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16 जनवरी 2012

भारतीयता के नाम पर वोट मांगने वाली पार्टियाँ बने ताकि राष्ट्र विकसित और सुरक्षित बने .अरुण अरोरा जी की खुदा यह कामना जल्दी पूरी करे ....आमीन

दोस्तों देश को सूधारने का लक्ष्य लेकर निकले लोग कभी अकेले नहीं लेते है और उनके साथ देश को एक नई दिशा नई उमंग देने के लियें लोग निकल पढ़ते है बस अफ़सोस इस बात का है के इस देश के राजनेताओं ने आज़ादी के बाद थोड़े वक्त में ही यहाँ के लोगों में इतना ज़हर भर दिया है के आज काफी कोशिशों के बाद भी हम नतीजे पर नहीं पहुंच आ रहे है ..दोस्तों आज हमारे और आपके प्रयासों से चाहे देश को बहुत कुछ फायदा मिल प् रहा हो लेकिन यकीन मानों हमारे और आपके प्रयासों ने इस देश को कमसे कम गर्क में जाने से तो बचा ही लिया है वरना यहाँ के नेताओं और अधिकारीयों ने तो इस काम में कोई कसर नहीं छोड़ी है .............आज फेसबुक पर अचानक फरीदाबाद में रहने वाले और सहारनपुर में पाले बढ़े भाई अरुण अरोरा जी से चेट हुई सलाम दुआ के बाद देश के हालातों पर बात होती इस बीच फोन की घंटी बजी और मेरे दिल की मुराद पूरी हो गयी फोन पर पुर खुलूस प्यारी से मधुर आवाज़ हमारे भाई अरुण अरोरा जी की थी उनकी आवाज़ में देश की जनता के दुःख दर्द की तड़पन थी ..उनके विचारों में देश के दुश्मनों के प्रति नफरत थी और उनके ख्यालों में देश को बुलंदी पर भाईचारा और सद्भावना का आलम ब्रदर बनने की ललक थी ..भाई अरुण जी अरोरा का कहना था के देश में आज तक राजनीति में जब भी वोट मांगे गये है हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई दलित हिंदी तेलगु मराठी वगेरा वगेरा के नाम पर वोट मांगे गये है और इसी नाम पर पार्टियों ने चदे किये ..प्र्त्याक्शियों का चयन किया चुनाव जीते और सरकारें बनी है फिर वोह सरकारें अपना काम वही जाती वाद उंच नीच भाषावाद के नाम पर करती है और यह खाई निरंतर बढ़ रही है ..अरुण अरोरा जी के इस दर्द और विश्लेष्ण से में ही नहीं पूरा देश सहमत होगा और सभी जानते है इन बातों से ही हम प्रभावित है अधिकारी ..जज ..चुनाव आयुक्त सभी तो सरकार के लियें सरकार के इशारे पर काम कर रही है बस भाई भतीजावाद जातिवाद उंच नीच भाषावाद की नफरत यह लोग भी तो परियों के कार्यकर्ता बन कर जनता के बीच फेला रहे है और प्रमाण यह है के यही अधिकारी यही जज रिटायर होने के बाद किसी ना किसी पार्टी से चुनाव ल्ध्ते हैं एक एल ऐ एम पी बनते है और फिर मंत्री बन कर वापस अपना काम देश वासियों का खून चूसने का शुरू कर देते है ,,जो जज चुनाव नहीं लड सकते है उन्हें अयोगों का चेयरमेन बना दिया जाता है कुल मिला कर इस पुरस्कार के लालच में यह लोग पार्टियों के कार्यकर्ता के रूप में काम करते है ....एक जगह बेनर लगा था ..तुम अल्पसंख्यकों को इंसाफ और उनका हक दो ..अल्पसंख्यक तुम्हे आधुनिक सुरक्षित भारत देंगे में ठिठका रुका और इस बेनर को बनाने वालों के पास जा पहुंचा उनसे इस बेनर को उतारने का आग्रह किया तो उन्होंने उनके साथ ज़ुल्म ज्यादती और पक्षपात न इंसाफी के दर्जनों दस्तावेजी उदाहरन दे दिए और उनका अपना दर्द बताते बताते उनकी आँखों में आंसू निकल पढ़े मेने सोचा ऐसे माहोल में अरुण अरोरा की सोच एक दिशा है और मेने इसीलियें आप सभी भाइयों से इस निजी वार्ता को शेयर किया है के भाई अरुण अरोरा जी की सोच वाले जो भी जो भी इस दश को सुरक्षित और विकसित देखना चाहते है वोह एक हो और देश में जो भी नफरत .जाती ..धर्म की राजनीति कर देश को बांटता है जो भी अधिकारी जो भी जज इस देश को तमाशा बनता है उन्हें पहले शांति और सद्भाव राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाया जाए नहीं तो फिर उनके साथ सुभाष चन्द्र बोस ..चद्रशेखर आज़ाद बन कर व्यव्य्हार किया जाए अरुण अरोरा जी का कहना है के न जाने कब वोह लम्हा आएगा जब सियासत से जुड़े लोग कोई भी योजना भारतियों के लियें सिर्फ भारतियों के लियें लायेंगे और भारतीयता के नाम पर ही वोट मांग कर सरकार मनाएंगे उनके प्रचार में दलित ..आरक्षण हिंदी तेलगु मराठी गुजराती मुस्लिम नहीं सिर्फ भारत और भारतीयता होगी खुदा अरुण अरोरा जी की चाहत पूरी करे इसी दुआ के साथ आमीन ............ अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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