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21 सितंबर 2015

डाक टिकिट से भले हटा दो दिलों से कैसे हटाओगे ....

डाक टिकिट से भले हटा दो
दिलों से कैसे हटाओगे ।
कम कर दो इस अंहकार को
वरना खुद ही हट जाओगे ।।
इंदिरा और राजीव जी
परिचय के मोहताज नहीं
जन-जन के वो नेता थे
वो कोई हवा बाज नही
सौ-सौ गोली खाई थी
इंदिरा ने अपनी छाती पर
आंच नहीं आने दी उसने
भारत देश की ख्याति पर
विश्व पटल पर भारत का
तब क्यों इतना सम्मान था
दुर्गा रूप कहा अटल ने
यह इंदिरा का मान था
हर बूँद आएगी काम देश के
मेरे तो इस खून की ।
मरने से पहले बोली थी वह
तारीफ़ है उसके जूनून की
मर कर भी नाम अमर है उसका
वह तो इंदिरा गांधी थी ।
नारी रूप होकर भी
वह तूफ़ान और आंधी थी ।
उसी का अंश था राजीव
तुम उसको क्या भुलाओगे
डाक टिकिट से भले हटा दो
दिलों से कैसे हटाओगे
कंप्यूटर , संचार क्रान्ति
वो ही देश में लाया था
वो मासूम सा चेहरा
हर देशवासी को भाया था
जिस दिन हत्त्या हुई थी उसकी आसमान भी रोया था ।
उसके खून के छीठों को
बरस बरस कर धोया था ।।
युगों युगों तक नाम रहेगा
राजीव का इस भारत में
कागज पर छोड़ो, दिलों में है
अंकित स्वर्णिम इबारत में
ऐसी महान विभूतियों को
तुम जैसे क्या भुलाओगे
डाक टिकिट से भले हटा दो
दिलों से कैसे हटाओगे ....

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