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24 अगस्त 2011

समय पर काम नहीं तो 5000 रु. जुर्माना

जयपुर। सरकारी विभागों में आम लोगों के काम समय नहीं किए तो अफसरों और कर्मचारियों पर 500 से 5,000 रुपए तक की पैनाल्टी लगेगी। ये प्रावधान राज्य सरकार की ओर से विधानसभा के इसी सत्र में पेश किए जाने वाले राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी विधेयक, 2011 में शामिल किया गया है। यह विधेयक इसी सत्र में पारित कराए जाने की पूरी कोशिश होगी। केबिनेट की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में इस विधेयक को हरी झंडी दे दी गई।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केबिनेट की बैठक के बाद बताया कि आम लोगों के रोजाना काम पड़ने वाले 15 विभागों की 53 सेवाओं को इसमें शामिल किया गया है। हर काम के लिए समय सीमा तय की गई है, जो कि 24 घंटे से लेकर 60 दिन तक अलग अलग है।

यह सीमा विभागों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार ही तय की गई है। गहलोत ने कहा कि इससे लोगों के काम समय पर होंगे और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि लोगों को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर लगाने पड़ते हैं, इसे देखकर अच्छा नहीं लगता। इसके लिए पिछले कार्यकाल में नागरिक अधिकार पत्र जारी किए थे, लेकिन सरकार बदली तो प्रयास आगे नहीं बढ़ पाए। उन्होंने कहा कि गुड गवर्नेंस के लिए ई गवर्नेंस जरूरी है, इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की 9,177 ग्राम पंचायतों और 249 पंचायत समितियों में राजीव गांधी सेवा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें ई गवर्नेंस की सारी सेवाएं मिलेगी, इसके लिए सभी स्थानों पर सोलर पैनल भी लगी दिए गए हैं।

देश में पहली बार

तीन राज्यों में ऐसा कानून पहले से होने के बाद भी प्रदेश में तैयार इस विधेयक में कई प्रावधान पहली बार शामिल किए गए हैं। इसमें कार्मिकों पर पैनाल्टी लगाना, नगरीय विकास, स्वायत्त शासन और आवासन मंडल, टेंडर की राशि समय पर लौटाने का प्रावधान, नामांतरण और रूपांतरण, अफसर ही नहीं कर्मचारियों को भी बराबरी का जिम्मेदार मानना और सभी तरह की एनओसी लाइसेंस और मंजूरियों के लिए समय सीमा का निर्धारण जैसे प्रावधान पहली बार शामिल किए गए हैं।

इन १५ विभागों की 53 सेवाएं शामिल

ऊर्जा, पुलिस, चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा, यातायात, पीएचईडी, राजस्व, स्थानीय निकाय, नगरीय विकास, आवासन, खाद्य, वित्त, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग।

राजस्थान चौथा राज्य

सेवाओं की गारंटी से संबंधित यह विधेयक लाने वाला राजस्थान चौथा राज्य होगा। इससे पहले मध्यप्रदेश, बिहार और पंजाब में यह कानून का रूप ले चुका है। इस विधेयक में इन राज्यों के कानूनों में शामिल प्रावधानों को भी तरजीह दी गई है।

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