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20 जुलाई 2015

दिल का सुकून ,, आराम ,,और लोगो के दिलों को नहीं जीता जा सकता

गुंडागर्दी ,,लूटपाट ,,अवैध चौथवसूली ,,भाईगिरी से डॉन बनकर लोगों के दिलों में दहशत पैदाकर खुद को भाईसाहब या भाईजान तो कहलवाया जा सकता है ,,करोड़ों करोड़ रूपये और सुविधाये खरीदी जा सकती है ,,लेकिन दिल का सुकून ,, आराम ,,और लोगो के दिलों को नहीं जीता जा सकता ,,बुरे काम का बुरा अंजाम होता है या जेल या फिर मोत ,,,,,,लेकिन यह भाईगिरी जन्म से पैदा नहीं होती समाज की नाइंसाफी ,,मनमानी ही भाईगिरी की जनक होती है और जो समाज जिस व्यक्ति को तुच्छ समझकर उसका शोषण करता है उसके भाईगिरी में आने के बाद वही समाज उस भाई के इशारे पर कत्थक करता है ,,उसकी तारीफे करता है ,,जी हाँ दोस्तों कोटा में बनी फिल्म ,,,धारा 302 ठोक डाल ,,,, का यही संदेश समाज के नाम है ,,,,,,,,,,,,,,,,,कोटा के ही निर्माता ,,भवानीशंकर योगी ,,,पत्रकार गौरव चतुर्वेदी सहित कुछ लोगों ने इस फिल्म का निर्माण ,,,बुरे काम का बुरा नतीजा ,, का संदेश देने के उद्देश्य से किया है ,,,,,,,,,,,,,,,,,लगभग नब्बे फीसदी इस फिल्म की शूटिंग कोटा में ही करने के पीछे कोटा को फिल्मों की शूटिगं की लोकेशन के बतौर परमोट करना भी रहा है ,,,,,फिल्म में पत्रकार फिर समाज के शोषण उत्पीड़न से तंग आकर पत्रकार की ज़िंदगी छोड़ क़लम फेंक कर बंदूक उठाकर डॉन बनने का किरदार निभाने वाले भाई गौरव चतुर्वेदी बताते है के फिल्म अधिकतम तैयार हो चुकी है और जल्दी ही दो माह के अंतराल में पुरे देश के सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज़ की जायेगी ,,गौरव चतुर्वेदी बताते है के फिल्म के प्रोड्यूसर भाई भवानीशंकर योगी खुद इस फिल्म में डॉन का रोल कर रहे है जबकि राजेन्द्र सिंह नरुका इस फिल्म को निर्देशित कर रहे है ,,फिल्म में मुख्य कलाकार रूफी खान हीरो की भूमिका निभा रहे है ,,जबकि राजस्थानी फिल्मो की मुख्य कलाकार ,,,दीप्ती धोत्रे फिल्म की हिरोईन की भूमिका में है ,,,,इस फिल्म के म्युज़िक डाइरेक्टर साहिल खान ने जावेद अली के गीतों के साथ मिलकर फिल्म को बहतरीन गीत ,,क़व्वाली ,,मौसीक़ी दी है ,,,फिल्म में जूनियर सनी लियोन कहे जाने वाली अभिनेत्री हॉट डांसर सीमा सिंह का आइटम गर्ल के रूप में गर्मागर्म गीत फिल्माया गया है ,,,, फिल्म की शूटिंग का कुछ भाग उदयपुर में भी फिल्माया गया है ,,,मुख्य गीत में ,,,बेवजह यूँ न दे तू सज़ा ,,,मेने की क्या खता ,,,,,बेवजह मुझे ना रुला ,,,,सुन ले यह इल्तिजा ,,,,,है जबकि क़व्वाली में ,,ऐ मोला यार से क्यों दूर हूँ ,,,,,मेरे मोला तू बता ,,,,,,,,ना क़रार है ना सुकून है ,,केसा यह इश्क़ का जूनून है ,, ऐतीहासिक ,अधरशिला के मज़ार पर फिल्माई गई है जिसमे कोटा के विख्यात क़व्वाल हिफज़ुर्रहमान और साहिल खान ने समा बाँध दिया है ,,,,,,,,,,,,,,मानवीय संवेदनाये होती है तो समाज शोषण करता है और अगर मानवीय संवेदनाये खत्म कर शैतान बन जाओ तो समाज क़दमों में होता है कुछ इसी तरह की कहानी इस फिल्म में क़रीब अठारह डॉन के किरदार को लेकर फिल्म का निर्माण किया गया है ,,कोटा में भी एक डॉन जिसकी हत्या पुलिस हिरासत में हुई उसका भी किरदार उसकी प्रेमिका के साथ इस फिल्म में बताया गया है जबकि छोटे बढ़े अपराधियों का भी प्रतीकात्मक किरदार इस फिल्म में प्रदर्शित किया गया है ,,,,नशे और अपराध का सामंजस्य समाज को खोखला कर रहा है ,,यह संदेश ही इस फिल्म में देने की कोशिश की गई है ,,,,,,,,गौरव चतुर्वेदी खुद पहले एक पत्रकार की भूमिका में है फिर समाज से तंग आकर क़लम छोड़कर हथियार उठाकर काली दादा बन जाते है ,,,,,,,,,कोटा के महत्वपूर्ण सीन ,,हैंगिंग ब्रिज ,चंबल की वादियाँ ,,गार्डन ,,भवन सहित कई महत्वपूर्ण स्थानो पर फिल्म की शूटिंग की गई है जबकि इस फिल्म की शूटिंग की शुरआत के बाद दूसरे प्रोड्यूसर ,,निर्माताओं का ध्यान कोटा को शूटिंग के लिए चयन को लेकर गया है और अब कोटा में शूटिंग हब बनता जा रहा है ,,,,,,,,,,,,,,इस फिल्म में गगन ,,गुलशन पांडे सहित कई साथियों की महत्वपूर्ण भूमिका है ,,गौरव चतुर्वेदी उर्फ़ काली दादा बताते है के इस फिल्म को जल्दी ही कपिल शो के ज़रिये प्रमोट करवाने की योजना अंतिम चरणो में है ,,गौरव कहते है के फिल्म का मुख्य संदेश कोटा शूटिंग की नज़र में किसी दूसरे स्थानो से कम नहीं ,,,कोटा के कलाकार भी खुद को साबित करने का हुनर रखते है जबकि मुख्य संदेश ,,,,,नशे से तबाह बर्बाद लोगों के लिए नशा मुक्ति ,,समाज की बुराइयों के कारन समाज ही माफिया डॉन को पैदा करने के लिए ज़िम्मेदार होना बताया गया है ,,जबकि माफिया डॉन कितना ही बढ़ा हो ,,,कितना ही अरबपति होकर दुनिया की सारी सुख सुविधाएं हांसिल कर ले ,,लेकिन वोह सुकून से नहीं रहता है ,,वोह हर रोज़ हर पल डर और खौफ के साये में जीता है और उसका अंत या तो जेल ,,या एनकाउंटर या फिर गंगवार में मोत ही होता है ,,,मुख्य संदेश में यह भी है के लोगो को डरा धमका कर उनमे खौफ तो पैदा किया जा सकता है ,,भाई कहलवाया जा सकता है लेकिन उनके दिलों में सम्मान और इज़्ज़त पैदा नहीं की जा सकती ,,भाईगिरी डॉन गिरी सिर्फ नफरत ,,सिर्फ दहशत ,,और जेल या फिर मोत ही देती है ,,,,,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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