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12 अगस्त 2015

मुझे यूँ ही

अच्छा हुआ
जो छोड़ दिया तुमने
मुझे यूँ ही
बिना किसी वजह के
वरना
तुम्हारी बेवफाई
जो तुम्हारी फितरत है
तुम्हारी चालबाजियां
जो तुम्हारी पहचान है
तुम्हारी वायदा खिलाफी
जो तुम्हारी आदत है
अगर तुम
मुझ से वफ़ा करते
अगर तुम
मुझ से किये गए वायदे निभाते
सच तुम्हारी फितरत
तुम्हारी बेवफाई की खसलत
बेवजह बदनाम होती
बेवजह बदनाम होती
अच्छा हुआ जो तुमने
मंझधार में
मुझ से बेवफाई की
वर्ना यूँ ही बेवजह
फितरत तुम्हारी बदनाम होती ,,,,अख्तर

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