है।
> आरएसएस के ड्रेस कोड में आखिरी बार 2010 में बदलाव किए गए थे। लेदर बेल्ट की जगह कैनवास बेल्ट लाया गया था। संघ प्रचारक के मुताबिक, कैनवास बेल्ट को इम्प्लीमेंट करने में दो साल का समय लग गया था।
कब-कब हुए ड्रेस कोड में बदलाव?
> संघ के गठन के वक्त साल 1925 से लेकर 1939 तक संघ की ड्रेस पूरी तरह खाकी थी।
> 1940 में व्हाइट फुल स्लीव्स वाली शर्ट लागू की गई।
> 1973 में लेदर शूज की जगह लॉन्ग बूट शामिल किए गए। हालांकि, रेक्सीन के शूज का भी ऑप्शन रखा गया था।
> 2010 में बदलाव हुआ। तब लेदर बेल्ट की जगह कैनवास बेल्ट लाया गया।
बदलाव पर अलग-अलग सुर
रांची में हुई संघ की बैठक में बड़े नेता ड्रेस कोड में बदलाव के समर्थन में नजर आए, वहीं कुछ पुराने प्रचारकों ने इसका विरोध भी किया है। पुराने स्वयंसेवक हाफ पैंट को हटाए जाने के खिलाफ हैं। उनका तर्क है कि संघ की शाखाओं में फिजिकल ट्रेनिंग भी दी जाती है। ऐसे में, फुल पैंट के इस्तेमाल से इसमें परेशानी आएगी। इससे पहले भी संघ के ड्रेस कोड में बदलाव को लेकर विचार किया जा चुका है। लेकिन संघ में खास प्रभाव रखने वाले महाराष्ट्र के नेताओं ने इस बदलाव का विरोध किया था।

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