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12 अक्तूबर 2015

जो तुमको हो पसंद

जो तुमको हो पसंद
वही बात हम कहेंगे
कोई परवाह नहीं
लोग अगर हमे तुम्हारा
ज़र खरीद गुलाम कहेंगे
तुम घमंडी हो तब भी
तुम्हे अखलाक़ वाला कहेंगे
तुम्हारी झिड़कियों को भी अब हम
लाजवाब लाजवाब कहेंगे
हम यही सब करेंगे तभी तो
हम आपकी पसंद बनेगे
इसी आदत पर लोग भी हमे
बढ़े अदब से सियासी कहेंगे ,,
जो तुमको हो पसंद ,,,,,,,,,,,,,अख्तर

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