
वोह कहते हें
पास से
जब वोह मेरे गुज़रे
बहुत रोये हें ,
में कहता हूँ
पास से गुज़रे
और उन्होंने हाल तक
ना पूंछा मेरा
बताओ में केसे मान लूँ
के वोह दूर जाकर
रोये ,
ज़मीं पर जो गिरे हें
शबनम के कतरे
यह उनके अश्क नहीं
हें मेरे इश्क के टुकड़े।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

