हमें चाहने वाले मित्र

21 सितंबर 2015

वापस मेरे,,,,,,,,,,,,,


ज्यादा की ख्वाहिश नहीं,बस
वापस मेरे अरमान चाहिए साहब
उड़ना चाहा था कभी मैंने भी,बस
मुझे अब वही उड़ान चाहिए साहब
हक़ ही माँगा है मैंने अपना,बस
मुझे मेरी पहचान चाहिए साहब
घुट कर जीना बहुत हो गया,बस
वापस मेरी अब जान चाहिए साहब
सब सहते सहते खो गई जो,बस
वो ही मेरी मुस्कान चाहिए साहब

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...