आपका-अख्तर खान

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10 फ़रवरी 2013

यह मेरा देश है मेरा मुल्क है यही आदर्श भारत है मेरा हिन्दुस्तान ..

हमारे देश में भी फांसी पर सियासत अजीब है .जाती धर्म ..पार्टियों और क्षेत्रीयता के आधार पर फांसी पर खसिया और नाराजगी होती है ...इतिहास गवाह है आज अफज़ल गुरु की फांसी पर जो लोग जश्न मना रहे है जो लोग मिठाइयां बाँट रहे है उनमे से एक बढ़ा तबका गांन्धी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को फांसी देने के मामले में निराश और हताश था सभी जानते है के एक वर्ग अक समाज एक विचारधारा हिन्दुस्तान आज़ाद भारत के इस पहले आतंकवादी जिसने योजनाबद्ध तरीके से पहले मुस्लिम लिबास मुस्लिम शक्ल और शरीर के विशेष हिस्से तक की खतना करा कर अपना चेहरा बदला और अहिंसा के पुजारी देश की धड़कन महात्मा गाँधी की बेरहमी से हत्या की आज कई लोग इस गोडसे को पूजते है ..जब गोडसे को सज़ा दी गयी तब यही लोग जो कथित रूप से राह्स्त्रवादी होने का नारा  देते है रोये थे ..इनके  घरों में चूल्हे नहीं जले थे आज ..संसद पर हमले के देश के दुश्मन आतंकवादी अफज़ल को फिर फांसी हुई है लेकिन इनका उत्साह बदला हुआ है जिन लोगों ने कश्मीर की घाटी  में गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को सजा देने पर जश्न मनाया था आज वहां कर्फ्यू है फांसी का विरोध हो  रहा है ...अजीब बात है अजीब देश है अजीब विचारधारा है यहाँ धर्म और विचारधारा से फांसी क तोला जा रहा है फांसी पर सियासत की जा रही है अरे देश के दुश्मनों को सजा मिली है ..एक कानूनी प्रक्रिया चलाकर कानूनी म्रत्यु है इसमें तो हमे गर्व होना चाहिए के हमारे देश में कानून ज़िंदा है ..हमारा देश महान है यहाँ आज़ाद भारत के पहले खतरनाक आतंकवादी नाथू राम गोडसे को भी नहीं बख्शा गया तो संसद के हमले के आरोपी खुख्नार अपराधी अफज़ल गुरु को भी सबक सिखाया गया है ..खोट हमारी सोच में है जिसे विश्व देखता है ..विष सोचता है के एक सजा नाथूराम गोडसे को दी थी जब लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले थे और आज भी सत्ता में आने की लोलुप कथित देशभक्त बनी पार्टियाँ इस हत्यारे का समर्थन करती है इसे मोडल आदर्श मानती है यह सोच में परिवर्तन क्यूँ आतंक वादी आतंकवादी है उसकी कोई ज़ात कोई धर्म नहीं होता सिर्फ एक ही धर्म एके ही सोच राष्ट्र धर्म और राष्ट्र सोच रखिये नाथूराम गोडसे हो ..अफज़ल गुरु हो सभी आतंकवादी है इनकी फांसी से देश के सवा करोड़ लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कश्मीर घाटी वालों ..अफज़ल गुरु की फांसी पर मातम बनाने वालों जरा समझो तुममे और गान्धी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के समर्थकों में क्या फर्क रह जाएगा प्लीज़ क्लोज़ दिस चेप्टर ..इसे एक इन्साफ ..एक कानून का तमाचा समझकर भूल जाना चाहिए और प्रचारित करना चाहिए के हमारे देश में अमन चेन के लियें खतरनाक लोगों के लियें फांसी से कम कोई सजा नहीं है फिर वोह चाहे नाथूराम गोडसे और उसके समर्थकों का आतंकवाद हो चाहे अफज़ल गुरु और कसाब उसके समर्थकों का आतंकवाद हो जय हिन्द जय भारत ....जय जवान जय किसान यह मेरा देश है मेरा मुल्क है यही आदर्श भारत है मेरा हिन्दुस्तान .....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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