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29 अक्टूबर 2026

फ़र्ज़ी लोगों की फ़र्ज़ी बातें,

फ़र्ज़ी लोगों की फ़र्ज़ी बातें, कोंग्रेस के राहुल पर ज़ुबानी हमले पर कोटा कोंग्रेसियों का मूकबधिर हो जाना, खेर सच्चाई जानिए, फ़र्ज़ी कथनों के बारे में, क्या चाणक्य ने कहा था कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति देशभक्त नहीं हो सकता?
ऐतिहासिक तथ्यों, प्रमाणों और राजनीतिक बयानों की पड़ताल
निष्कर्ष: इस कथन का चाणक्य द्वारा कहे जाने का कोई प्रमाणित मूल संदर्भ अभी तक सामने नहीं आया है। चाणक्य नीति या कौटिल्य के अर्थशास्त्र में इस कथन का प्रामाणिक श्लोक, अध्याय और मूल संस्कृत पाठ प्रस्तुत किए बिना इसे चाणक्य का प्रमाणित कथन बताना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं है।
यह कथन वर्ष 2020 और 2023 में राहुल गांधी तथा सोनिया गांधी पर राजनीतिक हमलों के दौरान चर्चा में आया था। आइए, उपलब्ध प्रमाणों की जांच करते हैं।
1. यह कथन किसने और कब दिया था?
(क) प्रज्ञा सिंह ठाकुर का बयान — 28 जून 2020
भोपाल से तत्कालीन भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी की पृष्ठभूमि पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति देशभक्त नहीं हो सकता।
उन्होंने इस विचार को चाणक्य से भी जोड़ा।
इस बयान की रिपोर्टिंग NDTV की समाचार रिपोर्ट⁠ और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट⁠ में हुई थी।
महत्वपूर्ण अंतर: ये समाचार रिपोर्टें इस बात का प्रमाण हैं कि प्रज्ञा ठाकुर ने ऐसा बयान दिया था। ये इस बात का प्रमाण नहीं हैं कि चाणक्य ने वास्तव में ऐसा कहा था।
(ख) संजय जायसवाल का बयान — मार्च 2023
भाजपा नेता संजय जायसवाल ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति देशभक्त नहीं हो सकता और इस विचार को लगभग 2,000 वर्ष पुराना बताते हुए चाणक्य से जोड़ा।
इस बयान की रिपोर्टिंग NDTV India⁠ ने की थी।
इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कथन आधुनिक राजनीतिक विमर्श में चाणक्य के नाम से प्रचारित हुआ। लेकिन इसके प्राचीन स्रोत का प्रमाण अलग से आवश्यक है।
2. चाणक्य की पुस्तकों में क्या इसका प्रमाण मिलता है?
चाणक्य से संबंधित प्रमुख ग्रंथों में निम्नलिखित शामिल हैं:
ग्रंथ
विषय
इस कथन के संबंध में स्थिति
कौटिल्य का अर्थशास्त्र
राज्य संचालन, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और सुरक्षा
विदेशी महिला से जन्मे व्यक्ति को देशभक्त न मानने वाले कथन का प्रमाणित मूल संदर्भ प्रस्तुत नहीं किया गया है।
चाणक्य नीति
नीति, आचरण, व्यवहार और जीवन संबंधी शिक्षाएं
इस कथन का प्रमाणित संस्कृत श्लोक और अध्याय उपलब्ध प्रमाणों से स्थापित नहीं होता।
चाणक्य के नाम से प्रचलित सूक्तियां
विभिन्न नैतिक और राजनीतिक शिक्षाएं
किसी कथन का इंटरनेट पर चाणक्य के नाम से प्रसारित होना उसके ऐतिहासिक रूप से प्रामाणिक होने का प्रमाण नहीं है।
कौटिल्य के अर्थशास्त्र की पांडुलिपियों, अनुवादों और ऐतिहासिक अध्ययनों का परीक्षण करते समय मूल पाठ, अध्याय और श्लोक या सूत्र संख्या का मिलान करना आवश्यक है।
किसी कथन को प्रमाणित करने के लिए कम से कम निम्नलिखित साक्ष्य अपेक्षित होंगे:
मूल संस्कृत पाठ।
ग्रंथ का नाम और संबंधित अध्याय या सूत्र संख्या।
किसी मान्य संस्करण में उसका पाठ।
प्रमाणित अनुवाद या विद्वानों का संदर्भ।
अभी इस कथन के समर्थन में ऐसा सत्यापित मूल संदर्भ सामने नहीं है। इसलिए इसे चाणक्य का वास्तविक कथन घोषित करना उचित नहीं होगा।
3. क्या चाणक्य ने वास्तव में विदेशी मूल के लोगों के बारे में ऐसा सिद्धांत दिया था?
इस प्रश्न पर सावधानी से विचार करना आवश्यक है।
कौटिल्य का अर्थशास्त्र राज्य की सुरक्षा, राजा के कर्तव्यों, शत्रु राज्यों, कूटनीति, गुप्तचरी और राजनीतिक हितों पर विस्तार से चर्चा करता है।
लेकिन किसी व्यक्ति की देशभक्ति को केवल उसकी मां के जन्मस्थान या राष्ट्रीय मूल से जोड़ने वाला कोई विशिष्ट सिद्धांत चाणक्य के नाम से तभी स्वीकार किया जा सकता है, जब उसके समर्थन में प्रामाणिक मूल पाठ उपलब्ध हो।
यहां दो अलग-अलग बातें हैं:
राज्य की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि मानना: यह प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन का महत्वपूर्ण विषय है।
विदेशी महिला से जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को देशभक्ति के अयोग्य मानना: यह एक विशिष्ट दावा है, जिसके लिए अलग और प्रत्यक्ष प्रमाण चाहिए।
पहले विचार की उपस्थिति दूसरे कथन की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं करती।
4. क्या किसी व्यक्ति की देशभक्ति उसकी मां के विदेशी होने से तय होती है?
यह ऐतिहासिक प्रश्न के साथ-साथ संवैधानिक और राजनीतिक प्रश्न भी है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में कानून के समक्ष समानता और अनुच्छेद 15 में निर्धारित आधारों पर भेदभाव के विरुद्ध संरक्षण का प्रावधान है। नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।
इसलिए किसी व्यक्ति की देशभक्ति का आकलन केवल उसकी मां के विदेशी मूल के आधार पर कर देना तथ्यात्मक रूप से भी उचित नहीं है। किसी व्यक्ति के कार्यों, सार्वजनिक आचरण और देश के प्रति उसके वास्तविक योगदान का मूल्यांकन अलग प्रश्न है।
इसी तरह, किसी नेता के किसी बयान की आलोचना करने के लिए उसकी मां के विदेशी मूल को देशद्रोह या देशभक्ति से जोड़ना आवश्यक नहीं है।
5. इस दावे के पक्ष में प्रमाण किसे देना चाहिए?
यदि कोई व्यक्ति दावा करता है कि:
चाणक्य ने कहा था कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति कभी देशभक्त नहीं हो सकता।
तो उससे निम्नलिखित विवरण मांगे जाने चाहिए:
यह कथन चाणक्य नीति के किस अध्याय में है?
संस्कृत में मूल श्लोक क्या है?
श्लोक संख्या क्या है?
किस मान्य प्रकाशन या पांडुलिपि में यह दर्ज है?
किस विद्वान ने इसका प्रमाणित अनुवाद किया है?
यदि इन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलता, तो कथन को ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रसारित नहीं करना चाहिए।
ध्यान रहे, किसी कथन का प्रमाण न मिलना और उसके कभी कहे ही न जाने को निर्णायक रूप से सिद्ध कर देना दो अलग बातें हैं। उचित निष्कर्ष यह है कि इस कथन की चाणक्य से संबद्धता प्रमाणित नहीं है।
6. अंतिम निष्कर्ष
उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और कथन के प्रचलित संदर्भों के आधार पर निष्कर्ष इस प्रकार है:
प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने जून 2020 में यह विचार चाणक्य से जोड़कर प्रस्तुत किया था।
संजय जायसवाल ने मार्च 2023 में इसी प्रकार का दावा किया।
इन बयानों की समाचार रिपोर्टिंग उपलब्ध है, लेकिन समाचार रिपोर्टिंग प्राचीन कथन की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं करती।
इस कथन का मूल संस्कृत श्लोक, अध्याय संख्या और प्रमाणित ऐतिहासिक संदर्भ स्थापित नहीं है।
इसलिए इसे चाणक्य का प्रमाणित कथन बताना तथ्यात्मक रूप से असमर्थित है।
 

अब (मरने) के वक़्त ईमान लाता है हालाकि इससे पहले तो नाफ़रमानी कर चुका और तू तो फ़सादियों में से था

 अब (मरने) के वक़्त ईमान लाता है हालाकि इससे पहले तो नाफ़रमानी कर चुका और तू तो फ़सादियों में से था (91)
तो हम आज तेरी रुह को तो नहीं (मगर) तेरे बदन को (तह नशीं होने से) बचाएँगें ताकि तू अपने बाद वालों के लिए इबरत का (बाइस) हो और इसमें तो शक नहीं कि तेरे लोग हमारी निशानियों से यक़ीनन बेख़बर हैं (92)
और हमने बनी इसराइल को (मालिक शयाम में) बहुत अच्छी जगह बसाया और उन्हं अच्छी अच्छी चीज़ें खाने को दी तो उन लोगों के पास जब तक इल्म (न) आ चुका उन लोगों ने एख़्तेलाफ़ नहीं किया इसमें तो शासक ही नहीं जिन बातों में ये (दुनिया में) बाहम झगड़े रहे है क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार इसमें फैसला कर देगा (93)
पस जो कु़रान हमने तुम्हारी तरफ नाजि़ल किया है अगर उसके बारे में तुम को कुछ शक हो तो जो लोग तुम से पहले से किताब (ख़़ुदा) पढ़ा करते हैं उन से पूछ के देखों तुम्हारे पास यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ किताब आ चुकी तो तू न हरगिज़ शक करने वालों से होना (94)
न उन लोगों से होना जिन्होंने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया (वरना) तुम भी घाटा उठाने वालों से हो जाओगे (95)
(ऐ रसूल) इसमें शक नहीं कि जिन लोगों के बारे में तुम्हारे परवरदिगार को बातें पूरी उतर चुकी हैं (कि ये मुस्तहके़ अज़ाब हैं) (96)
वह लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब देख (न) लेगें इमान न लाएगें अगरचे इनके सामने सारी (ख़ुदाई के) मौजिज़े आ मौजूद हो (97)
कोई बस्ती ऐसी क्यों न हुयी कि इमान क़ुबूल करती तो उसको उसका इमान फायदे मन्द होता हाँ यूनूस की क़ौम जब (अज़ाब देख कर) इमान लाई तो हमने दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी में उनसे रुसवाई का अज़ाब दफा कर दिया और हमने उन्हें एक ख़ास वक़्त तक चैन करने दिया (98)
और (ऐ पैग़म्बर) अगर तेरा परवरदिगार चाहता तो जितने लोग रुए ज़मीन पर हैं सबके सब इमान ले आते तो क्या तुम लोगों पर ज़बरदस्ती करना चाहते हो ताकि सबके सब इमानदार हो जाएँ हालाकि किसी शख़्स को ये एख़्तेयार नहीं (99)
कि बगै़र ख़़ुदा की इजाज़त ईमान ले आए और जो लोग (उसूले दीन में) अक़ल से काम नहीं लेते उन्हीं लेागें पर ख़़ुदा (कुफ्ऱ) की गन्दगी डाल देता है (100)

28 अक्टूबर 2026

*शरद पूर्णिमा पर,रोशनी का दान,कोटा से 120 किलोमीटर दूर से लिया नेत्रदान*

 

शाइन इंडिया फाउंडेशन | भवानीमंडी।*

*शरद पूर्णिमा पर,रोशनी का दान,कोटा से 120 किलोमीटर दूर से लिया नेत्रदान*

शरद पूर्णिमा - रोशनी, शीतलता और अमृत वर्षा का पर्व। इसी पावन पर्व पर भवानीमंडी के पोरवाल परिवार ने रोशनी के दान की अनूठी मिसाल पेश की।

*नेत्रदान का निर्णय*

द्वारकादास, राधेश्याम पोरवाल के भ्राता व मुकेश के पिता जगदीशचंद पोरवाल के निधन के उपरांत शोक की इस घड़ी में भी परिवार ने, स्व प्रेरणा से, परोपकार को सर्वोपरि रखते हुए नेत्रदान का पुनीत निर्णय लिया।

*नेत्रदान प्रक्रिया*

भतीजे संजय पोरवाल एवं पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष विनय पोरवाल की सूचना पर भारत विकास परिषद के नेत्रदान प्रभारी एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नगर संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल द्वारा त्वरित कार्यवाही की गई। 

सूचना प्राप्त होते ही ईबीएसआर-बीबीजे चेप्टर कोऑर्डिनेटर डॉ. कुलवंत गौड़ ज्योति-रथ से दोपहर 3 बजे कोटा से 120 किलोमीटर दूर भवानीमंडी पहुंचे तथा परिवारजनों की गरिमामय उपस्थिति में नेत्रदान प्रक्रिया को पूर्ण कर दो दृष्टिहीन व्यक्तियों हेतु कॉर्निया प्राप्त किया।

इस पुनीत कार्य में पोरवाल समाज के संजय, विनय,राकेश,विकास,रितेश,संदीप,अमित पोरवाल आदि का सराहनीय सहयोग रहा। विशेष रूप से नेत्रदान प्रक्रिया के समय परिवार की महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, जिन्होंने नेत्रदान प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा और इस जागरूकता अभियान को बल प्रदान किया। 

डॉ कुलवंत गौड़ के अनुसार नेत्रदानी जगदीशचंद पोरवाल का कॉर्निया श्रेष्ठ गुणवत्ता का प्राप्त हुआ है,जिसे नेत्र बैंक जयपुर भेज दिया गया है जहां पर वह प्रत्यारोपित होकर दो नेत्रहीनों को नई नेत्र ज्योति प्रदान कर सकेगा।

*श्रद्धांजलि सभा में सम्मान*

सोमवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने नेत्रदानी जगदीशचंद पोरवाल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पोरवाल परिवार के नेत्रदान के मानवीय एवं प्रेरणादायी निर्णय की सराहना की। इस अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के द्वारा परिवार को नेत्रदान के लिए प्रशस्ति-पत्र, एवं नेत्रदान पट्टिका भेंट कर सम्मानित किया गया।

*एक नजर में*

कमलेश गुप्ता दलाल ने जानकारी देते हुए बताया कि शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से भवानीमंडी नगर से यह 167वाँ नेत्रदान है, जबकि इस वर्ष 2026 का यह 18वाँ नेत्रदान है।

*-: निवेदक :-*
*शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा*
*नेत्रदान • अंगदान • देहदान*

और ख़़ुदा सच्ची बात को अपने कलाम की बरकत से साबित कर दिखाता है अगरचे गुनाहगारों को ना गॅवार हो

 फिर जब वह लोग (रस्सियों को साँप बनाकर) डाल चुके तू मूसा ने कहा जो कुछ तुम (बनाकर) लाए हो (वह तो सब) जादू है-इसमें तो ्यक ही नहीं कि ख़़ुदा उसे फौरन मिटियामेट कर देगा (क्योंकर) ख़ुदा तो हरगिज़ मफ़सिदों (फसाद करने वालों) का काम दुरुस्त नहीं होने देता (81)
और ख़़ुदा सच्ची बात को अपने कलाम की बरकत से साबित कर दिखाता है अगरचे गुनाहगारों को ना गॅवार हो (82)
अलग़रज़ मूसा पर उनकी क़ौम की नस्ल के चन्द आदमियों के सिवा फिरआऊन और उसके सरदारों के इस ख़ौफ से कि उन पर कोई मुसीबत डाल दे कोई ईमान न लाया और इसमें शक नहीं कि फिरआऊन रुए ज़मीन में बहुत बढ़ा चढ़ा था और इसमें शक नहीं कि वह यक़ीनन ज़्यादती करने वालों में से था (83)
और मूसा ने कहा ऐ मेरी क़ौम अगर तुम (सच्चे दिल से) ख़ुदा पर इमान ला चुके तो अगर तुम फरमाबरदार हो तो बस उसी पर भरोसा करो (84)
उस पर उन लोगों ने अजऱ् की हमने तो ख़़ुदा ही पर भरोसा कर लिया है और दुआ की कि ऐ हमारे पालने वाले तू हमें ज़ालिम लोगों का (ज़रिया) इम्तिहान न बना (85)
और अपनी रहमत से हमें इन काफि़र लोगों (के नीचे) से नजात दे (86)
और हमने मूसा और उनके भाई (हारुन) के पास ‘वही’ भेजी कि मिस्र में अपनी क़ौम के (रहने सहने के) लिए घर बना डालो और अपने अपने घरों ही को मस्जिदें क़रार दे लो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ों और मोमिनीन को (नजात का) खुशख़बरी दे दो (87)
और मूसा ने अजऱ् की ऐ हमारे पालने वाले तूने फिरआऊन और उसके सरदारों को दुनिया की जि़न्दगी में (बड़ी) आराइश और दौलत दे रखी है (क्या तूने ये सामान इस लिए अता किया है) ताकि ये लोग तेरे रास्तें से लोगों को बहकाए परवरदिगार तू उनके माल (दौलत) को ग़ारत (बरबाद) कर दे और उनके दिलों पर सख़्ती कर (क्योंकि) जब तक ये लोग तकलीफ देह अज़ाब न देख लेगें ईमान न लाएगें (88)
(ख़ुदा ने) फरमाया तुम दोनों की दुआ क़ुबूल की गई तो तुम दोनों साबित कदम रहो और नादानों की राह पर न चलो (89)
और हमने बनी इसराइल को दरिया के उस पार कर दिया फिर फिरआऊन और उसके लश्कर ने सरकशी की और शररारत से उनका पीछा किया-यहाँ तक कि जब वह डूबने लगा तो कहने लगा कि जिस ख़ुदा पर बनी इसराइल इमान लाए हैं मै भी उस पर ईमान लाता हूँ उससे सिवा कोई माबूद नहीं और मैं फरमाबरदार बन्दों से हूँ (90)

24 अक्टूबर 2026

एक और नवाचार से शहर वासियों को नेत्रदान अभियान से जोड़ने की मुहीम

 

एक और नवाचार से शहर वासियों को नेत्रदान अभियान से जोड़ने की मुहीम
2. रोशनी के पर्व से पहले दो आँखों से अंधेरा दूर करने का नवाचार 
3. संकल्प पत्र भर,इमोजी की कॉर्नियल अंधता को दूर कर, महसूस करें, रौशनी मिलने की खुशी 


*कोटा।* शाइन इंडिया फाउंडेशन को हमेशा नेत्रदान अंगदान और देहदान के नवाचारों के लिये, ना सिर्फ प्रदेश में बल्कि पूरे भारतवर्ष में जाना जाता है । संस्था के कई ऐसे नवाचार हैं, जिन्होंने हर उम्र और वर्ग के लोगों को अभियान में जोड़ने का प्रयास किया है ।

नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है,और रोशनी का महापर्व दीपावली आने को है। अंधकार पर प्रकाश की विजय के इस पर्व से पहले *शाइन इंडिया फाउंडेशन* ने एक बार फिर अनूठा संकल्प लिया है - जिसमें उन्होंने नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ पर,ऐसे इमोजी लगाए है, जिनकी काली आँखों को कॉर्निया की अंधता के कारण सफेद दिखाया गया है । यह सफेद रंग कॉर्निया ब्लाइंडनेस से जूझ रहे उन हजारों दृष्टिहीनों का प्रतीक है।

भोग जैसी आस्था का अनूठा नवाचार*

संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ ने कहा कि, इस अभियान को एक आध्यात्मिक भाव से जोड़ा है। जिस तरह हम थाली में भोग सजाकर भगवान के सामने रखते हैं,और मन में गहरी आस्था रखते हैं कि,भगवान ने भोग ग्रहण कर लिया, ठीक उसी प्रतीकात्मक भावना पर यह नवाचार बना है। व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प-पत्र भरता है और फिर अपने हाथों से स्माइली की आँखों पर लगा सफेद रंग साफ करता है, तो उसके मन में वही आत्मिक संतुष्टि आती है कि,आज उसके लिए नेत्रदान संकल्प से कल दो लोगों की आँखों में रोशनी पहुंचेगी।

शहरवासियों के विचार : 

नेत्रदानी परिवार से सुनीता गोयल जॉली ने कहा कि, "यह तरीका बहुत ही सरल और दिल को छूने वाला है। बच्चे और युवा इस खेल-खेल वाले तरीके से जरूर जुड़ेंगे। यह हमें भी मोटिवेट करता है।"

विज्ञान नगर निवासी जिवेश ने कहा की,हमेशा से वह नेत्रदान संकल्प लेने में थोड़ा सा झिझके,परंतु आज जब इस नवाचार की प्रक्रिया को देखा और किया तो लगा कि, कितना सा छोटा सा कार्य,किसी के चेहरे पर खुशी ला सकता है,यह महसूस हुआ,और उन्होंने संकल्प पत्र भरा । 

अभियान से जुड़ी *निधि जैन* ने कहा, _"जब मैंने अपने हाथ से स्माइली की आँख साफ की तो मन में अजीब सी खुशी आई, लगा जैसे सच में किसी की आँखों में रोशनी भर दी हो। यह सिर्फ फॉर्म भरना नहीं, एक एहसास है।"_

युवाओ को भा रहा है - नेत्रदान संकल्प का नवाचार

एक कोचिंग में कार्यरत अंजलि नामदेव ने, जब गाड़ी पर लगे स्माइली की आंखों को सफेद देखा तो उन्होंने रुक कर पूरी बात को समझा और फिर जब उन्हें इसका अर्थ समझ आया तो उन्होंने, अपना नेत्रदान संकल्प पत्र भरकर तुरंत दो लोगों की आँखों में रोशनी पहचाने का सुंदर,मार्मिक अनुभव प्राप्त किया ।

ज्ञात हो कि इस नवाचार से अभी तक 130 से अधिक युवाओं ने स्व प्रेरणा से प्रेरित होकर अपना नेत्रदान संकल्प पत्र भरा है ।

*संस्था संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ का संदेश*

इस अवसर पर *संस्था संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़* ने कहा, _"अंधकार को मिटाकर रोशनी का पर्व आने वाला है, तो क्यों ना इस पावन पर्व को मनाने से पहले हम दो दृष्टिहीनों की आँखों से अंधेरा दूर करने का एक संकल्प करें। सार्थक दिवाली, जब ही संभव है,जब दुनिया से जाने के बाद,आपकी आँखों से दो व्यक्तियों के अंधेरे जीवन में रोशनी पहुंचे ।


*-: निवेदक :-*
*शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा*
*नेत्रदान • अंगदान • देहदान*
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