आपका-अख्तर खान

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06 दिसंबर 2010

मां अब भी रोती हे ........

मां
पहले भी रोती थी
आज भी रोती हे
पहले
बच्चा जब खाना नहीं खाता था
तब मां बच्चे को
भूखा देख कर रोती थी
आज बच्चे जब बढ़े हुए हें
घर में बहु आई हे
मां तब भी रोती हे
फर्क इतना हे जब
बच्चे के रोती नहीं खाने पर रोती थी
आज बहु बेटे
उसे रोती नहीं देते
इसलियें मां रोती हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

3 टिप्‍पणियां:

  1. क्या कहा जाये मगर कितने ही घरों की कहानी है यह!

    जवाब देंहटाएं
  2. अकेला जी
    नमस्कार
    बहुत मार्मिक भाव लिए है आपकी कविता ...वर्तमान पारिवारिक संबंधों को उद्घाटित करती हुई .....शुक्रिया

    जवाब देंहटाएं

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