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18 सितंबर 2015

नेताजी ही नहीं, उनके खजाने को लेकर भी सस्पेंस बरकरार, क्या उठेगा पर्दा?



नेताजी ही नहीं, उनके खजाने को लेकर भी सस्पेंस बरकरार, क्या उठेगा पर्दा?
नई दिल्ली. नेताजी सुभाषचंद्र बोस से जुड़ीं 64 फाइलें पश्चिम बंगाल सरकार ने सार्वजनिक कर दी हैं। उम्मीद है कि इन फाइलों के जरिए नेताजी की मौत के राज से पर्दा उठ सकेगा। लेकिन सिर्फ नेताजी ही नहीं, बल्कि उनके पास तब मौजूद रहे खजाने को लेकर भी सस्पेंस बरकरार है। पीएमओ और विदेश मंत्रालय के पास मौजूद कुछ गोपनीय फाइलें बताती हैं कि नेताजी के पास 1945 में 2 करोड़ रुपए कैश और 80 किलोग्राम सोना था। इसकी वैल्यू मौजूदा दौर के हिसाब से 700 करोड़ रुपए थी। 20वीं शताब्दी में आजादी के लिए लड़ रहे किसी भारतीय नेता के पास यह सबसे बड़ा खजाना था। लेकिन आरोप है कि प्लेन क्रैश में नेताजी की संदिग्ध मौत के बाद इस खजाने को कुछ लोगों ने गायब कर दिया। इस राज से आज तक पर्दा नहीं उठ पाया है। dainikbhaskar.com आपको बता रहा है उस खजाने की कहानी...।
नेताजी के पास कैसे इकट्ठा हुआ था खजाना?
अंग्रेजों से भारत को आजाद करने के लिए नेताजी देश के बाहर से लड़ाई लड़ रहे थे। उन्होंने जापान की मदद से आजाद हिंद फौज भी बना ली थी। तभी दूसरा वर्ल्ड वॉर छिड़ चुका था। नेताजी चाहते थे कि अगले कुछ साल उन्हें पैसों के लिए किसी सरकार का सहारा न लेना पड़े। जनवरी 1945 में नेताजी के जन्मदिन पर बर्मा में कई लोगों ने खुलकर दान दिया। इस दान में भारतीय महिलाओं ने ज्वेलरी दी थी। कई अमीर उद्योगपतियों ने पैसा और सोना आजाद हिंद फौज के लिए दिया था।
नेताजी ने खजाना अपने पास क्यों रखा था?

अगस्त 1945 में सेकंड वर्ल्ड वॉर के वक्त जापान ने अलाइड फोर्सेस के आगे घुटने टेक दिए। नेताजी की फौज के 40 हजार जवानों को भी सरेंडर करना पड़ा। 1945 में ब्रिटिश पीएम विंस्टन चर्चिल नेताजी को देखते ही दीवार के सहारे खड़ाकर गोली मार देने का ऑर्डर जारी कर चुके थे। इस वजह से नेताजी अपना बेस शिफ्ट करना चाहते थे। यही कारण है कि वे रंगून से ताइवान जा रहे थे। ताइवान से उनकी रूस जाने की प्लानिंग थी। आगे की प्लानिंग के मकसद से नेताजी ने 1956 में अपनी बनाई आजाद हिंद बैंक से 1 करोड़ रुपए कैश निकाला और 17 सीलबंद बक्सों में सोने की ईंटें निकालकर अपने पास रखी थीं।
1945 में ताइवान क्यों जा रहे थे नेताजी?
इंडिया टुडे ग्रुप ने नेताजी से जुड़ीं पीएमओ और विदेश मंत्रालय की फाइलें एक्सेस की थीं। अपनी रिपोर्ट में इंडिया टुडे ने दावा किया कि नेताजी 1945 में रंगून में थे। यहां उनकी बनाई इंडियन नेशनल आर्मी का हेडक्वार्टर था। इसे आजाद हिंद फौज भी कहते थे। अगस्त 1945 में नेताजी यहां से खजाना साथ लेकर रवाना हुए। वे पहले बैंकॉक गए। फिर वहां से सड़क के रास्ते ही सिंगापुर गए। सिंगापुर में वे कुछ महीने रुके। उनके साथ सोना था, जो भारतीयों ने उन्हें देश की आजादी की लड़ाई में मदद के लिए दिया था। नेताजी ने बाद में वियतनाम के सायगॉन में खजाने का बड़ा हिस्सा छोड़ दिया। इसके बाद वे डा नेंग से ताइवान के लिए प्लेन में रवाना हुए। लेकिन दावा किया जाता है कि रास्ते में उनका प्लेन क्रैश हो गया। उनके साथ प्लेन में 18 इंच की दो सूटकेस थीं। बताया जाता है कि इसमें सोना था।
कितना था नेताजी के पास खजाना? मौत के बाद कितना मिला?
जनवरी 1945 में बर्मा में नेताजी के जन्मदिन पर आजाद हिंद फौज के लिए भारतीयों ने दिल खोलकर दान दिया था। एस ए अय्यर और रामा मूर्ति को नेताजी की मौत के बाद में यह सोना मिला।
80 किलोग्राम सोना और 2 करोड़ रुपए कैश नेताजी के पास था। नेताजी की मौत के बाद सिर्फ 11 किलोग्राम सोना पाया गया।
इसमें ज्वेलरी, सोने के सिक्के और ईंटें भी शामिल थीं। यह सब आजाद हिंद बैंक में जमा कराया गया था। इसमें जली हुई अंगूठियां, पिनें और गले के कुछ हार थे।
मौजूदा दौर के मुताबिक इस खजाने की वैल्यू 700 करोड़ रुपए मानी गई है। अय्यर और मूर्ति पर नेताजी के खजाने की हेराफेरी का आरोप था।
किस पर था नेताजी के खजाने को लूटने का शक?
1. एसए अय्यर, नेताजी की आजाद हिंद गवर्नमेंट में पब्लिसिटी मिनिस्टर रहे।
2. एम रामा मूर्ति, टोक्यो में इंडियन इंडिपेंडेंस लीग के हेड, नेताजी के करीबी।
सितंबर 1945 में अय्यर और मूर्ति को ही आखिरी रस्म के तौर पर नेताजी की अस्थियां दी गई थीं। दावा है कि इसी के साथ उन्हें वह सोना भी सौंपा गया था जो आखिरी वक्त में नेताजी के पास था। अय्यर के बेटे और आर्मी से रिटायर्ड ब्रिगेडियर ए. त्यागराजन का कहना है कि उनके पिता पर लगे खजाने की हेराफेरी के आरोप बेबुनियाद हैं। उनके पिता के पास नेताजी से जुड़ा कोई सोना नहीं था। वहीं, मूर्ति के भाई जे. मूर्ति के बेटे आनंद मूर्ति भी आरोपों से इनकार करते हैं।
1947 के बाद नेताजी के खजाने को लेकर क्या हुए थे दावे?

नेताजी के खजाने से जुड़ी कहानी ताइवान प्लेन क्रैश पर ही खत्म नहीं हुई। कई डिप्लोमैट्स ने तब की नेहरू सरकार को खत लिखे और आरोप लगाया कि नेताजी के कुछ करीबी लोगों ने ही उनके खजाने के साथ हेराफेरी की है।
- नवंबर 1947 : टोक्यो में भारत के पहले इंडियन लायसन मिशन के हेड रहे बेनेगल रामा राव ने नेहरू सरकार को खत लिखा। उन्होंने आरोप लगाया कि नेताजी के खजाने और उनके साथ आखिरी वक्त तक मौजूद रहे बेशकीमती सामान के साथ रामा मूर्ति ने हेराफेरी की है।

- मई 1951 : टोक्यो में ही इंडियन लायसन मिशन के हेड रहे के.के. चेट्टूर ने लिखा कि नेताजी के खजाने के अचानक गायब हो जाने में उनके करीबी रहे रामा मूर्ति और अय्यर की कोई न कोई भूमिका है।

- 1952 : दिल्ली में विदेश मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी रहे आरडी साठे ने नेहरू सरकार को बताया कि नेताजी के पास जो खजाना था, वह उनके अपने वजन से ज्यादा था। ऐसे में उनकी मौत के बाद उनके खजाने के बाद क्या हुआ होगा, यह राज है। इसकी जांच होनी चाहिए।

- 1955 : टोक्यो में भारत के राजदूत रहे एके डार ने नेहरू सरकार को भेजे लेटर में कहा- सरकार को सार्वजनिक तरीके से यह जांच करानी चाहिए कि नेताजी के खजाने को गायब करने वाले लोग कौन हैं? उन्होंने कहा कि 10 साल भारत ने गंवा दिए।

- 1956 : नेताजी के लापता होने की जांच के लिए बनी शाहनवाज कमेटी ने आजाद हिंद फौज के गायब हुए खजाने के लिए अलग से जांच कराने की सिफारिश की।

- 1957 : बैंकाॅक में इंडियन इंडिपेंडेंस लीग के हेड रहे देवनाथ दास ने शाहनवाज कमेटी को बताया कि नेताजी ने 1956 में आजाद हिंद बैंक से 1 करोड़ रुपए कैश और 17 सीलबंद बक्सों में सोने की ईंटें निकालकर अपने पास रखी थीं।

- 1971 : नेताजी से जुड़े राज की जांच के लिए बने जस्टिस जीडी खोसला के कमिशन के सामने दो गोपनीय लोगों ने गवाही दी। उन्होंने बताया कि नेताजी का खजाना उनकी मौत के तुरंत बाद हड़प लिया गया था। इसमें रामा मूर्ति अौर उनके भाई जे. मूर्ति की भूमिका हो सकती है।

- 1978 : मोरारजी देसाई की सरकार ने 18 पेज का सीक्रेट नोट तैयार किया था। इसमें नेताजी के करीबी कुंदन सिंह के हवाले से बताया गया था कि नेताजी के पास चार बड़े बक्सों में ज्वेलरी थी जो भारतीय महिलाओं ने उन्हें अंग्रेजों से जंग लड़ने के लिए दान में दी थी।
नेहरू सरकार पर क्या लगे आरोप?
- मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि डिप्लोमैट्स की जानकारी को पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने नजरअंदाज कर दिया था।
- 1952 में नेहरू यह एलान भी कर दिया कि ताइवान में प्लेन हादसे में नेताजी की मौत हो चुकी है।
- यही नहीं, 1953 में अय्यर को नेहरू सरकार की पंचवर्षीय योजना में पब्लिसिटी एडवाइजर अपॉइंट किया गया।
- डिक्लाइसिफाई होने के बाद नेशनल आर्काइव्स में रखी गईं फाइल्स बताती हैं कि नेहरू सरकार ने 1947 से 1968 तक नेताजी के परिवार की जासूसी भी करवाई।
नेताजी की फाइलों को लेकर क्या है स्थिति?

- नेताजी से जुड़ी 37 सीक्रेट फाइल्स पीएमओ में हैं।
- नेताजी के पड़पोते सूर्य कुमार बोस का दावा है कि 1945 से लेकर अब तक नेताजी से जुड़ी 150 से ज्यादा सीक्रेट फाइल्स सरकार के पास हैँ जिन्हें जानबूझकर पब्लिक नहीं किया जा रहा है। नेताजी के परिवार का कहना है कि अगर ये फाइलें पब्लिक हो जाएं तो आजाद भारत के गुनगहारों का पर्दाफाश हो जाएगा।
- पश्चिम बंगाल सरकार ने उसके पास मौजूद 64 फाइलें शुक्रवार को पब्लिक की हैं।

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