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10 सितंबर 2015

तुम सच

तुम सच
में झूंठ
तुम वफ़ा
में बेवफा
तुम खूबसूरत
में बदसूरत
तुम अमीर
में गरीब
तुम चाँद
में चाँद तकने वाला
तुम ईमानदार
में ईमान
फिर भी
मुझे तो
तुम से प्यार है
मुझे तो
तुम से प्यार था
मुझे तो
तुमसे प्यार रहेगा
तुम्हारे लिए तो
मेने कई
बहाने कई रास्ते
लिख दिए है
तुम मिलो
या ना मिलो
तुम मुझे चाहो
या ना चाहो
लेकिन फिर भी
हो सके तो
एक पल एक क्षण
ज़रा भूल के
बताना तो सही ,,,,,अख्तर

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