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27 सितंबर 2011

आडवाणी पर भी आएगी आंच? स्टिंग की जानकारी छुपाने के कारण कुलकर्णी को भेजा जेल


नई दिल्ली. 'वोट के बदले नोट' कांड में मंगलवार को एके और बड़े नाम पर गाज गिरी। तीस हजारी कोर्ट ने भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी के सहयोगी रहे सुधींद्र कुलकर्णी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें 1 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कोर्ट ने कुलकर्णी के वकील से पूछा कि जब उन्हें पूरे मामले की जानकारी थी तब उन्होंने घटना से पहले किसी एजेंसी को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी? इस सवाल के जवाब में सुधींद्र कुलकर्णी के वकील ने कहा कि अगर वे किसी जांच एजेंसी को इस मामले की जानकारी दे देते तो स्टिंग ऑपरेशन हो ही नहीं पाता।

कुलकर्णी के वकील ने कहा कि उन्हें किसी जांच एजेंसी में भरोसा नहीं था, इसलिए उन्होंने न्यूज़ चैनल का सहारा लिया। कोर्ट के फैसले के बाद एक टीवी चैनल से बातचीत में कुलकर्णी ने कहा, 'यह मामला तभी सामने आया जब हमने इसे उजागर किया। मेरी न्यायपालिका में पूरी आस्था है। मैं सच को सामने लाने के लिए जेल भी जाने को तैयार हूं। अगर मेरे जेल जाने से सत्य सामने आता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है।' खुद को स्टिंग का मास्‍टरमाइंड बताने वाले कुलकर्णी ने यह भी कहा कि वह इस मामले में अकेले नहीं थे और इसकी जानकारी बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को थी।

कुछ दिन पहले आडवाणी ने भी सदन में कुबूल किया है कि उन्‍हें इस मामले की जानकारी थी और इस आधार पर उन्‍हें भी सरकार चाहे तो गिरफ्तार कर ले। अब अदालत ने जो सवाल उठाते हुए कुलकर्णी को न्‍यायिक हिरासत में भेजा है, उससे भाजपा सकते में है। पार्टी ने कुलकर्णी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर निराशा जाहिर की है। फैसले के फौरन बाद बीजेपी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने एक टेलीविजन चैनल से कहा कि इस मामले में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले परेशान हो रहे हैं और गलत ढंग से फायदा उठाने वाले अब तक बचे हुए हैं। प्रसाद ने कहा कि कुलकर्णी ने देशहित में भ्रष्टाचार उजागर करने का काम किया था। प्रसाद के मुताबिक अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि अमर सिंह किसके लिए काम कर रहे थे।

पार्टी में आलम यह है कि फैसले के करीब आधे घंटे बाद जब पार्टी के नेता अरुण जेटली मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्‍होंने इस मामले पर कुछ भी नहीं कहा। उन्‍होंने पहले ही साफ कर दिया, 'मैं सिर्फ 2जी पर बोलूंगा।'


इससे पहले मंगलवार को कोर्ट की सुनवाई से पहले सुधींद्र कुलकर्णी ने तीस हजारी कोर्ट परिसर में मीडिया से बात करते कहा कि अगर भ्रष्टाचार को उजागर करना गुनाह है तो वे इस मामले में 'मास्टर माइंड' हैं। कुलकर्णी का कहना है कि उन्होंने देशहित में काम किया और वे जेल जाने को तैयार हैं।
जब कुलकर्णी से अमर सिंह की भूमिका के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मैं किसी व्यक्ति पर टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। अब यह साबित हो चुका है कि किसने किसे पैसे दिए थे। अब सिर्फ यही साबित होना बाकी है कि इस पूरे मामले से अंतिम लाभ किसको पहुंचा।' उन्होंने कहा कि 'स्टिंग ऑपरेशन' बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की जानकारी में और उनकी सहमति के बाद ही किया गया था।
वे पिछले दिनों निजी वजहों से अमेरिका में थे, जिसके चलते कोर्ट की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाए थे। कुलकर्णी ने अपने वकीलों के जरिए कोर्ट की कार्यवाही में मौजूद रहने से छूट मिलने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए 27 सितंबर को कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा था।

दूसरी तरफ, इसी कोर्ट में आज अमर सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही है। कोर्ट ने एम्स से अमर सिंह की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है। एम्स की तरफ से एक डॉक्टर आज कोर्ट में मौजूद हैं। अमर सिंह का एम्स में इलाज चल रहा है। आज ही अमर सिंह की अंतरिम जमानत की मियाद भी खत्म हो रही है। अमर सिंह ने इलाज कराने के लिए विदेश जाने की इजाजत मांगी है। अमर सिंह के वकील का कहना है कि उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर जाना पड़ता है।

सदन में नोट लहराने वाले बीजेपी के तीन सांसदों में से दो जेल में हैं। ये दोनों वर्तमान लोकसभा के सदस्य नहीं हैं। लेकिन अशोक अरगल मौजूदा लोकसभा के भी सदस्य हैं। कुछ हफ्ते पहले संसद के मॉनसून सत्र के दौरान लालकृष्ण आडवाणी ने लोकसभा में कहा था कि सरकार चाहे तो उन्हें भी गिरफ्तार कर सकती है क्योंकि उन्हें भी नोट के बदले वोट कांड की पूरी जानकारी थी।
'नोट के बदले वोट' कांड 22 जुलाई 2008 को हुआ था। अमेरिका के साथ भारत का प्रस्तावित परमाणु करार यूपीए सरकार को समर्थन दे रहे वामदलों को रास नहीं आया था। इस वजह से वामदलों ने यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। ऐसे में लोकसभा में विश्वास मत (ट्रस्ट वोट) की नौबत आई जिसमें जीत हासिल करना यूपीए के लिए अनिवार्य था। आरोप है कि यूपीए सरकार को बचाने के लिए रिश्वत का खेल खेला गया।
खबरों के मुताबिक विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान गैरहाजिर रहने के लिए तीनों को तीन-तीन करोड़ रुपये दिए जाने थे। चार्जशीट में कुलकर्णी के बारे में कहा गया है कि उन्हें घटनाओं की पूरी जानकारी थी, फिर भी उन्होंने जांच एजेंसी को अंधेरे में रखा। बीजेपी के लोकसभा सांसद अशोक अर्गल का नाम इस चार्जशीट में नहीं है। उनके खिलाफ मामला चलाने की अनुमति मिलने के बाद दिल्ली पुलिस पूरक चार्जशीट फाइल करेगी।

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