आपका-अख्तर खान

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30 जुलाई 2010

तुम तो दरिया हो


तुम तो दरिया हो
तुम्हें तो
मोजों के उछालों से हे काम
मेरा किया
में तो कश्ती हूँ
डूबू या किनारे लगु
तुम्हें मुझ से किया
तुमतो दरिया हो
तुम्हें तो मोजों से हे काम ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

3 टिप्‍पणियां:

  1. कम शब्दों में गहरे एहसासों की लहरें हैं ....

    जवाब देंहटाएं
  2. शोभनं काव्‍यम्

    ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत प्रशिक्षण की कक्ष्‍या में आपका स्‍वागत है ।

    http://sanskrit-jeevan.blogspot.com/ पर क्लिक करके कक्ष्‍या में भाग ग्रहण करें ।

    जवाब देंहटाएं

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