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17 सितंबर 2026

कि तमाम बड़े बड़े जादूगरों का जमा करके अपके पास दरबार में हाजि़र करें

 (आखि़र) सबने मुत्तफिक़ अलफाज़ (एक ज़बान होकर) कहा कि (ऐ फिरआऊन) उनको और उनके भाई (हारून) को चन्द दिन कै़द में रखिए और (एतराफ़ के) शहरों में हरकारों को भेजिए (111)
कि तमाम बड़े बड़े जादूगरों का जमा करके अपके पास दरबार में हाजि़र करें (112)
ग़रज़ जादूगर सब फिरआऊन के पास हाजि़र होकर कहने लगे कि अगर हम (मूसा से) जीत जाए तो हमको बड़ा भारी इनाम ज़रुर मिलना चाहिए (113)
फिरआऊन ने कहा (हा इनाम ही नहीं) बल्कि फिर तो तुम हमारे दरबार के मुक़र्रेबीन में से होगें (114)
और मुक़र्रर वक़्त पर सब जमा हुए तो बोल उठे कि ऐ मूसा या तो तुम्हें (अपने मुन्तसिर (मंत्र)) या हम ही (अपने अपने मंत्र फेके) (115)
मूसा ने कहा (अच्छा पहले) तुम ही फेक (के अपना हौसला निकालो) तो तब जो ही उन लोगों ने (अपनी रस्सियाँ) डाली तो लोगों की नज़र बन्दी कर दी (कि सब सापँ मालूम होने लगे) और लोगों को डरा दिया (116)
और उन लोगों ने बड़ा (भारी जादू दिखा दिया और हमने मूसा के पास वही भेजी कि (बैठे क्या हो) तुम भी अपनी छड़ी डाल दो तो क्या देखते हैं कि वह छड़ी उनके बनाए हुए (झूठे साँपों को) एक एक करके निगल रही है (117)
अल किस्सा हक़ बात तो जम के बैठी और उनकी सारी कारस्तानी मटियामेट हो गई (118)
पस फिरआऊन और उसके तरफदार सब के सब इस अखाड़े मे हारे और ज़लील व रूसवा हो के पलटे (119)
और जादूगर सब मूसा के सामने सजदे में गिर पड़े (120)

16 सितंबर 2026

नेत्र, अंग और देहदान का संकल्प अब घर बैठे — कोटा में शुरू हुई प्रदेश की पहली “संकल्प सेवा आपके द्वार” पहल

  नेत्र, अंग और देहदान का संकल्प अब घर बैठे — कोटा में शुरू हुई प्रदेश की पहली “संकल्प सेवा आपके द्वार” पहल
2. घर पहुंचकर,ठीक समझाइश से, बढ़ रहा है संकल्प लेने वालों का प्रतिशत

शाइन इंडिया फाउंडेशन की अनूठी पहल : फोन पर समय तय करें, टीम घर पहुंचकर देगी पूरी जानकारी और मौके पर ही भरवाएगी संकल्प पत्र

कोटा।
नेत्रदान, अंगदान और देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा इनसे जुड़ी भ्रांतियों और सवालों का घर-घर जाकर समाधान करने के उद्देश्य से शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा ने एक अभिनव पहल “संकल्प सेवा आपके द्वार” प्रारंभ की है। संस्था के अनुसार, राजस्थान में इस स्वरूप की यह पहली पहल कोटा से शुरू की जा रही है।

इस अभियान का मूल संदेश है—

“संकल्प आप करो, पूरा हम करेंगे…”

अब नेत्रदान, अंगदान या देहदान का संकल्प लेने के इच्छुक लोगों को किसी कार्यालय या संस्था तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इच्छुक व्यक्ति 8386900102 पर संपर्क कर सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक अपनी सुविधा के अनुसार समय निर्धारित कर सकते हैं। रविवार को अवकाश रहेगा।

निर्धारित समय पर शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम संबंधित परिवार के घर पहुंचेगी और परिवार के सभी सदस्यों के बीच नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान से जुड़ी आवश्यक जानकारी साझा करेगी। संकल्प लेने से पहले परिवार की शंकाओं, भ्रांतियों और जरूरी प्रक्रियाओं को समझाया जाएगा। जानकारी से संतुष्ट होने और परिवार की सहमति के बाद संकल्प पत्र मौके पर ही भरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

जानकारी के अभाव में अधूरा न रह जाए किसी का संकल्प

शाइन इंडिया फाउंडेशन की संस्थापिका-सचिव डॉ. संगीता गौड़ ने बताया कि ऑनलाइन की इस दुनिया में घर जाकर फार्म भरवाने के पीछे मूल उद्देश्य यह है कि, उनकी भ्रांतियों का तुरंत ही निवारण हो जाता है इसके साथ ही परिवार के अन्य सदस्य भी जागरूक हो पाते हैं। व्यक्तिगत तौर पर मिलने से मुहिम को और अधिक बल मिलता है ।


घर जाने पर पता चलता है कि,आज भी अनेक लोग नेत्रदान, अंगदान और देहदान संकल्प करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि संकल्प कैसे लिया जाता है, फॉर्म कहां से मिलेगा, उसे कहां जमा करना है, कौन-सी औपचारिकताएं होती हैं और किन परिस्थितियों में दान संभव होता है। कई लोग कानूनी एवं चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को लेकर भी भ्रमित रहते हैं।

उन्होंने कहा कि “संकल्प सेवा आपके द्वार” का उद्देश्य केवल संकल्प पत्र भरवाना नहीं, बल्कि संकल्प से पहले सही जानकारी और परिवार की समझ व सहमति सुनिश्चित करना है, ताकि किसी जागरूक नागरिक की इच्छा केवल जानकारी के अभाव में अधूरी न रह जाए।

परिवार के बीच होगी जागरूकता—यही है अभियान की खासियत

संस्था के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ ने कहा कि किसी भी प्रकार के दान का निर्णय केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उसके परिवार की समझ और सहयोग से जुड़ा होता है। इसलिए टीम सीधे परिवार के बीच पहुंचकर जानकारी देगी।

उन्होंने संकल्प लेने वाले नागरिकों से प्रेरक आह्वान करते हुए कहा—“संकल्प आप कीजिए, पूरा हम करेंगे।”

20 से अधिक ज्योति मित्र निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका

इस अभियान को प्रभावी रूप से घर-घर तक पहुंचाने के लिए संस्था ने 20 से अधिक ज्योति मित्रों की टीम तैयार की है। ये प्रशिक्षित सहयोगी परिवारों तक पहुंचने, जागरूकता संवाद करने और संकल्प प्रक्रिया को सरल बनाने में संस्था की सहायता करेंगे।

इसके साथ ही शहर में 10 स्थानों पर नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान के संकल्प पत्र उपलब्ध करवाए गए हैं, ताकि इच्छुक नागरिकों को संकल्प लेने के लिए अधिक से अधिक सुविधाजनक विकल्प मिल सकें।

और हमने तो उसमें से अक्सरों का एहद (ठीक) न पाया और हमने उनमें से अक्सरों को बदकार ही पाया

 ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियाँ हैं जिन के हालात हम तुमसे बयान करते हैं और इसमें तो शक ही नहीं कि उनके पैग़म्बर उनके पास वाजे़ए व रौषन मौजिज़े लेकर आए मगर ये लोग जिसके पहले झुठला चुके थे उस पर भला काहे को इमान लाने वाले थे ख़ुदा यू काफिरों के दिलों पर अलामत मुकर्रर कर देता है (कि ये इमान न लाएँगें) (101)
और हमने तो उसमें से अक्सरों का एहद (ठीक) न पाया और हमने उनमें से अक्सरों को बदकार ही पाया (102)
फिर हमने (उन पैग़म्बरान मज़कूरीन के बाद) मूसा को फिरआऊन और उसके सरदारों के पास मौजिज़े अता करके (रसूल बनाकर) भेजा तो उन लोगों ने उन मौजिज़ात के साथ (बड़ी बड़ी) शरारते की पस ज़रा ग़ौर तो करो कि आखि़र फसादियों का अन्जाम क्या हुआ (103)
और मूसा ने (फिरआऊन से) कहा ऐ फिरआऊन में यक़ीनन परवरदिगारे आलम का रसूल हूँ (104)
मुझ पर वाजिब है कि ख़ुदा पर सच के सिवा (एक हुरमत भी झूठ) न कहूँ मै यक़ीनन तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वाजेए व रोषन मौजिज़े लेकर आया हूँ (105)
तो तू बनी ईसराइल को मेरे हमराह करे दे फिरआऊन कहने लगा अगर तुम सच्चे हो और वाक़ई कोई मौजिज़ा लेकर आए हो तो उसे दिखाओ (106)
(ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी पस वह यकायक (अच्छा खासा) ज़ाहिर बज़ाहिर अजदहा बन गई (107)
और अपना हाथ बाहर निकाला तो क्या देखते है कि वह हर शख़्स की नज़र मे जगमगा रहा है (108)
तब फिरआऊन के क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा ये तो अलबत्ता बड़ा माहिर जादूगर है (109)
ये चाहता है कि तुम्हें तुम्हारें मुल्क से निकाल बाहर कर दे तो अब तुम लोग उसके बारे में क्या सलाह देते हो (110)

15 सितंबर 2026

और उनकी क़ौम के चन्द सरदार जो काफिर थे (लोगों से) कहने लगे कि अगर तुम लोगों ने शुएब की पैरवी की तो उसमें शक ही नहीं कि तुम सख़्त घाटे में रहोगे

 और उनकी क़ौम के चन्द सरदार जो काफिर थे (लोगों से) कहने लगे कि अगर तुम लोगों ने शुएब की पैरवी की तो उसमें शक ही नहीं कि तुम सख़्त घाटे में रहोगे (90)
ग़रज़ उन लोगों को ज़लज़ले ने ले डाला बस तो वह अपने घरों में औन्धे पड़े रह गए (91)
जिन लोगों ने शुएब को झुठलाया था वह (ऐसे मर मिटे कि) गोया उन बस्तियों में कभी आबाद ही न थे जिन लोगों ने शुएब को झुठलाया वही लोग घाटे में रहे (92)
तब शुएब उन लोगों के सर से टल गए और (उनसे मुख़ातिब हो के) कहा ऐ मेरी क़ौम मैं ने तो अपने परवरदिगार के पैग़ाम तुम तक पहुँचा दिए और तुम्हारी ख़ैर ख़्वाही की थी, फिर अब मैं काफिरों पर क्यों कर अफसोस करूँ (93)
और हमने किसी बस्ती में कोई नबी नही भेजा मगर वहाँ के रहने वालों को (कहना न मानने पर) सख़्ती और मुसीबत में मुब्तिला किया ताकि वह लोग (हमारी बारगाह में) गिड़गिड़ाए (94)
फिर हमने तकलीफ़ की जगह आराम को बदल दिया यहाँ तक कि वह लोग बढ़ निकले और कहने लगे कि इस तरह की तकलीफ़ व आराम तो हमारे बाप दादाओं को पहुँच चुका है तब हमने (उस बढ़ाने के की सज़ा में (अचानक उनको अज़ाब में) गिरफ्तार किया (95)
और वह बिल्कुल बेख़बर थे और अगर उन बस्तियों के रहने वाले इमान लाते और परहेज़गार बनते तो हम उन पर आसमान व ज़मीन की बरकतों (के दरवाजे़) खोल देते मगर (अफसोस) उन लोगों ने (हमारे पैग़म्बरों को) झूठलाया तो हमने भी उनके करतूतो की बदौलत उन को (अज़ाब में) गिरफ्तार किया (96)
(उन) बस्तियों के रहने वाले उस बात से बेख़ौफ हैं कि उन पर हमारा अज़ाब रातों रात आ जाए जब कि वह पड़े बेख़बर सोते हों (97)
या उन बस्तियों वाले इससे बेख़ौफ हैं कि उन पर दिन दहाड़े हमारा अज़ाब आ पहुँचे जब वह खेल कूद (में मशग़ूल हो) (98)
तो क्या ये लोग ख़ुदा की तद्बीर से ढीट हो गए हैं तो (याद रहे कि) ख़ुदा के दाव से घाटा उठाने वाले ही निडर हो बैठे हैं (99)
क्या जो लोग एहले ज़मीन के बाद ज़मीन के वारिस (व मालिक) होते हैं उन्हें ये मालूम नहीं कि अगर हम चाहते तो उनके गुनाहों की बदौलत उनको मुसीबत में फँसा देते (मगर ये लोग ऐसे नासमझ हैं कि गोया) उनके दिलों पर हम ख़ुद (मोहर कर देते हैं कि ये लोग कुछ सुनते ही नहीं (100)

14 सितंबर 2026

रोशनी के लिए पूरी रात दौड़ी कोटा की टीम, 330 किमी सफर में कराए दो नेत्रदान

रोशनी के लिए पूरी रात दौड़ी कोटा की टीम, 330 किमी सफर में कराए दो नेत्रदान

तेज बारिश भी नहीं रोक पाई सेवा—चार दृष्टिहीनों के जीवन में रोशनी की उम्मीद

कोटा। नेत्रदान की सूचना मिलते ही शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम ने तेज बारिश और लंबी दूरी की परवाह किए बिना पूरी रात सफर किया और करीब 330 किलोमीटर की यात्रा में दो दिवंगतों के नेत्रदान संपन्न करवाए। इन दोनों नेत्रदानों से चार दृष्टिहीन लोगों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद बनी है।

रविवार को कोटा से करीब 130 किलोमीटर दूर गरोठ (मध्यप्रदेश) में प्रहलाद जोशी के निधन की सूचना मिली। परिजनों ने तत्काल नेत्रदान की सहमति दी। तेज बारिश के बीच टीम गरोठ पहुंची और रात करीब 1 बजे डॉ. कुलवंत गौड़ ने नेत्रदान प्रक्रिया संपन्न कराई।

टीम के कोटा लौटते ही बूंदी से किरण जैन के नेत्रदान की सूचना मिली। कुछ देर विश्राम के बाद टीम फिर 35 किलोमीटर का सफर तय कर बूंदी पहुंची और सुबह उनका नेत्रदान संपन्न करवाया। उल्लेखनीय है कि किरण जैन के पति स्वर्गीय सुरेश कुमार जैन का भी एक वर्ष पूर्व नेत्रदान हुआ था।

डॉ. कुलवंत गौड़ ने कहा, “हमारे लिए नेत्रदान की हर सूचना किसी की आंखों में रोशनी पहुंचाने का संदेश है। दूरी, रात या मौसम—इनमें से कोई भी चीज उस रोशनी की राह में बाधा नहीं बन सकती।” 

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