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28 सितंबर 2015

सूरज के साथ घूमती है गुंबद पर लगी मछली, अंदर 'कैद' हैं राम-जानकी



चंद्रखुरी में स्थित राम-जानकी मंदिर, जिस पर लगा है ताला।
चंद्रखुरी में स्थित राम-जानकी मंदिर, जिस पर लगा है ताला।
रायपुर। राजधानी से करीब 40 किलोमीटर दूर चंद्रखुरी गांव के राम-जानकी मंदिर के गुंबद पर बनी मछली का मुंह दिनभर सूरज के साथ-साथ घूमता है, बिल्कुल सूर्यमुखी फूल की तरह। इसी कथित चमत्कार के कारण आसपास के गांवों की इस मंदिर में बड़ी आस्था रही है। लेकिन बरसों तक भक्तों को तकलीफों से छुटकारा दिलाने वाले राम-जानकी अब खुद वहां कैद होकर रह गए हैं।

सौ साल से भी ज्यादा पुराने इस मंदिर में पिछले 18 सालों से ताला लटका हुआ है। मंदिर में पूजा-पाठ और साथ ही रेग्युलर मेंटेनेंस भी बंद है। नतीजतन, कभी इलाके में धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा यह मंदिर अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगाने वाले महेश बैस रायपुर के भाजपा सांसद रमेश बैस के करीबी रिश्तेदार हैं। उन पर मंदिर और उससे लगी 71 एकड़ जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने का आरोप है।
आस्था कायम, सीढ़ियों पर होती है पूजा
ये तो ग्रामीणों की आस्था है कि उन्होंने मंदिर को छोड़ा नहीं है और वे उसके मुख्य द्वार के बाहर सीढ़ियों पर ही राम-जानकी की पूजा कर लेते हैं। नरसिंह प्रसाद उपाध्याय अब भी खुद को उस मंदिर का पुजारी मानते हैं। गांव के पंचपति संतोष कुमार सेन का कहना है कि मंदिर के बंद होने से लोग दुखी जरूर हैं, लेकिन उनकी आस्था कम नहीं हुई है।
संतान-प्राप्ति के लिए जमींदार ने करवाया था निर्माण
मंदिर में उपलब्ध शिलालेखों के मुताबिक, इसका निर्माण विक्रम संवत् 1973 में तात्कालीन जमींदार नारायण स्वामी नायडू ने करवाया था। मंदिर के पुजारी नरसिंह प्रसाद उपाध्याय के बेटे लुम्बेश्वर प्रसाद उर्फ मुन्ना महाराज ने बताया कि जमींदार के शादी के काफी साल बाद कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने अपने इष्टदेव राम से प्रार्थना की।

महाराज के मुताबिक, एक रात जमींदार के स्वप्न में भगवान ने आकर उन्हें राम-जानकी मंदिर बनवाने को कहा। बताते हैं कि मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के साल भर के भीतर जमींदार को एक बेटी हुई जिसका नाम लक्ष्मी रखा गया।
जमींदार ने राम-जानकी मंदिर बनवाने के बाद मंदिर और उससे लगी 71 एकड़ जमीन गांव को दान कर दी थी। आज भी यह जमीन राजस्व पटवारी के नक्शे में गोठान (घास की जमीन) के रूप में दर्ज है।
सूर्यमुखी की तरह घूमती है मछली
राम-जानकी मुख्य मंदिर चारों ओर से अलग-अलग देवी-देवताओं के मंदिरों से घिरा है। इनमें शिव, बजरंगबली, लक्ष्मी देवी, गणेश के मंदिर शामिल हैं। मंदिर का निर्माण वास्तुशास्त्र के मुताबिक चतुष्कोणीय श्रेणी में किया गया है।
इसकी स्थापत्य कला क्षेत्र में लंबे समय तक राज करनेवाले काकतीय वंशों की निर्माण शैली से प्रभावित है। मंदिर के गुंबद का निर्माण पुरी के जगन्नाथ मंदिर की याद दिलाता है, जिसपर सबसे ऊपर मछली और फिर उसके नीचे दिशा सूचक यंत्र लगा है। खास बात यह है कि यह मछली सूरज के साथ अपनी दिशा बदलती रहती है। मंदिर के पुजारी और ग्रामीणों के मुताबिक, सूर्योदय के वक्त मछली का मुंह पूरब की ओर जबकि सूर्यास्त के वक्त पश्चिम दिशा की ओर होता है। गुंबद के बीच में चक्र और नीचे एक नाव की आकृति भी बनी है।
दान की जमीन पर बुरी नजर!
मुन्ना महाराज के मुताबिक, आंध्रप्रदेश के काकीनाड में ब्याही गई जमींदार की बेटी लक्ष्मी पिता की मौत के बाद मंदिर की देखरेख करने कभी-कभार गांव आ जाया करती थी। मुन्ना ने बताया कि 1996 में लक्ष्मी की भी मौत हो गई और उसके एक साल बाद 1997 में महेश बैस ने मंदिर पर ताला लटका दिया। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, महेश अपनी राजनीतिक पहुंच के बदौलत दान की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।
खो रही गांव की पहचान
रामनवमी, नवरात्र, होली और दीपावली के मौके पर गांव के राम-जानकी मंदिर परिसर में मेला लगता था। उप सरपंच दीना नाथ साहू ने बताया कि रामनवमी पर तीन दिन और नवरात्रि पर दस दिनों तक मेला लगता था। गांव में रथयात्रा का भी आयोजन होता था। ग्रामीण रामनाथ वर्मा ने बताया कि राम-जानकी मंदिर बंद हो जाने के कारण गांव की पहचान लगभग खोती जा रही है।

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