तुम तो दरिया हो
तुम्हें तो
मोजों के उछालों से हे काम
मेरा किया
में तो कश्ती हूँ
डूबू या किनारे लगु
तुम्हें मुझ से किया
तुमतो दरिया हो
तुम्हें तो मोजों से हे काम ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
कम शब्दों में गहरे एहसासों की लहरें हैं ....
जवाब देंहटाएंशोभनं काव्यम्
जवाब देंहटाएंब्लाग जगत पर संस्कृत प्रशिक्षण की कक्ष्या में आपका स्वागत है ।
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beshaq lajawaab
जवाब देंहटाएंsalem
9838659380