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29 नवंबर 2010

पर्दा जो उठा तो

पर्दा जब भी उठा
हर शख्स
मुझे बे लिबास दिखा हे
जुबां पर अपनापन
दिलों में ज़हरीला
खंजर दिखा हे
इलाही
जिन्हें मेने अपना समझा
उनका
बेवफाई का
यह अजीब मंजर
मुझे क्यूँ दिखा हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

2 टिप्‍पणियां:

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