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05 अगस्त 2015

मध्यप्रदेश सरकार में एक सुचना आयुक्त आत्मदीप

सुचना का अधिकार जिसे विधिक रूप से प्राप्त करने के लिए आम आदमी से लेकर ,,समाजसेवी ,,पत्रकारों सहित हर वर्ग की क़ुरबानी की भूमिका रही है ,,आज देश भर में शो पीस के रूप में सुचना का अधिकार तो है लेकिन अगर ,,मगर ,,किन्तु ,,लेकिन परन्तु के भ्रमजाल में नौकरशाहों ने इस क़ानून और अधिकार को उलझा कर रख दिया है ,,लेकिन दोस्तों मध्यप्रदेश सरकार में एक सुचना आयुक्त आत्मदीप ऐसे है जिन्होंने इस क़ानून की आत्मा को समझा ,,जाना और वोह खुद स्वमेव जागरूकता कार्यक्रम चलाकर सुचना के अधिकार अधिनियम के हक़ को दिलाने के लिए घर घर दस्तक देकर पीड़ित लोगों को न्याय दे रहे है ,,,,जी हाँ दोस्तों में बात कर रहा हूँ राजस्थान ,,खासकर कोटा संभाग में झालावाड़ ज़िले के सुनेल क़स्बे में एक सैद्धांतिक पिता के नुत्फे से जन्मे संवेदनशील आत्मा ,आत्मदीप की जो बाद में पत्रकारिता की दुनिया में निष्पक्ष ,,निर्भीक और खोजपूर्ण रिपोर्टिंग के कारण पत्रकारिता के सिरमौर हुएं ,,राजस्थान में कोई मुख्यमंत्री हो उनसे विनम्र मुस्कुराहट के साथ राजस्थान के पत्रकारों के हक़ के लिए संघर्ष आत्मदीप की पहचान रही है ,, राजस्थान में फिर हिन्दुस्तान में अखिलभारतीय स्तर पर पत्रकारों के हक़ के संघर्ष के लिए जार का गठन कर आत्मदीप जार के फाउंडर बने और जार एक अकेला पत्रकारों का ऐसा संगठन बना जो पत्रकारों के लिए मालिकों से संघर्ष कर उन्हें उनका हक़ दिलवाने के लिए संघर्षशील रहता इस संगठन को सरकार से कार्यालय भी उपलब्ध करवाया गया ,,, आत्मदीप और मेने दोनों ने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत कोटा के दैनिक धरती करे पुकार अख़बार से की और इसी लिए इस धरती पर हर वर्ग ,,,हर समाज के लिए संघर्ष का निर्भीकता और निडरता से संघर्ष का जज़्बा पैदा हुआ ,,निर्भीक ,,,निष्पक्ष,, क़लम के अलम्बरदार बने ,,पिता का स्वभाव संघ से जुड़ा था इसलिए संघ के आदर्श ,,संघ का स्वाभिमान ,,संघ के सेवाभाव का जज़्बा ,,बुराई के खिलाफ संघर्ष की सीख ने आत्मदीप को तपाकर कुंदन बना दिया ,,,फिर एक शख्सियत जो अपने पिता के आदर्श के साथ साथ पत्रकार ओमनारायण जैसे निर्भीक लेखक ,,पियूष जेन कॉमरेड पत्रकार के साथ रहकर काम कर रहा हो ऐसे में मज़दूरों का गरीबों का दर्द समेटने का जज़्बा इस शख्सियत के लिए आम बात हो गयी ,,,,,,,,,आपातकाल का संघर्ष भी आत्मदीप ने अपने पत्रकारिता के काल में देखा है , मुझ सहित कई पत्रकारों को जब अख़बार प्रकाशन के पहले साइकल लेकर कलेक्ट्रेट में जो प्रकाशित किये जाने वाला है उसका प्रूफ अनुमोदित कराने उस पर पूर्व स्वीकृति के हस्ताक्षर लेने के लिए जाना पढ़ता था तब इस बंधन ,,पत्रकारिता की आज़ादी की इस घुटन के अहसास को भाई आत्मदीप ने महसूस किया और उससे बहुत कुछ सीखा ,,,आत्मदीप जिसके रोम रोम में पत्रकारिता हो ,,लेखन हो ,,संवेदनशीलता ,,न्यायिक बुद्धि का अनुभव हो ,चेहरे पर मुस्कुराहट ,,स्वभाव में निर्मलता ,विनम्रता हो ,,लोगों के लिए मदद का जज़्बा हो तो ऐसी शख्सियत को इस दुनिया में इंसान से फरिश्ता बनाये जाने के लिए काफी समझा जाता है ,,राजस्थान सहित कई महत्वपूर्ण राज्यों के हर तरह की रिपोर्टिंग और सम्पादन के अनुभव के बाद आत्मदीप जब मध्यप्रदेश पत्रकारिता के लिए गए तो वहां इनकी कार्यशैली ,,,,इनकी क़ाबलियत ,,इनका अनुभव ,,,इनकी निर्णायक क्षमता ,, निष्पक्षता ,,निर्भीकता को ध्यान में रखकर इनके समक्ष मध्यप्रदेश सरकार ने इन्हे सुचना आयुक्त मध्यप्रदेश सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा ,,,,थोड़ा सोचा ,,समर्थकों ,,मित्रो से मशवरा किया लेकिन खोजपूर्ण पत्रकारिता को नए आयाम देने ,,,आम जनता को उनका हक़ दिलवाने ,,सरकारी संस्थाओ से भ्रष्टाचार समाप्त करने के संकल्प के साथ आत्मदीप को मंत्री दर्जा देकर सुचना आयुक्त बनाया गया ,,,,बहुत कठिन ,,बहुत मुश्किल चुनौती थी ,,न्याय का मामला था एक जज की भूमिका ,,एक इन्साफ का तराज़ू हाथ में दिया गया था ,,एक तरफ पद देने वाली सरकार दूसरी तरफ सुचना के अधिकार को तरसती जनता थी ,,,आत्मदीप ने सुचना के अधिकार के इन्साफ के लिए पीड़ित जनता को चुना और जनता के हक़ में अटके हुए फैसलों को त्वरित सुनवाई कर ,,उनके फैसले पारदर्शिता के साथ ,,बहुपक्षीय सुनवाई के नियम के साथ चमत्कारिक फैसले करना शुरू किये ,,सुचना आयुक्त कार्यालय में आप नियमित दफ्तर में बैठते है ,,सुनवाई करते है ,,इजलास लगाते है ,,कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की बढ़ी बढ़ी हस्तियां जो सुचना के अधिकार को कुचलना चाहती है उन्हें तलब करते है सुनवाई का मौक़ा देकर ऐसे हठधर्मी अधिकारीयों को कठोर दंड भी सुनाते है ,,,आत्मदीप की आत्मा न्यायिक संवेदनशीलता के साथ पत्रकारिता का स्वभाव भी रखती है इसलिए वोह हर पत्रावली ,,हर शिकायत को संवेदनशीलता ,,खोजपूर्ण निगाह और विधिक प्रावधानों के तहत देखते है ऐसी शिकायते जो फ़र्ज़ी और परेशान करने के लिए होती है उन शिकायतों को आत्मदीप कोस्ट लगाकर खारिज भी करते है ,,,एक तरफ तो आत्मदीप उन अधिकारयों के खिलाफ कठोर ऐतिहासिक फैसले त्वरित सूना रहे है जो सुचना के अधिकार अधिनियम का उलंग्घन कर रहे है दूसरी तरफ वोह ऐसे फ़र्ज़ी ,,ब्लेकमेलर शिकायतकर्ताओं को भी सबक सीखा रहे है जिन्होंने इसे व्यवसाय बना लिया है ,,जो इन्साफ का तराज़ू इन्हे दिया गया उसे बराबर के इंसाफाना तराज़ू में तोलकर आत्मदीप ने खुद को देश भर के सभी सुचना आयुक्तों में खुद को आकाश कर लिया है ,,,,,,,,,,,,आत्मदीप का स्वभाव है इन्साफ त्वरित हो ,,सस्ता हो ,,,फैसले की पालना हो और इन्साफ होना तो चाहिए ही लेकिन इन्साफ हो रहा है दिखना भी चाहिए ताकि अपराध के पहले ही अपराधियों में हड़कम्प का माहोल रहे ,,,इसीलिए आत्मदीप सुचना आयुक्त की हैसियत से विकेंद्रीकरण नीति के तहत इनके कार्यक्षेत्र के हर ज़िले में ,,क़स्बे में केम्प लगाकर दर्ज मामलों की सुनवाई करते है ,,,नए मामले दर्ज कर नोटिस जारी करते है ,,इनका यह प्रयोग देश भर में पहला प्रयोग है जिसे देश भर के सुचना आयुक्त ,,पत्रकारों ,,समाजसेवकों और सुचना के अधिकार अधिनियम के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के लिए प्रशंसनीय बन गया ,,आत्मदीप थकते नहीं ,,काम करते रहना चाहते है वोह अभी भी सुचना का अधिकार आम जनता तक नहीं पहुंच पाने के कारण चिंतित है और इसीलिए उन्होंने एक नया प्रयोग एक नई कार्यवाही शुरू कर मोबाइल ,,वेबसाइट पर शिकायत का पंजीयन कर इसी माध्यम से सुनवाई कर त्वरित निर्णय का प्रयोग शुरू किया है जो सार्थक और सफल हों रहा है ,,,,,,देश भर के लोग कहते है आत्मदीप अगर मध्यप्रदेश शासन में सुचना आयुक्त न होते तो मध्यप्रदेश का सुचना आयुक्त विभाग पुरे भारत में अपनी त्वरित और निष्पक्ष ,,निर्भीक ,,न्यायिक कार्यशैली के लिए विशिष्ठ पहचान नहीं बना पाता ,,लेकिन आत्मदीप के कार्यकलापों ,सुझावों ,,कार्यशैली से मध्यप्रदेश सरकार का सुचना आयुक्त विभाग देश भर में पारदर्शिता ,,त्वरित प्रकरण निस्तारण ,,आम जन में जागरूकता अभियान में अव्वल हो गया है और इसीलिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ चाहे जितने भी गंभीर आरोप हो लेकिन सुचना के अधिकार क्षेत्र में त्वरित न्याय ,,संवेदनशीलता ,,पारदर्शिता ,,और निष्पक्षता के कारण वहां की आम जनता शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ गंभीर आरोपों के बाद भी कोई भी आरोप स्वीकार करने को तैयार नहीं है क्योंकि जनता का सवाल है ,,,, जो मुख्यमंत्री सुचना का अधिकार अव्वल रूप से दे सकता है वोह भ्रष्ट कैसे हो सकता है ,,,भाई आत्मदीप को सलाम सेल्यूट ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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